सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Tuesday, March 9, 2010

कहाँ लिखा है कि विवाह के समय सीता जी केवल 6 वर्ष की थीं ? an ideal hindu marriage


‘ आदमी एक जिज्ञासु प्राणी है । सैक्स और और विवाद उसे स्वभावतः आकर्षित करते हैं। प्रस्तुत पोस्ट के माध्यम से आदरणीय चिपलूनकर जी ने इसलाम के प्रति ब्लाग जगत के इसी स्वाभाविक कौतूहल को जगा दिया है । आदमी नेगेटिव चीज़ की तरफ़ जल्दी भागता है । मजमा तो उन्होंने लगा दिया है और विषय भी इसलाम है लेकिन ये मजमा पढ़े लिखे लोगों का है ।

इतिहास में भी ऐसे लोग हुए हैं कि जब वे इसलाम के प्रकाश को फैलने से न रोक सके तो उन्होंने दिखावटी तौर पर इसलाम को अपना लिया और फिर पैग़म्बर साहब स. के विषय में नक़ली कथन रच कर हदीसों में मिला दिये अर्थात क्षेपक कर दिया जिसे हदीस के विशेषज्ञ आलिमों ने पहचान कर दिया । इन रचनाकारों को इसलामी साहित्य में मुनाफ़िक़ ‘शब्द से परिभाषित किया गया ।

कभी ऐसा भी हुआ कि किसी हादसे या बुढ़ापे की वजह से किसी आलिम का दिमाग़ प्रभावित हो गया लेकिन समाज के लोग फिर भी श्रद्धावश उनसे कथन उद्धृत करते रहे । पैग़म्बर साहब स. की पवित्र पत्नी माँ आयशा की उम्र विदाई के समय 18 वर्ष थी । यह एक इतिहास सिद्ध तथ्य है । यह एक स्वतन्त्र पोस्ट का विषय है । जल्दी ही इस विषय पर एक पोस्ट क्रिएट की जाएगी और तब आप सहित मजमे के सभी लोगों के सामने इसलाम का सत्य सविता खुद ब खुद उदय हो जाएगा ।

क्षेपक की वारदातें केवल इसलाम के मुहम्मदी काल में ही नहीं हुई बल्कि उस काल में भी हुई हैं जब उसे सनातन और वैदिक धर्म के नाम से जाना जाता था। महाराज मनु अर्थात हज़रत नूह अ. के बाद भी लोगों ने इन्द्र आदि राजाओं के प्रभाव में आकर वेद अर्थात ब्रहम निज ज्ञान के लोप का प्रयास किया था ।

जब वे लोग वेद को पूरी तरह लुप्त न कर सके तो उन्होंने एक वेद के तीन टुकड़े कर दिये और कुछ वेदज्ञों के अनुसार तो बाद में अथर्ववेद पूरा का पूरा ही मिला दिया । उनमें ऐसी बातें भी मिला दी गयीं जिन्हें हरेक धार्मिक आदमी देखते ही ग़लत कह देगा । उदाहरणार्थ -}
प्रथिष्ट यस्य वीरकर्ममिष्णदनुष्ठितं नु नर्यो अपौहत्पुनस्तदा

वृहति यत्कनाया दुहितुरा अनूभूमनर्वा
अर्थात जो प्रजापति का वीर्य पुत्रोत्पादन में समथ्र है ,वह बढ़कर निकला । प्रजापति ने मनुष्यों के हित के लिए रेत ( वीर्य ) का त्याग किया अर्थात वीर्य छौड़ा। अपनी सुंदरी कन्या ( उषा ) के ‘शरीर में ब्रह्मा वा प्रजापति ने उस ‘शुक्र ( वीर्य ) का सेक किया अर्थात वीर्य सींचा । { ऋग्वेद 10/61/5

‘यजमान की स्त्री घोड़े के लिंग को पकड़ कर आप ही अपनी योनि में डाल लेवे।‘

{ यजुर्वेद 23 /20 भाषार्थ श्री महीधर जी }

इस तरह के सभी मन्त्रार्थ बहुत हैं । केवल संकेत मात्र अभीष्ट था । सो मजबूरन अनिच्छापूर्वक लिखना पड़ा ।

संभोगरत खिलौनों को पवित्र हस्तियों के नाम से इंगित करना आप जैसे बुद्धिजीवियों को ‘शोभा नहीं देता । गन्दगी को फैलाने वाला भी उसके करने वाले जैसा ही होता है । हमारे ब्लॉग पर आपको ऐसे गन्दे चित्र न मिलेंगे । ब्लॉग लेखन का मक़सद सत्य का उद्घाटन होना चाहिये न कि अपनी कुंठाओं का प्रकटन करना ।

हज़रत साहब स. के बारे में फैल रही मिथ्या बातों का खण्डन होना चाहिये ऐसा लिखकर आपने हमारा ध्यान इस ओर आकृष्ट किया । इसके लिए आप साधुवाद के पात्र हैं। दुष्टों ने हज़रत साहब के साथ ही धृष्टता नहीं की बल्कि करोड़ों लोगों के मन मन्दिर के देवता और मेरे आकर्षण केन्द्र श्री रामचन्द्र जी के साथ भी यही कुछ किया है ।

बाल्मीकि रामायण ( अरण्य कांड , सर्ग 47 , ‘लोक 4,10,11 ) के अनुसार विवाह के समय माता सीता जी की आयु मात्र 6 वर्ष थी ।

माता सीता रावण से कहती हैं कि

‘ मैं 12 वर्ष ससुराल में रही हूं । अब मेरी आयु 18 वर्ष है और राम की 25 वर्ष है । ‘

इस तरह विवाहित जीवन के 12 वर्ष घटाने पर विवाह के समय श्री रामचन्द्र जी व सीता जी की आयु क्रमशः 13 वर्ष व 6 वर्ष बनती है ।

कोई आदरणीय व्यक्तित्व चाहे वह कुछ लोगों की नज़र में केवल मिथक ही क्यों न हो ? तो भी उसके बारे में किसी को अनुचित बात कहने की अनुमति दी जा सकती है । मैं भी एक अर्से से अपने दिल में यह ख्वाहिश लिये था कि कहीं से कोई उठे तो हम उसका साथ दें ।

इसी तरह की कुछ और भी सदाकांक्षाएं हैं । भविष्य में भी जब कभी कोई बंधु आप जैसा हौसला दिखायेगा उसकी पीठ थपथपाने और साथ देने के लिए हम इसी भांति अवश्यमेव उपस्थित होंगे । कुछ जगहों से कुछ दीगर सज्जन भी अपना हौसला तौल रहे हैं । उनसे हम कहना चा हेंगे कि

रंगीला रसूल सत्यार्थ प्रकाश की तरह दिल ज़रूर दुखाती है लेकिन वह कोई ऐसी किताब हरगिज़ नहीं है जिसके नक़ली तिलिस्म को तोड़ा न जा सके । जो कोई जो कुछ लाना चाहे लाये लेकिन ऐसे किसी भी सत्यविरोधी के लिए परम प्रधान परमेश्वर ने ज़िल्लत के सिवा कुछ मुक़द्दर ही नहीं किया । जो चाहे आज़मा कर देख ले ।
वैदिक धर्म महान और निर्दोष है

क्योंकि वास्तव में ये सब विकार मूल वैदिक धर्म का अंग नहीं थे बल्कि तत्कालीन लोगों की सामाजिक परम्पराओं का समावेश जाने अन्जाने वैदिक धर्म में हुआ है जो कि दार्शनिकों की मेहरबानी से समाज में रूढ़ होते गये और सुधारकों के ज्ञान और साहस की कमी के चलते अब तक बने ने हुए हैं।

मेरा मक़सद

वेद या ऋषि परम्परा का विरोध करना मेरा मक़सद नहीं है । और न ही आर्य जाति के मान को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य है । मैं खुद इसी महान जाति का अंग हूं क्योंकि मैं पठान आर्य ब्लड हूं । इसलिये भी इसकी उन्नति में बाधक तत्वों को दूर करना मेरा परम कर्तव्य है ।

मैं वेद में आस्था रखता हूं और पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमम की तरह महर्षि मनु को भी सच्चा ऋषि मानता हूं लेकिन वेद में भी उसी प्रकार क्षेपक मानता हूं जिस प्रकार स्वामी जी ने मनु स्मृति आदि में माना है ।

वर्ण व्यवस्था , नियोग और नरमेध आदि यज्ञों को वेदों में क्षेपक और आर्य जाति की उन्नति में बाधक मानता हूं । पूर्व कालीन ऋषियों के अविकारी वैदिक धर्म को पाना और जन जन तक पहुंचाना ही मेरे जीवन का उद्देष्य है । वैदिक धर्म के विकारों को दूर करने के बाद वैदिक धर्म और इसलाम में कोई मौलिक मतभेद बाक़ी नहीं बचता । दोनों का स्रोत एक ही अजन्मा परमेश्वर है।

इसलाम एकमात्र विकल्प वर्णव्यवस्था का लोप बहुत पहले हो ही चुका है जिसे लाख कोशिशों के बावजूद भी वापस न लाया जा सका। साम्यवाद भी नाकाम होकर विदा हो चुका है ।

पूंजीवाद के ज़ालिम पंजे में फंसकर विश्व जन जिस तरह त्राहि त्राहि कर रहे हैं उसने इसलाम की प्रासंगिकता को पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ा दिया है ।

इसलाम अकेली ऐसी जीवन-व्यवस्था है जो व्यक्ति और समाज , परिवार और राष्ट्र को जीवन की हरेक समस्या का सरल और व्यवहारिक समाधान देती है ।

इसका आधार पवित्र कुरआन है । जो पहले दिन से लेकर आज तक सुरक्षित है । बराबरी और सहयोग इसलामी समाज की ख़ासियत है । इसकी उपासना पद्धति आसान है । जो बिना किसी ख़र्च के बहुत कम समय में संपन्न हो जाती है ।

इसकी आर्थिक व्यवस्था ब्याज मुक्त है । इसलाम को उसकी सम्पूर्णता के साथ न मानने वाले विकसित देष भी इसलामी बैंकिंग को अपना रहे हैं । इसके माध्यम से मिलने वाली मुक्ति को हरेक आदमी प्रत्यक्ष जगत में खुली आंखों से देख सकता है ।

समस्त चक्रों के जागरण और सबीज निर्बीज समाधि के बाद भी आदमी जिस कल्याण से वंचित रहता है वह इसलाम के माध्यम से तुरन्त उपलब्ध होता है । यह न सिर्फ़ आदमी का बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज का कल्याण करता है ।

आओ मिलकर चलें कल्याण की ओर

जब तक भारतीय समाज के सामने वैदिक धर्म और के एकत्व का उद्घाटन हो तब तक भी हम समान मूल्यों पर सहमत होकर स्व और के कल्याण हेतू काम कर सकते हैं ।

पुनश्चः

श्री रामचन्द्र जी के गौरव की रक्षा हरेक हिन्दू अर्थात भारतीय का कर्तव्य है । चूंकि मैं भी एक हिन्दू हंू इसलिए सबसे पहले मैं साहित्य में उनके गौरव को क्षति पहुचाने वाले सभी तथ्यों की सत्यता को नकारता हंू । आइये अब आप भी नकारिये ।देखिये मैंने तो कितनी जल्दी नकार दिया । आप नकारने में इतना समय क्यों लगा रहे हैं?

41 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

श्री रामचन्द्र जी के गौरव की रक्षा हरेक हिन्दू अर्थात भारतीय का कर्तव्य है । चूंकि मैं भी एक हिन्दू हंू इसलिए सबसे पहले मैं साहित्य में उनके गौरव को क्षति पहुचाने वाले सभी तथ्यों की सत्यता को नकारता हंू । आइये अब आप भी नकारिये ।देखिये मैंने तो कितनी जल्दी नकार दिया । आप नकारने में इतना समय क्यों लगा रहे हैं?

Anonymous said...

nice

EMRAN ANSARI said...

मैं वेद में आस्था रखता हूं और पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमम की तरह महर्षि मनु को भी सच्चा ऋषि मानता हूं लेकिन वेद में भी उसी प्रकार क्षेपक मानता हूं जिस प्रकार स्वामी जी ने मनु स्मृति आदि में माना है ।



GREAT POST DR.SAHAB........
REALY AAP VED OR HINDU DHARAM KA BHI SACHCHE MANN SE AADAR KARTE H.

MOHAMMED SHADAB said...

HUM US BHARAT BHOOMI K LAL H JAHAN MAHAPURUSHO KA AADAR KIYA JATA H. HUMEY SABHI MAHA PURUSHO KA AADAR KARNA CHAHIYE AUR KISI K BAAREY M KOI NA PASANDIDA BAAT NAHI KAHNI CHAHIYE......

Anonymous said...

आदमी एक जिज्ञासु प्राणी है । सैक्स और विवाद उसे स्वभावतः आकर्षित करते हैं।

Anonymous said...

समस्त चक्रों के जागरण और सबीज निर्बीज समाधि के बाद भी आदमी जिस कल्याण से वंचित रहता है वह इसलाम के माध्यम से तुरन्त उपलब्ध होता है

GULSHAN said...

इसलाम एकमात्र विकल्प वर्णव्यवस्था का लोप बहुत पहले हो ही चुका है जिसे लाख कोशिशों के बावजूद भी वापस न लाया जा सका। साम्यवाद भी नाकाम होकर विदा हो चुका है ।

Anonymous said...

bethali ke bengan.

MANHOOS said...

na tu hindu
na tu muslim
tu hai
mulla taliban.

KAMDARSHEE said...

अर्थात जो प्रजापति का वीर्य पुत्रोत्पादन में समथ्र है ,वह बढ़कर निकला । प्रजापति ने मनुष्यों के हित के लिए रेत ( वीर्य ) का त्याग किया अर्थात वीर्य छौड़ा। अपनी सुंदरी कन्या ( उषा ) के ‘शरीर में ब्रह्मा वा प्रजापति ने उस ‘शुक्र ( वीर्य ) का सेक किया अर्थात वीर्य सींचा । { ऋग्वेद 10/61/5 ‘यजमान की स्त्री घोड़े के लिंग को पकड़ कर आप ही अपनी योनि में डाल लेवे।‘
{ यजुर्वेद 23 /20 भाषार्थ श्री महीधर जी }

PARAM ARYA said...

दुःख

Anonymous said...

यह ज्ञानए आत्मज्ञान की तुलना में मूल्यहीन मात्र है।

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

Anonymous said...

वैदिक धर्म महान और निर्दोष है

वन्दे ईश्वरम vande ishwaram said...

VANDE ISHWARAM

Anonymous said...

achhi baat bura munh .

सलीम ख़ान said...

gr8 article

aapne aankhen khol di..........

sakht zaroorat hai aapki hamen aur hamari anjuman ko bhi

सलीम ख़ान said...

पूंजीवाद के ज़ालिम पंजे में फंसकर विश्व जन जिस तरह त्राहि त्राहि कर रहे हैं उसने इसलाम की प्रासंगिकता को पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ा दिया है ।

Suresh Chiplunkar said...

आपने लिखा कि - "...इसलाम एकमात्र विकल्प वर्णव्यवस्था का लोप बहुत पहले हो ही चुका है जिसे लाख कोशिशों के बावजूद भी वापस न लाया जा सका। साम्यवाद भी नाकाम होकर विदा हो चुका है ।
पूंजीवाद के ज़ालिम पंजे में फंसकर विश्व जन जिस तरह त्राहि त्राहि कर रहे हैं उसने इसलाम की प्रासंगिकता को पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ा दिया है ।
इसलाम अकेली ऐसी जीवन-व्यवस्था है जो व्यक्ति और समाज , परिवार और राष्ट्र को जीवन की हरेक समस्या का सरल और व्यवहारिक समाधान देती है…"

बातें तो बहुत ऊंची-ऊंची हैं, लेकिन व्यवहार में क्या हो रहा है यह पहले हजारों बार साबित हो चुका है और कल भी हो गया जब नाईजीरिया में मुसलमानों ने सैकड़ों ईसाईयों को मार डाला…। इन दोनो धर्मों की मुख्य दिक्कत यही है कि इनमें दूसरे धर्म के लिये "स्पेस" नहीं है। हरदम… मैं श्रेष्ठ, मेरे हजरत-ईसा श्रेष्ठ, मेरी कुरान-बाइबल श्रेष्ठ, की रट लगाये रहते हैं। दूसरे धर्म वालों को नीची निगाह से देखते हैं, धर्म परिवर्तित करके (by hook or by crook) अपने में मिलाने की कोशिश करते हैं…। इसीलिये आज की तारीख में ईसाई और मुसलमान एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं और 9/11 के बाद तो ईसाईयों ने मुसलमानों के कई देश तबाह कर दिये…।
जब तक "मैं श्रेष्ठ हूं" की भावना कायम रहेगी, तब तक दुनिया में शान्ति की स्थापना नहीं हो सकती, और हिन्दू ही एकमात्र ऐसा धर्म है जिसने कभी किसी पर अपने विचार नहीं थोपे, आक्रमण नहीं किया, ज़मीन नहीं हथियाई…। और चलिये बाकी धर्मों की बात छोड़ भी दें, तो ऊपर आपके द्वारा "इस्लाम में समानता" का जो लेक्चर दिया गया है उसकी रोशनी में जवाब दें कि ईरान और ईराक दस साल तक पागलों की तरह क्यों लड़ते रहे? सोमालिया, लीबिया, पाकिस्तान जैसे भुखमरे इस्लामी देशों को इस्लामिक बैंकिंग पद्धति अपनाने से किसने रोक रखा है? इस्लाम-इस्लाम की रट लगाने वाले अरब देशों में इतने अनैतिक काम क्यों होते हैं? संदेश सीधा और साफ़ है "पहले अपना घर सुधारिये… फ़िर वेदों की बात कीजिये…"

सलीम ख़ान said...

बाबू सुरेश मैं आपके ज्ञान के लिए बता दूं कि हिन्दू नाम का कोई भी धर्म अस्तित्व में नहीं है; हिन्दू एक भौगोलिक शब्द है और रहन सहन का तरीका जो जिसे मैं भी अपनाता हूँ और आप भी....इसी तरह बकिया भारतीय.!!!

सबूत के तौर पर १ हफ्ता और रुक जाईये मैं आपको "सनातन वैदिक धर्म" के एक प्रकांड विद्वान और अध्यात्म जगत के एक अनोखी प्रतिभा के मुहं की कही गयी बात आप तक पहुंचाऊंगा!!!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

नाईजीरिया के नरसंहार के बारे में कुछ नहीं बोला.. इन महान हस्तियों ने...
क्योंकि वहां मुसलमानों ने आक्रमण किया था...
गाजापट्टी में एक भी ऐसी दुखद घटना होती तो सब दानापानी लेकर चढ़ बैठते.
पर उपदेश कुसल बहुतेरे.

Anonymous said...

is lekh ka jawab
http://jindgikipaathshala.blogspot.com/2010/03/blog-post.html

Anonymous said...

sorry article yahan he
beta yeh hamari anjuman he

Hamarianjuman.blogspot.com/

जी.के. अवधिया said...

आपने लिखा हैः

"बाल्मीकि रामायण ( अरण्य कांड , सर्ग 47 , ‘लोक 4,10,11 ) के अनुसार विवाह के समय माता सीता जी की आयु मात्र 6 वर्ष थी ।

माता सीता रावण से कहती हैं कि

‘ मैं 12 वर्ष ससुराल में रही हूं । अब मेरी आयु 18 वर्ष है और राम की 25 वर्ष है । ‘

इस तरह विवाहित जीवन के 12 वर्ष घटाने पर विवाह के समय श्री रामचन्द्र जी व सीता जी की आयु क्रमशः 13 वर्ष व 6 वर्ष बनती है ।"


आपने श्लोक को उद्धृत नहीं किया? क्या आपने पूरा वाल्मीकि रामायण पढ़ा है? यदि पढ़ा है तो आपको पता होना चाहिये कि दस वर्ष वनवास में व्यतीत करने के पश्चात् राम सीता और लक्ष्मण सहित अगस्त्य ऋषि के आश्रम पहुँचे थे। फिर खर और दूषण का वध किया था। उसके बाद ही सीताहरण हुआ। कहने का तात्पर्य है कि राम के वनवास के गयारहवे वर्ष में में रावण सीता को हर कर ले गया था।

अब आपके अनुसार यदि सीता हरण के समय राम और सीता की उम्र क्रमशः 25 और 18 वर्ष थी तो 11 साल पहले अर्थात वनवास होते समय उनकी उम्र क्रमशः 14 और 7 वर्ष थी। कृपया यह बताएँ कि 7 वर्ष की अवस्था वाली सीता ससुराल में 12 वर्ष कैसे रहीं?

DR. ANWER JAMAL said...

@awadhiya ji
ramayan men contradiction kyun hai ?
ye to aap bataiyye.
main to chhepak manta hun.

DR. ANWER JAMAL said...

सभी पाठक बन्धुओं का बहुत बहुत आभार ।
अपनी राय से हमें ज़रूर नवाज़िये ?

Anonymous said...

सब कुछ ठीक है लेकिन घुमा फिर कर एक ही बात की इस्लाम ही हर समस्या का इलाज़ है हिन्दुओ को समझ नहीं आती कृपया कहें की सभी अपने अपने धर्म की सुने तो सभी समस्या का हल हो सकता है विवाद ख़त्म हो जायेंगे जो आप मानेंगे नहीं

मनुज said...

@मियां सलीम,
यार, आप से किसी प्रश्न का जवाब तो दिया नहीं जाता..और बाते करते हो "एक हफ्ता रुक जाओ, मैं ऐसा कुछ लेकर आऊंगा कि ज़मीन फाड़ दूंगा, आसमान चीर दूंगा"
मेरे भ्राता पहले आपके ब्लॉग में ही हज़ारों प्रश्न अनुतर्रित पड़े हैं पहले उनका ही निराकरण कर लो, फिर ही किसी भले माणूस के ब्लॉग में टिपियाना...
अभी जो आदरणीय सुरेश चिपलूनकर जी के ब्लॉग में आओ और बताओ कि क्यूँ मुस्लिम सबसे पिछड़े हुए हैं (even in USA)...

मनुज said...

saleem miyan aapke ek hafte baad vale toofan ka intzaar rahega...

त्यागी said...

यदि इतना ही हौसला अगया और वेदों की सच्चाई जानने का इतना ही शौक है तो मित्र क्यूँ पार्ट टाइम पढ़ रहे हो फुल टाइम पढो.
असल में आपके और सलीम खान जैसे की साधारण बात समझ में आ ही नहीं सकती और फिर वेद और पुराण तो बहुत ही दूर की बात है.
जिस गुंडई से यह सलीम कह रहा है की हिन्दू कोई धर्म ही नहीं जरा वो पूरी बात सही सन्दर्भ में समझे और तब कोई उट पटांग करे.
जिस बात को बिना सन्दर्भ के एक एक लाइन वेदों से निकाल कर चटकारे लगा कर चुहलबाजी कर रहे हो वो हिन्दुओ के देश हिंदुस्तान में हिन्दुओ के सीने पर चढ़ कर ही संभव है.
आज जिस गर्व से आप लोग हिन्दुओ के ऊपर हिंदुस्तान में थूक रहे हो और हिन्दू अपने को जवाब भी देने में असमर्थ है उसको इसका खामियाजा तो भुगत न ही पड़ेगा.
और एक बात सुरेश चप्लेकर अकेला मत समझना. इसका जवाब बहुत उम्दा तरीके से दिया जा सकता है देखना यह है की तुम अपनी पतंग उड़ा कहाँ तक सकते हो.
मित्र कुत्ते भी नमक का हद अदा करते है पर कुछ लोगो से तो इसकी भी उमीद नहीं.
सप्रेम
http://parshuram27.blogspot.com/

Anonymous said...

I dont understand why the people dont understand that the truth is only only and everybody should search it and follow it.

उम्दा सोच said...

जमाल बाबू आप की पूरी ज़मात आज तक मेरे पूछे गये सवालो क जवाब न दे सकी है ,सब आज की तारीख तक मूह छुपाये घूमते है! इतने ग्यानी हो तो पहले उनका जवाब ले कर आओ फ़िर,ऐसी बेसरपैर की बाते करो !

चलो यहाँ पूछे गये सवाल का ही जवाब दो-

मुसल्नमान सबन्दी नही करवाते हो कहते हो "तगईउल खल्द उल्लाह" तो हार्निया का आप्रेशन क्यु करवाते हो और जो मुसल्मानो की औलादे सिज़ेरियन होती है उनका तो जनम ही हराम हुआ न??? हो सकता है यहा आप की ज़मात के काफ़ी ब्लागर भी सिज़ेरियन हो !!!

इसका जवाब जल्दी से दो ताकी अगला सवाल करु!!!

DR. ANWER JAMAL said...

@ Umda soch ! ye "तगईउल खल्द उल्लाह" arabic ya urdu men to aaj tak kuchh hota nahin , phir koi kya jawab deta ? pehle thik tarah aitraz to karna sikhiye janab aur phir mangiye jawab . dekhiye milta hai ki nahi ?

DR. ANWER JAMAL said...

@Priya Praveen ji , apko maine email karni chahi taki aap ek nazar pan ke desh me part 4 ki last lines par dal len, kyun ki ek agnostic ke bare men maine as awriter to kuchh likh diya lekin mujhe laga ki apki feeling hurt na ho jayen isliye aam karne se pehle apka dekhna zururi hai . Blogging jaye bhad men , Koi pyar karne wala to na rooth jaye . http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/04/question.html
Jaisa hukm denge waise hi cut kar dunga , lekin sirf agnostic se mutalliq.

उम्दा सोच said...

@ जमाल साहब भगवान जा्ने आप कौन सा कुरान पढ कर आये हो और कौन सी अरबी फ़ारसी बोलते हो ( एक कुराअन बुल्लेशाह पीर फ़कीरो वाला दूसरा ओसामा बिनलदेन वाला ) ??? अरे साहब हिन्दी मे पूछ रहा हूँ आता है तो सीधा सीधा जवाब दो या अगली बार अन्ग्रेज़ी मे पूछू???

नसबन्दी नही करवाते हो कहते हो कुरान मे आपरेशन हराम है ! तो हारनिया का आपरेशन क्यु करवाते हो और सिजेरियन डिलीवरी भी तो हराम है कुराअन के हिसाब से तो जो सिजेरियन औलादे मुसलमानो की पैदा होती है वे भी तो हराम के हुए न ??? है की नही??? अब भी बहाना करोगे की समझ मे नही आया ???

उम्दा सोच said...

अनवर जवाब अबतक ढूढे से नही मिला ??? 12 अपरैल से 16 अपरैल हो गया !!!इसका जवाब जल्दी से दो ताकी अगला सवाल करु!!!

उम्दा सोच said...
This comment has been removed by the author.
उम्दा सोच said...

अनवर जमाल् जवाब अबतक ढूढे से नही मिला ??? 12 अपरैल से 21 अपरैल हो गया???

जवाब क्या दोगे??? अब देख लिया तुम्हारे ज़मात का अकल, जाओ अप्ने आका का पुराना काम करो "भेडे चराओ"!!! तुम उप्द्र्वी लोग आर डी एक्स और आतन्क्वाद के अलावा किसी लायक नही हो!!!

(नोट- ये कमेन्ट ओसामा वाले मुसल्मानो के लिये है जो कि अनवर जमाल् की ज़मात है न कि बुल्ले शाह,सूफ़ियो,बहन फ़िरदौस,मफ़ूज़ भाई और ज़ाकिर भाई जैसे के लिये !!!)

http://firdaus-firdaus.blogspot.com/2010/04/blog-post_20.html

DR. ANWER JAMAL said...

@ Umda soch ! I repeat again .
ye "तगईउल खल्द उल्लाह" arabic ya urdu men to aaj tak kuchh hota nahin , phir koi kya jawab deta ? pehle thik tarah aitraz to karna sikhiye janab aur phir mangiye jawab . dekhiye milta hai ki nahi ?

उम्दा सोच said...

नसबन्दी नही करवाते हो कहते हो कुरान मे आपरेशन हराम है ! तो हारनिया का आपरेशन क्यु करवाते हो और सिजेरियन डिलीवरी भी तो हराम है कुराअन के हिसाब से तो जो सिजेरियन औलादे मुसलमानो की पैदा होती है वे भी तो हराम के हुए न ??? है की नही??? अब भी बहाना करोगे की समझ मे नही आया ???

DR. ANWER JAMAL said...

@ अरे भाई उम्दा सोच ! आपके सवाल का इस पोस्ट से क्या संबंध है ? जब मैं नसबंदी पर लिखूंगा तब पूछना और तब तक आप यह भी पता कर लीजिये कि क्या होता है "तगईउल खल्द उल्लाह" ?

KHURSHID IMAM said...

As usual anwer bhai at his best. This is excellent way to clear misconcpetion about hinduism and islam. let our sanatandharmi bretrhen understand difference between sanatna dharma and hinduism. regarding abuse by our hindu brothers - then thye are themselves projecting bad image of hinduism by their uncivilized comments. carry on anwer bhai.