सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Monday, March 22, 2010

क्या काबा सनातन शिव मंदिर है ? Is kaba an ancient sacred hindu temple?



क्या काबा सनातन शिव मंदिर है ?


क्या सचमुच हज्रे अस्वद शिवलिंग है ?


क्या मक्का हिन्दुओं का प्राचीन पवित्र तीर्थ है ?


क्या हिन्दुओं का मक्का से कोई धार्मिक संबंध कभी रहा है ?


इन सवालों को रेखांकित करता हुआ एक अंग्रेज़ी लेख अभी कुछ दिनों पहले भाई तारकेश्वर जी ने अपने ब्लॉग पर नुमायां किया था ।
उसके बाद आज ब्लॉगिस्तान के वटपुरूष माननीय श्री ए बी इन्कनविनिएन्ट जी ने भी इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की बड़ी सुन्दर कोशिश की है ।



हिन्दू मुसलिम भाइयों के बीच एकता के बिन्दुओं में पवित्र काबा एक प्रमुख बिन्दु है ।




वे आये दिन ऐसे आश्चर्यजनक किन्तु सत्य तथ्य प्रकट करते रहते हैं जिनके कारण तम प्रहरी तो आये दिन उन पर अपनी निन्दा के बाण चलाते ही रहते हैं


लेकिन उन्हें अपने उन हम अक़ीदा भाइयों की नाराज़गी का भी अन्देशा लगा रहता है जो क्लिष्ट हिन्दी और ‘तत्व‘ से अनजान हैं ।


परन्तु धन्य है वह पुण्य भूमि , जिसने ऐसे महान कर्म योगियों को जन्म दिया ।


धन्य है वह ब्लॉगभूमि , जहाँ कि आखि़रकार इन्होंने आकाश से ज्ञानगंगा को अवतरित कर ही डाला।


धन्य है वह ब्लॉगवाणी , जिसने उन्हें ऱजिस्ट्रेशन देकर मानव एकता का मार्ग प्रशस्त किया ।


धन्य है वह चिठ्ठा जगत , जिसने उनके स्वर को विश्व जन तक पहुंचाने के लिए अनुकूल मंच दिया।


धन्य हैं ये भी ...


और धन्य हैं वे भी ...


सभी धन्य हैं ।


और अन्त में धन्य हैं वे सभी पाठक जिन्होंने सार्थक सामग्री पढ़कर सिद्ध कर दिया कि भारतवासी सचमुच ही सत्य के खोजी और आकांक्षी हैं ।


आज का दिन ब्लॉगिस्तान के लिए एक ऐतिहासिक दिन है ।


आज विश्व के दो बड़े समुदायों के दरम्यान इस बात पर आखि़रकार सहमति बन ही गई कि मक्का एक पवित्र प्राचीन तीर्थ है ।


जिस तीर्थ से मुसलमान आज जुड़े हुए हैं , उससे हिन्दू भाई पहले दिन से जुड़े हुए हैं ।


यहां हिन्दी के पारिभाषिक नामों से नावाक़िफ़ भाइयों की सुविधा की ख़ातिर मैं कुछ शब्दार्थ पेश कर रहा हूं ताकि किसी को भी यह अटपटा न लगे कि कहां काबा और कहां मन्दिर ?


मन्दिर का अर्थ ‘भवन‘ होता है ।


आजकल यह शब्द केवल उस भवन के लिए बोला जाता है जहां ईश्वर की स्तुति वंदना और पूजा उपासना की जाती है ।


काबा भी ईश्वर की उपासना वंदना के लिए ही प्रयुक्त होता है । अतः उसे मन्दिर कहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए ।


वैदिक साहित्य में ‘शिव‘ नाम कई अलग अलग पर्सनैल्टीज़ के लिए आया है ।


सिंह की छाल पर ईश्वर के ध्यान में लीन रहने वाले माता पार्वती के पति भोले जी अर्थात आदम के लिए भी यह नाम आता है ।


उन्होंने ही सबसे पहले सारे जगत का कल्याण करने के लिए काबा का निर्माण किया था ।


उन्होंने ही सबसे पहले अपनी सन्तान को पालनहार के आदेश उपदेश सुनाकर कल्याणकारी मार्ग दिखाया था । इसलिए उन्हें भी शिव कहा जाता है और काबा नामक आराधनालय को उनके द्वारा निर्मित होने के कारण भी शिव मंदिर कहा जाता है ।


शिव‘ वास्तव में सत्यस्वरूप परमेश्वर का एक सगुण नाम है ।


शिव का अर्थ होता है कल्याण करने वाला ।यह उस पालनहार का ही गुण है ।


वास्तव में वही शिव है । काबा को शिव का मंदिर इसी लिए कहा गया है क्योंकि काबा में इकठ्ठा होने वाले लोग उसी कल्याणकारी ईश्वर की वन्दना करने के लिए और उसके आदेश उपदेश जानने के लिए इकठ्ठा होते हैं ।


भाई तारकेश्वर जी ने और श्री ए.बी. जी ने हालांकि कोई मज़बूत शास्त्रीय प्रमाण नहीं दिया है लेकिन इसके बावजूद आज हम उन पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे ।


आज तो हम केवल इस बात का आनन्द लेना चाहते हैं कि तल्खि़यां विदा हो रहीं हैं , नफ़रतें दम तोड़ रही हैं , इनसानियत जीत रही है ।




हिन्दुओं को काबा मुबारक हो ।


निःसन्देह काबा उनका भी है ।


काबा ही क्या , पूरी पृथ्वी पालनहार ने महर्षि मनु को दी थी ।


पूरी धरा उनकी है । धर्म भी उनका और हम खुद उनके




आओ , संभालो अपना सत्य , अपनी सत्ता और अपनी विरासत ।




आज की पोस्ट में किसी भावनाएं तो आहत नहीं हुईं ?


कृपया अवश्य सूचित करें ।


... और जल्द ही हम बताएंगे कि किनके विकारी कर्म बना रहे हैं हिन्दू बुद्धिजीवियों को नास्तिक ?

66 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

आज की पोस्ट में किसी भावनाएं तो आहत नहीं हुईं ?
कृपया अवश्य सूचित करें ।

Tarkeshwar Giri said...

बहुत ही बढ़िया लेख के लिए धन्यवाद्। सारी बाते आपने सिलसिलेवार दी है । अब शायद कुछ को समझ मैं आये की मक्का की असलियत क्या है, क्यों हज करने वाले मुसलमान हिंदुवो की तरह हज करते समय सफ़ेद धोती पहनते हैं और क्यों अपने सर के बाल मुड्वाते है। हम तो पहले से ही कहते आ रहे हैं की जय हो काशी और काबे वाले भोले बाबा की। तुम्हारी महिमा सचमुच अपरम्पार है। हम यंहा गंगा जल से नहलाते हैं आप को तो अपने तो गंगा जल का (आबे जम जम) भी जुगाड़ काबा मैं कर रखा है।

Mohammed Umar Kairanvi said...

बिना पढे कहता हूं शानदार वह इस लिये कि चावलों के दो चार दानों से ही पता चल गया था ‌कि खिचडी शानदार पकी है

Amit Sharma said...

मैं किसी पे आक्षेप नहीं लगा रहा हूँ . सिर्फ इतना जानना चाह रहा हूँ ,की यह सब मूर्ति पूजा से किस प्रकार भिन्न है
http://27amit.blogspot.com/2010/03/blog-post_4032.html

Amit Sharma said...
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अज्जु कसाई said...

आज विश्व के दो बड़े समुदायों के दरम्यान इस बात पर आखि़रकार सहमति बन ही गई कि मक्का एक पवित्र प्राचीन तीर्थ है।

is fesle men hamen shamil na samjha jaye

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

पानी दिवस पर आपने सचमुच किसी का पानी उतरने की कोशिश नहीं की.....
.....
...........
विश्व जल दिवस..........नंगा नहायेगा क्या...और निचोड़ेगा क्या ?...
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से..
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_22.html

मुनीश ( munish ) said...

Definitely the greatest write-up ever presented in Blogwood. Very very impressive indeed ! Historical endeavour.

Shahvez Malik said...

Anwer Bhai Aapka Jawab nahi itne achche lekh, kuch hume bhi sikhayen.

DR. ANWER JAMAL said...

@Shahvez Bhai
Aap Agar ab bhi na jaage
padhen. Mere blog par bhi hai aur bazar men bhi.
Insha Allah apki murad puri hogi.

DR. ANWER JAMAL said...

@Sir Munish
Thanks for ur nice words.

DR. ANWER JAMAL said...

@Murari ji
Pani utarna mera maqsad pehle bhi kabhi nahin raha.
Aaj bhi nahin hai.
Thanks.

DR. ANWER JAMAL said...

@Ajju Bhai
Ek din woh bhi ayega , jab duniya jan legi ki Purana kasai kaun hai?
Aap ki kasaigiri hai kitne din ki?
juma sanichar kul do din ki.
yaqhan to har kaam prachin kaal se hai. Us din zuroor sahmat ho jana.
shukriya.

DR. ANWER JAMAL said...

@Amit ji
kripya dhiraj rakhiye, yeb subject bhi ayega. Aaj humne janbujh kar zyada kuchh nahin chheda .
Problem ye hai ki arya samaji apna adanga lagaye bagher baaz nahin aate aur agar inko jawab diya jaye bhawnayen sanataniyon ki bhi aahat ho jati hain.
bataiyye, kisko dekhen?
bus ab ye karunga ki kuchh din aapke hi naam kar dunga aur digar logon ko aane se mana kar dunga.
Tab aap puchhna aur main bataunga.
Ek baar Ved Vyathit ji ko bataya tha, aaj tak idhar jhankne nahin aaye.
baharhal apki haseen muskan ke liye shuriya.

DR. ANWER JAMAL said...

@Blog Prawartak Janab Kairanvi sahab ,
Aap ko padhne zururat bhi kya hai.
Aapka likha baanch kar hi to log sach bat maan rahe hain.
Kaba aur Namaz tak to log aa hi gaye hain.
sabka malik ek hai, ye bhi sabko pata chal gaya hai.
Baqi baaten bhi dhire dhire khul jayengi.

DR. ANWER JAMAL said...

@ Bhai Tarkeshwar ji ,
humne apko original article padhwaya hai.
is hamen apka original comment chahiyye.
Aap to bade miyan ke blog se Basi comment utha laye.
ise reject kiya jata hai.
mujhe apke original comment ka intezar hai.
Dhanyawad.

sahespuriya said...

अनवर भाई ,माशाल्लाह क्या कहूँ आपके बारे मैं? कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने के बराबर है. आपके लेख देख कर अपने उस्ताद मरहूम इक़बाल राजा की याद आ जाती है, आप और जनाब उमर भाई को मैं अपना उस्ताद मानता हूं, क्यूंकी आपने जिस तरह से नामनिहाद 'बुद्धिजीवियो' का को मुँह तोड़ जवाब दिया है वो भी सब्र का दामन छोड़े बगैर वो क़ाबिलेतारीफ़ है.
जब भी मिलते हो मुस्कुराते हो
इतनी खुशियाँ कहाँ से लाते हो

Amit Sharma said...
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Amit Sharma said...

भगवान् की कृपा और आपका आशीर्वाद बना रहेगा तब तक इस मुस्कान में कोई कमी नहीं आएगी
बाकी धीरज तो काफी धरा हुआ है , वैसे आपकी एक बात मुझे समझ में नहीं आ रही, की आप बार बार जो कह रहे है -की जवाब दे दिया तो लौट कर नहीं आऊंगा . आप बड़े है मै उम्र, अनुभव हर चीज में आप से कम हूँ . तो बड़े होने के नाते मेरी जिज्ञासाओ का समाधान करना आपका फ़र्ज़ बनता है ,
अगर आप यहाँ किसी विषय की व्याख्या करने बैठे है तो, सहमती भी मिलेगी और शंका भी निकलेगी. फिर शंका समाधान में बार बार. यह गुर्राहट क्यों कर आ जाती है की लौट कर नहीं आएगा.

और साथ ही साथ यह भी बता दीजिये मेरी यह मुस्कान इंसान की लगती है या जैसा की आप विचारशुन्यजी की आड़ लेकर मुझे कुत्ता बता चुके है तो कुत्ते जैसी लगती है .
बुरा न मानियेगा क्योंकि मैंने भी नहीं माना था , क्योंकि जब आप को बड़ा माना, और माना क्या है ही बड़े आप तो. बड़े तो छोटो की की बात पे झुंझला के गाली भी निकाल ही देते है .फिर चाहे समझाने के लिए या फिर धमकाने की लिए .

Ratan Singh Shekhawat said...

क्या काबा सनातन शिव मंदिर है ?
इस तरह के प्रश्न उठाने व उनका उत्तर देने की कोई आवश्यकता ही नहीं है और न ही इनका कोई ओचित्य |
इस तरह के प्रश्न और एक दुसरे समुदाय में कमियां गिनाने वाले लेख किसी का भी भला नहीं कर रहने वाले है उनसे विद्वेष ही फैलना है इसलिए इन सब से बचना ही देश व साम्प्रदायिक सोहार्द के लिए जरुरी है |

sleem said...

balogi baba mere swalo ka jaewab bhi do naa????? yaa mere swalo se hi aaapne blog likha he????? baba niji aakshep nahi karna chahta...lakin aap jese maha pursho ke bare me jankaari joothana bhi hamara parm kartvya he?????baba mene soona he aap ke char ammaye thi ???? aap ka sabse choti amma ke saath kooch ???????baba inhi karno se deemag me vikaritiya aa jati he....ab vo thi to ammma hi na sagi nahi thi to kya huaa???? baba sorry....

Shah Nawaz said...

"हिन्दू मुसलिम भाइयों के बीच एकता के बिन्दुओं में पवित्र काबा एक प्रमुख बिन्दु है।"

मेरे मनपसंद विषय पर आपने लेख लिखा है अनवर भाई...... और बहुत ही ज़बरदस्त लिखा है....

sleem said...

balogi baba aapki bhavnaye ahat karne ke liye mafee dhahta hoon ,,,,ye hoti dilo pe chot...aap meri choto se bhokhla ke shant ho gaye ...swal jo nigalte bana naa ugalte??? email per dhamki bhi de di parinaam ke liye taiyaar raho....baba aapne aisi dhamki kyo dee???? aap to blogiye ho??? ya jihadi??? apni okaat per utar aaye....baba mafee chahta u ki aap ke dil ko dhookhaya...soorryy

Amit Sharma said...

@sleem
भाई साहब सलीम चाहते क्या हो यार, अपने कथनों में एकरूपता तो रखो .समझ में नहीं आये किसी के वह बात कहने से मतलब ही क्या. ऊल-जलूल क्या क्या लिखे जाते हो .दिमाग पे जोर डालने के बाद भी कोई बात समझ में नहीं आती .थोड़ी कृपा करो और दिमाग को थोडा शांत करके फिर कहो.तो मतलब भी समझ में आये

Anonymous said...

@Sleem
abe kyon farzi uda raha hai. tera to email hi nahi dikhta, fir koi dhamki kaise dega?

sleem said...

ameet bhai mene blogee baba se poochha tha ki kaba aakaar yoni jesaa kyo he???? baba bidag gaye ???kya swal karke gunaha kar liya???

sleem said...

blogi baba dookan me milawati maal bech rahe ho????vetican ka bhi maal rakh lona...uske bhi garaha k aate honge...baba achanak bakfoot per khelane lag gaye or dfencive bhi ho gaye...kya baat he????

बवाल said...

बहुत मज़ेदार गप्प हांकते हैं डॉक्टर साहब आप भी। हा हा। लेकिन लेख बड़ी हुनरमंदी से लिखा है जी आपने। ऐसी मीमांसा कोई डॉकटर ही कर सकता है। शुक्रिया।
फ़ीअमानिल्लाह

Anonymous said...

HAR HAR MAHADEV SAHAB JI AAP KA LEKH ACHA THA PAR AISA KYO LAGA KI AAP KA MATLAB ISLAM MAIN SHIV KO DIKHANA HAI AUR TO AUR AADAM KI TULNA KABHI BHAGWAN SHIV SE KARE KYO KI SHIV KA NA NIRMAN HUA NA AANT HOGA JAHA TAK KABA KA SAWAL HAI WO BHAGWAN SIV NE NAHI RAJA VIKRAMADITYA NE BANAYA YE JAROOR SAHI HAI KI WO SHIV MANDIR HI HAI AUR HUM HINDU MANDIR KI TARAH USKA DHANCHA HAI DUNIYA KO YE ASLIYAT NA MALOOM HI ISLIYE US SHIVLING KO TODA GAYA AUR TO AUR AB HUME USE KEHNE KA KOI HUK NAHI KYO KI WO AB AAP LOGO KI AMANAT HAI HINDU NIYAM ANUSAR USKI JAB NIYAM SE POOJA PATH NO HO WO DUSHIT HO JATA HAI HAMARE PASS CHAMATKARI AMARNATH , CHAMATKARI SHANI MANDIR AUR BHI SARE PRAMAN HAI

EJAZ AHMAD IDREESI said...

आज की पोस्ट में किसी भावनाएं तो आहत नहीं हुईं ?
कृपया अवश्य सूचित करें ।

DR. ANWER JAMAL said...

@Sleem
ke naam se likhne wale bhi
aapko maine koi email hi nahin kiya .
email kholne tak fursat nahin hai.
isi wajah se kai sawal uttar ke liye pade hain.
Aap gali dena chahte hain , woh bhi maa ko ?
Kis Kis maa ko gali doge?
kal BHi maine Parwati ji ko maa likha hai.
aapne ghalat suna hai.
Meri Matayen Chaar se Zyada hain.

DR. ANWER JAMAL said...

@ Amit ji
I love u from the bottom of my heart.
Aapki muskan farishton jaisi hai.
Pehle bhi vichaar shunaya ka hawala dene ka matlab woh nahin tha jo apne likha hai.
matlab kewal ye tha ki unhone bekar bahas se bachne ke liye kaha hai.
Apki baat sahi hai.
Apki jigyasa shant karna mera kartavya hai.
Insha Allah jaldi hi apse bhi jee kholkar baat hogi.

मेरा देश मेरा धर्म said...

साहब जमाल जी, आपका अनुसरण करने वाला कोई हिन्दू अगर आपके ब्लॉग पर है तो वो हूँ मैं, पंकज , फिर भी आप अपने इस हिन्दू मुरीद की एक छोटी सी मुराद पूरी नहीं कर रहें - आप ने सोचा फोटो change जी नहीं, वो तो एक छोटा सा मजाक था कैसे - आओ अब मूड change करें ! भला जिसे इस्लाम जानने के लिए गुरु चुन लिया उसके बारे में तो दिल से esa कभी सोच भी नहीं सकता |

मुरीद की मुराद वाली बात रह ना जाए इसलिए अपनी प्रार्थना रखता हूँ - आप अहिंसा व्रत ले लीजिये !

व्रत ले रहें हैं की नहीं, बताईगा जरूर

आपके रूबरू आपका हिन्दू मुरीद

पंकज

sleem said...

CACHHA CHALO CHODO ,..AAP MERE EK BHI SWAL KA ANSWER DE DO NAA ..PLEASE ???? VO PICHHVADE KO UNCHHA KARKE NAMAAJ PADHNE VALI BAAT...OR LING KA AGLA PHOOTRAA KATNE VALI BAAT KA ...PLEASE CHACCHHA KYA MANYTA HE?????

sleem said...

BALOGI BABA CHALO CHODO..AAP JAHILO KO JAVAB NAHI DETE HE????? YE BATAIYE BABA KI AAP JIS ALLAHO KO MANTE HO VO SARV SHAKTI MAAN HE...LAKIN USKE MANNE VALE BANDE ITANE KAMJOR KYO??????AJ KEVAL AKELA AMERICA TOOM SUB PERO KI JOOTI SAMJH RAHA HE TOOM USKI ??? KA BAL BHI BANKA NAHI KAR SAKTE (KEVAL DHOKHE 11/9 KIYA FITRAT KE HISAAB SE)USNE IRAAK KO UJAAD DIYA ..PAKISTAN KO BHIKARI BANA KE RAKHA HE..AFANISTAN KO TABAH KAR KE RAKH DIYA...ARAB VALE USKE GULAAM HE.....YE HA TOOMAHARA ISLAAM ???? KANHI KOI KAMEE HE TOOMAHRE DHARAM ME JO TOOMHE ITNA KAMJOR BANA DIYA...TOOMHARA DHARAM JIVAN KA SAMPOORN VIKAS NAHI KAR SAKTA HE??? AAJ HINDUVO KA BHARAT KITNA SHAKTI SHALI HE..AAJ BODHO KA CHINA KITNA SHAKTI SHALI HE..JO HINDU DHARAM KA HI EK ROOP HE.....JAMAL CHACHHA MALIK ITNA POWER FULL BANDE ITANE KAM JOR KYO???? CHCHHA YE TO BEHOODA QUESTION NAHI HE NA??? KANHA KHADA PATA HE ISLAAM APNE KO VISHAV ME....AAAJ AMERICA TOOMAHARI EK CHOTI SI NADANI ME POORE ISLAAM JAGAT KO KHATAM KAR SAKTA HE??/KITNE DEEN HEEN HE TOOHARE DHARAM KE BANDE??????GIVE ME ANSWER

Rashmi said...

Aapka yeh blog to bahut hi achha hai, main Shah ji Dhanywad dena chahungi ki unhone orkut community "Islam in Hindi" mein apki postka link diya.

Vaise mera bhi manna yahi hai ki hamara sabse purana Dharm Sanatan Dharm hai, sath mujhe bhi lagta hai ki akhiri Avtar Muhammed sahab hi hain.

MLA said...

हिन्दुओं को काबा मुबारक हो ।

क्या ज़बरदस्त बात लिखी है अनवर भाई!



निःसन्देह काबा उनका भी है ।

काबा ही क्या, पूरी पृथ्वी पालनहार ने महर्षि मनु को दी थी । पूरी धरा उनकी है । धर्म भी उनका और हम खुद उनके । आओ , संभालो अपना सत्य , अपनी सत्ता और अपनी विरासत ।

Anonymous said...

You have admitted that Kaba is Shiva Temple, So, its final now,

kindly shut up for future, and lets come to Hinduism which is far better than your stinky izlam///

sleem said...

chchhha ye batvo ki kaba ka aakar choot ki jesaa kyo he???? shiv ling bilkool fit kyo bethta he usme????kya he ye kaba ??jab aap haj jate ho to usme jhankh kar kyo dekhte ho??? chchhha batyen????

sleem said...

chachha 75%americis and west world follws this thing that ...kuran..is toylet paper ...wy give me answer?????

sleem said...

ye bataiye blogiye baba ki islaam me aurto ko admiyo ki jese road per namaj padhne ki ijaajat kyo nahi he?????kya khooda unke liye nahi???? mere yaksh persno kaa utarr dijiye varn shankr gandharav maharaaj??//

sleem said...

blogeeye baba ye batiye ki keval moordo ko hi ky poojte ho aap...jindo ki seva honahi sakati aap se???

sleem said...

balogiye baba ye bataiye ki har railway staion per alllah ke nam se dede baba hi kyo milte he??????

sleem said...

kya blogiye baba ?????? is se achha to naai ki dookan khol leta ..kamai to ho jaatee...salo ko tail ke kuve mil gaye nahi to poora islaaam jagat hath me katora liye firta..allaha ke naam per dede baba...arbiya ke bhikhari bbhart rastra ko or badnaam kar rahe he?????

ab inconvenienti said...

श्री ए.बी. जी ने हालांकि कोई मज़बूत शास्त्रीय प्रमाण नहीं दिया है

चुनौती स्वीकार करो और पूछो जो पूछना है, अगर मांगे गए तो सभी प्रमाण दिए जायेंगे. एक बार मांग कर तो देखो.

Mohammed Umar Kairanvi said...

गुरू जी अब तमाशाबीन जम गये हैं अब तमाशा शुरू किजिये, आज काबा की हवा है तो क्‍यूं न आज काबा पर वह ज्ञान प्रस्‍तुत कीजिये जिसे पढकर जिनके मुंह खुले वह खुले रह जायेंगे जिनके बंद वह खुलना भूल जायेंगे

वैसे आप मेरे से अधिक ज्ञानी हो उचित समय पर उचित निर्णय ले सकते हो और शायद ले भी चुके होंगे

गुजारिश वही है इधर पढे लिखे भाई हैं शालीनता से बात कीजिये आपकी शालीनता की तो कसमें खायी जाने लगी है इस लिये शालीनता बनाये रखिये

vedvyathit said...

mere piry bhai ydi aap apni jdon ko hi phchan lengen to aap svym manvta vad ke murid ho jayenge jb aap khule mn se schchai ko svikar krne lgenge to sb smsya smapt ho jayegi itihas ki schchai bdi kdvi hai us ne nfrt hi nfrt di hai aap use bdhayen nhi apitu apni jdon ko to phchane aap ki do ya teen jyada se jyada char pidhi phle ka aap ka apna ithas kya tha kya aap ko vh bhi maloom hai aap door 2 ki to bat krte hai pr apni jd se pta nhi kyon kte hai khoj le unhe aur jan le ki aap bujurg bhi gnga maa ko shish nvate the mkkrshr bhgvan shiv ki aaradhna krte the kya yh itihas nhi hai bs itna si schchai ko janna hai
dr ved vyathit

vedvyathit said...

'mnthn julai .1990 me is pr sprman aalekh chhpa hai 'bhart aur arb ke aitihasik smprk sootr ' lekhk hai agsty prishth hai 45 se 59 tk
dr. ved vyathit

SHAZY said...

main bas itna hi kehna chahta hoon ki jo aap logon ko samjhana chahte hain use logon ko nishpaksh ho kar dekhna aur samajhna chahiye

DR. ANWER JAMAL said...

@आदरणीय सीनियर सिटीज़न जनाब ए. बी. जी ,
एकता और सुधार की बातों को मानने के लिए हम प्रमाण नहीं मांगते ।
इस उम्र मंे आप पर अधिक लोड डालना वैसे भी ठीक नहीं । लोगों को ज़रूरत हुई तो आपकी बात के समर्थन में प्रमाण भी हम ही उपलब्ध करा देंगे । वैसे भी यह मुमकिन नहीं है कि पृथ्वी के केन्द्र पर एक अहम हिन्दू तीर्थ हो और उसका ज़िक्र वेदों और पुराणों में न हो ।
अलबत्ता हरेक महापुरूष के बारे में फैला दी गई अश्लील और बेहूदा कथाओं को विकार समझकर हम नकारते हैं । अब यदि आप या कोई दीगर आदमी उन्हें सत्य मानता है तो उनकी सत्यता के हक़ में प्रमाण दिया जाना ज़रूरी है । आप दें या कोई और , जो चाहे दे । हो सकता है कि हम ग़लत समझ रहे हों और हक़ीक़त कुछ और हो ।

DR. ANWER JAMAL said...

@प्रिय मोहक मुस्कान स्वामी भाई अमित जी ,
आपके सवाल के जवाब में मेरा चुप रहना मात्र इस कारण से है कि
1- मैं आपको खोना नहीं चाहता ।
2- दो आदमियों की बातचीत में ऐसे भी प्रसंग आ जाते हैं जो दूसरे लोगों को नागवार लगते हैं ।
3- इसीलिये मैंने आपको दो प्रश्नवीरों का हश्र सुनाकर सावधान करना अपना फ़र्ज़ समझा ।
4- आजकल मैं श्री मुरारी जी की सलाह मानकर ‘लहजा सुधार प्रैक्टिस‘ कर रहा हंू । आपको जवाब देता हूं तो मेरी प्रैक्टिस खण्डित हो जायेगी ।
... लेकिन आपके आग्रह को पूरा करने के लिए मैं आपको जवाब देने का प्रयास करूंगा ।

DR. ANWER JAMAL said...

मैं अपने सभी पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं और उनके प्रति भी जो मुझे नियमित रूप से नापसन्द का वोट देते हैं । उनकी नियमित आमद सराहनीय है ।
सबका आभार ।
हमारा तो मिज़ाज ये है कि
माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गये , गुज़रे जिधर से हम

rajan said...

me apne musslim bhaio se ek baat puchta hu ki aap ya aapka dharm vyaktigat swatantrata (aajadi) ke bare me kya sochte he

DR. ANWER JAMAL said...

व्यक्तिगत स्वतंत्रता की हद है और वह ये है कि सामूहिक हितों को नुकसान न पहुंचे .

tanveer said...

क्या काबा सनातन शिव मंदिर है
इस विषय से संबंधित दो अच्छी पुस्तकें मैने पढ़ी है जिसका नाम एवं अध्याय संक्षेप में दे रहा हूँ साथ में लिंक भी
पुस्तक जो उर्दू जगत में तहलका मचा दिया-''अगर अब भी ना जागे तो
अध्याय-२ हिन्दू क़ौम का नबी पृष्ट-२९
अध्याय-३ क़ुरआन में हिन्दू क़ौम का उल्लेख पृष्ट-३६
अध्याय-५ सर्व प्रथम दिव्य ग्रन्थ वेद पृष्ट-६५
अध्याय-८ इस्लाम और हिन्दू धर्म- नामों की समानता पृष्ट-१ツ४
अध्याय-१४ वैदीक धर्म में काबे की हक़ीक़त पृष्ट-१३९
Free Download address
http://www.scribd.com/doc/26191465/Agar-Ab-Bhi-Na-Jage-To

इसी विषय से संबंधित एक और पुस्तक है -''क़ुरआन-वेद कितने दूर कितने पास
अध्याय-१ वेद और क़ुरआन का धर्म एक ही है पृष्ट-१४
अध्याय-२ आदि ग्रन्थों का : देवदूत सर्वमान्य है पृष्ट- १९ से ३२
Free Download address
http://www.scribd.com/doc/19135603/Quran-Ved-Kitne-Door-Kitne-Pas

Hamza Sheth said...

"....मन्दिर का अर्थ ‘भवन‘ होता है ।
आजकल यह शब्द केवल उस भवन के लिए बोला जाता है जहां ईश्वर की स्तुति वंदना और पूजा उपासना की जाती है ।
काबा भी ईश्वर की उपासना वंदना के लिए ही प्रयुक्त होता है । अतः उसे मन्दिर कहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए..."

Dear Anwar sir, your intension to bring communal harmony through this column might be good, May Allah knows best, but in general i differ at some extent regarding your definations.. You said A temle mean where mostly God is raised and Kaaba is also been worshipped for same purpose and so according to you it is okey to call kaaba as 'mandir' too.. But i found this comparision some what illogical.. We all know that a temle literally means a place where gods are been praised in the forms of idols or you can say it is a place where idol worships are done.. BUT Kaaba is not the place of idol worship.. No idol is been worshipped in kaaba in the form of God.. So it is quite wrong and illogical to call a kaaba as temple.. Literally it sounds ok, but in reality it is not so....

विश्‍व गौरव said...

हजरे अस्वद (काला पत्थर) कि हक़ीक़त

चूँकि मेरा यह ब्लॉग केवल अंतिम रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के जीवन के सत्य तथ्यों के बयान पर आधारित है अतः मैं किसी भी अतिरिक्त लेख से परहेज़ करता हूँ एवं कोशिश यह होती है कि आप के जीवन के उन्हीं तथ्वों को बयान करूँ जो सही रवायतों पर आधारित हैं लेकिन कुछ समय पूर्व मैंने हजरे अस्वद एवं काबा के बारे में कुछ नकारात्मक विचार वाले व्यतियों जिनका ज्ञान सरल तथा गलत विचारों एवं सोंच से भरपूर है के लेख तथा उनपर कमेंट्स पढ़ा इन आलेखों में ख़ास तौर से हजरे अस्वद के बारे में जो बकवास कि गई है वोह लेखक के मानसिक बिमारी का उदहारण है काबा तथा हजरे अस्वद का तअल्लुक़ किसी सनातन धर्म अथवा शिव या शिव लिंग से क्या हो सकता है ?दर असल लेखक ने झूटे इतिहास कारों की झूटी बातों पर भरोसा करके जिनका कोई अस्तित्व नहीं है एक अफसाना तराश कर लेख का रूप दे दिया है . ऐसे लोग जिन का ज्ञान सरल तथा कमज़ोर होता है जो सत्य असत्य में अंतर नहीं कर सकते और न ही करने की कोशिश करते हैं झूटी बातों को इतिहास का रूप देनें वाले इतिहासकारो की हर सच्ची झूटी बातों को सत्य समझ कर उसपर ईमान ले आते हैं, ठीक उस अबोध बच्चे की तरह जो दादी माँ की परियों तथा देवों की कथाओं को सच समझ बैठता है और दिनों रात उन्हीं के सपने देखा करता है
चूँकि हमारे इस्लाम धर्म में किसी भी धर्म का ठठा तथा उस से सम्बंधित किसी चीज़ का मजाक उड़ाना निषेध है इसलिए मैं सनातन अथवा शिव एवं शिवलिंग की सत्यता अथवा असत्यता के बारे में कुछ नहीं कहूंगा हाँ इतना ज़रूर है कि हमारे धर्म के बारे में जो असत्य तथा अन्याय पूर्ण बातें कही जाती हैं उनका उत्तर अवश्य दिया जाए! काबा कि हकीकत के बारे में मैं इस से पूर्व लिख चूका हूँ तथा मौक़ा मिला और अल्लाह ने चाहा तो मक्का फतह करने के बयान के समय लिखूंगा
अब निम्न में हजरे अस्वद के बारे में जो सत्यता है उसे बयान कर रहा हूँ इस यकीन के साथ कि जितना ब्यान कर रहा हूँ केवल उतना ही सत्य तथा कुरआन (इश्वर के बयान) एवं हदीस (नबी की बातों तथा कार्यों) से साबित है जिन्हें आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के प्यारे साथियों रज़ीअल्लाहोअन्हुम ने देखा , सुना ,समझा तथा ब्यान किया है बाक़ी सब बे सर पैर की बातें एवं अफ़साना है , अल्लाह हमें सही सोंच दे
हजरे अस्वद क्या है ? : हजरे अस्वद काबा के दक्षनी कोने में मौजूद लाली मिला हुआ एक काला पत्थर है जो ज़मीन से डेढ़ मीटर की उंचाई पर काबा की दिवार में लगा हुआ है. यहाँ यह बताते चलें कि शुरू में हजरे अस्वद का आकार तीस सेंटी मीटर के करीब था लेकिन अनेक घटनाओं की वजह से उस में परिवर्तन आता गया तथा अब अनेक साईज़ के केवल आठ छोटे छोटे टुकड़े बचे हैं जिन में सब से बड़ा छोहारे के आकार का है , यह तमाम टुकड़े करीब ढाई फिट के कुतर में जड़े हुए हैं जिनके किनारे चांदी के गोल चक्कर घेरे हुए है. इस की हिफाज़त के लिए सब से पहले जिसने उसे चांदी से गच दिया वो अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ियल्लाहो अन्हो हैं फिर बाद के राजाओं महाराजाओं ने भी उस में सोने तथा चांदी मढ़वाये सब से अंत में सउदी अरब के राजा शाह सऊद ने इसे खालिस चांदी से मढ़वाया.
इस्लामी ईतिहास में हजरे अस्वद से एक नेहायत ही दुखद घटना जुडी हुई है, अबू ताहिर क़र्मोती (जिस का सम्बन्ध क्रामेता नामी शीई धर्म से था ) नाम के एक आक्रमणकारी ने सन ३१७ हिजरी में मक्का पर आक्रमण करके मक्का की पवित्रता को भंग कर दिया एवं काबा की बेहुरमती की एवं हाजियों को मार कर ज़मज़म के कुंवे में डाल दिया,तथा ज़मज़म के कुब्बे को गिरा दिया एवं काबा की दिवार को गिरा दिया तथा काबा की चादर को फाड़ कर अपने साथिओं में बाँट दिया एवं हजरे अस्वद को निकाल कर अपने साथ ले गया . बाईस वर्ष बाद सन 339 हिजरी में फिर दोबारा उसको उसके स्थान पर लौटा दिया गया
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http://abdulaleemsalafi.blogspot.com/2010/08/blog-post_7741.html

Shabbir Khan said...

क्या बकवास है यह सब? कावा में कोई शिवलिंग? नहीं है, भावनाओं में न वहें प्लीज़.........यह सफ़ेद झूट है, बिलकुल झूट....पाक जगह पर शिवलिंग? हा हा हा हा!
बंद करों यह बकवास और गन्दगी!

DR. ANWER JAMAL said...

काबा का जिक्र संस्कृत में
दोस्तो ! काबा जमीन के केंद्र में स्थित है और दुनिया की बडी बडी जिन कौमों के धर्म ग्रंथों को हमने पढा है उनमें काबा का जिक्र मौजूद है।
जो कौम जिस भाषा को बोलती है, उस का नाम भी उसी भाषा में मिलेगा, यह स्वाभाविक बात है। काबा को अगर संस्कृत में तीर्थ और मंदिर कहा गया है तो इसमें कुछ भी अजीब या अनहोनी बात नहीं है।
ज्ञानी हिंदू जानते हैं कि ईश्वर एक है और उसकी कोई मूर्ति नहीं बनाई जा सकती और न ही वह जन्म लेता है और न ही वह कभी मरता है। इसके बावजूद आप देखेंगे कि हिंदुओं में मूर्ति पूजा का जबर्दस्त प्रचलन है। इससे पता चलता है कि हिंदू भाई धर्म की उन मूल मान्यताओं से बहुत दूर चले गए हैं, जो कि उन्हें सच्चे ऋषियों ने कभी बहुत पहले सिखाई थीं।
एक ही ईश्वर के बहुत से नामों में ब्रह्‌मा, विष्णु और शिव भी हैं।
बाद में हिंदुओं ने इन तीनों नामों से तीन अलग अलग देवता समझ लिए और जो जिस देवता को पूजता है, वह काबा को उसी देवता का मंदिर बता देता है।
ये तीन नाम आदमियों के भी हुए हैं और उनके किस्से भी देवताओं के किस्सों में जोड दिए और फिर बहुत सी बातें अपनी तरफ से झूठ ही गढ लीं जैसे कि शिव जी भांग पिया करते थे या उन्होंने जहर पीकर गले में रोक लिया था या कि वह भस्मासुर से डर कर भाग गये थे।
उनके नंगे रहने और नंगे होकर ही दूल्हा बनने की बातें भी ऐसी ही झूठी और मनघडन्त हैं और उनके लिंग के बारे में भी बहुत सी बातें झूठी बना लीं और फिर काबा के हजरे अस्वद को ले जाकर अपनी कल्पना से जोड दिया।

DR. ANWER JAMAL said...

काबा के हजरे अस्वद की हकीकत

काबा का हजरे अस्वद एक निशानी है जिसे ईश्वर ने आदम अलैहिस्सलाम को तब दिया था जब कि उन्हें स्वर्ग से धरती पर भेजा गया था।
इस कथा को हरेक धर्म-मत के मानने वाले अपनी अपनी कल्पना के अनुसार बयान करते हैं।
उन सभी कथाओं को कुरआन और हदीस की रौशनी में पढा जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाती है।
कोई क्या मानता है ?
यह देखकर मुसलमानों को बिदकने की जरूरत नहीं है बल्कि अपने मुखातब और मदऊ की मानसिकता को और उसके रूझान को समझने की जरूरत है। इसी के बाद यह संभव हो पाएगा कि आप सच को उसकी भाषा में और उसके समझने लायक शब्दों में कह पाएं,
वर्ना वह अल्लाह के नाम से चिढता रहेगा और खुद ईश्वर का नाम लेता रहेगा।
ऐसे ही मुसलमान शिवलिंग का नाम सुनते ही झल्ला पडेगा और खुद यह मानता रहेगा कि यह एक पत्थर है जो कि बहुत से वाकयात की यादगार और उनका निशान है।
संस्कृत-हिंदी में 'शिव' का अर्थ 'कल्याण' करने वाला है और 'लिंग' का अर्थ 'चिन्ह' है।
इसका मतलब है शिव का चिन्ह यानि एक ऐसा चिन्ह जिसे देखकर शिव याद आए।
शिव नाम यहां ईश्वर के लिए भी आता है और सबसे पहले मनुष्य के लिए भी और हजरे अस्वद दोनों से ही जुडा है। यह ईश्वर से भी जुडा हुआ है और दुनिया के सबसे पहले आदमी से भी जो कि हम सबके बाप हैं।
यह हजरे अस्वद हमें याद दिलाता है कि हम सबका ईश्वर और हम सबका बाप एक है इसलिए हम सब आपस में एक ही परिवार हैं।
अतः कोई किसी को न सताए,
जितना हो सके सबका हम भला करें,
इसी से ईश्वर और हमारे मां-बाप खुश होंगे,
धर्म यही है।
इन बातों को एक तरफा होकर न सोचें,
सभी भाई-बहनों से हम यह विनती करते हैं,

धन्यवाद !

Shabbir Khan said...

अच्छा होगा अगर आप शिव, मनु, स्वामी दयानंद (वेवकूफ अश्लीलता फैलाने वाला गुरु) के बारे मैं लोगों को सच्चाई पहले बता दे, ना की उनमे सुधार करके आदर्श की तरह से पेश करे!

कहीं ऐसा ना हो आप इनमे सुधार करते-करते थक जाए, और फिर लोग अश्लीलता के जाल मैं फस जाए!

अच्छा होता आप सिर्फ अपने ब्लॉग में इस्लाम के बारे में सच्चाई पेश करे, जिसको सच पसंद होता है, वोह खुद बुराई और झूट से मूंह मोड़ लेता है!

आप तो कृष्ण? राम? को भी मानते है, तो फिर इन्द्र, भस्मासुर, गणेश, हनुमान, शिव, जैसे काल्पनिक चरित्र को भी मानते होंगे, और अगर नहीं मानते तो फिर मुझे यह बताइये कि फिर इस कहानी में अब बचा ही क्या?

आप चाहे तो इस कहानी में भी इन्द्र, भस्मासुर, गणेश, हनुमान, शिव, जैसे काल्पनिक चरित्र के बिना भी इस कहानी में जान डाल सकते है, क्योकि यह काल्पनिक कहानी भी एक इंसान ने ही लिखी है, जिसको देवत्व प्रधान कर दिया गया!

आपके ब्लॉग कि अनेक पोस्ट काबिल-ए-तारीफ़ है!

पर मेरी बात को समझे प्लीज़...,,, मैं कुछ आपत्तियों कि वजह से ही यह बात रख रहा हूँ!

आप जिन कपटियों को समझाने कि कोशिस कर रहे है, अगर इनको सच कि पहचान होती तो कब के समझ जाते!

और फिर कुरआन पाक क्या कहता है आप जानते तो है!

Peace For all said...

Excellent, marvellous pice of work ANWAR BHAI. Your patience, your work and your love for humanity is amazing. Only saffron zealots and fanatics will hate you. No problem, these uncivilized people don't even spare their mothers-sisters then how can u expect respect from them. Carry on your revolutionary work till every HINDU - MUSLIM realize that there is ONLY one God and not many. And God of hindus-muslims is same and ONE and his religion is also ONLY one.

Nikhil More said...

Sahi kaha

HAQ said...

ha kaba shiv ling hi
ling yani pehchan
"ALLAH" ne ADAM se kaha zamin per
meri pehchan esthapit karo yani mera
gher banao. "ALLAH" ka gher yani KABA
shiv ling yani shiv ki pehchan
ling means not a panis
ADAM ne "ALLAH" ki pehchan us ka gher bana ker karae. ise liye sanatan dharam ka matlab hi jiska aadi na ant
hamesha se hi hamesha rahega.
ise liye "ALLAH" ne MANO (NOOH) ko nabi bana ker bheja. ke murti puja nahi
ki jai. or akhre avtar mahadev yani 'MOHAMMAD' sa ne kaba ko murti se
pak kia tha. hindu or muslim me furk itna hi ke hidu ke hath jure hue hi
or muslim ke hath khule hi.
hindu murti se mangta hi
muslim "ALLAH" se
he dono bhai bhai
hidu kachcha mal he
muslim pakka mal hi
dunya me aj tak sab se zada murti pujne
walo ne hi ISLAM kabool kia hi. or age bhi kerte rahege, Ameen.

Bhavesh Goswami said...

Bhai. Be good

Kanak Lata said...

Jatiwad k bare me kya khayal hai .Vedon me iske liye kya hai.
Galat to hai hi, I know but proove it from Vedas.