सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Monday, March 29, 2010

ताकि आपके बच्चों के सामने ‘मार्ग‘ क्लियर रहे और वे ‘Live in relationship‘ की गंदी दलदल में न जा धंसें और आपको ऐसे बच्चों का नाना दादा न बनना...


इसमें कोई सन्देह नहीं है कि प्रकृति की क्रियाएं बेहतरीन तरीके़ से सम्पन्न हो रही हैं और इसमें भी कोई सन्देह नहीं है कि प्रकृति में बुद्धि और योजना बनाने का गुण नहीं पाया जाता । जब प्रकृति में बुद्धि पायी नहीं जाती और प्रकृति के सारे काम हो रहे हैं बुद्धिमत्तापूर्ण तरीक़े से , तो पता यह चलता है है कि अगर बुद्धि प्रकृति के अन्दर नहीं पायी जाती तो फिर प्रकृति के बाहर तो ज़रूर ही मौजूद है । यही बुद्धिमान अस्तित्व पालनहार ईश्वर के नाम से जाना जाता है ।

जिन हक़ीक़तों को इनसान अपनी आंख से नहीं देख सकता उनका भी पता वह अपनी अक्ल के ज़रिये लगा लेता है । लेकिन यह अक्ल सही फ़ैसला केवल तब कर पाती है जबकि वह निष्पक्ष होकर विचार करे । अगर आदमी पक्षपात के साथ विचार करेगा तो फिर उसे सत्य तथ्य नज़र न आएंगे बल्कि फिर तो उसे वही कुछ दिखाई देगा जो धारणा उसने पहले से ही बना रखी होगी ।

ऐसे लोग चाहे आंख के अंधे न भी हों और चाहे उनका नाम भी नैनसुख न हो तब भी ये लोग नैनसुख से ज़्यादा अंधे होते हैं क्योंकि ये आंख के तो पूरे होते हैं लेकिन अक्ल के अंधे होते हैं । यह दुनिया आंख वाले अंधों से भरी हुई है ।

इनमें से कुछ तो आजकल हाईटेक भी हो गये हैं ।


लिटमस पेपर टेस्ट


इस जगत का कोई सृष्टा ज़रूर है । उसी सृष्टा को अलग अलग भाषाओं में ईश्वर , अल्लाह , खुदा , यहोवा , इक ओंकार और गॉड आदि हज़ारों नामों से जाना जाता है । यह बात आज वे सभी लोग मानते हैं जो ईश्वर और धर्म में यक़ीन रखते हैं चाहे उनका मत , वतन और भाषा कुछ भी क्यों न हो ?

इसी बात को हमने कल की पोस्ट में बयान किया था ।

अक्ल के अंधों को पहचानने के लिए यह सत्य विचार ‘लिटमस पेपर टेस्ट‘ का काम करता है। आप भी एक नज़र डालिए -
सत्यस्वरूप परमेश्वर शिव के सुन्दर नाम से आरम्भ करता हूं जो सारी कायनात का अकेला मालिक है । कोई ब्रहमा और कोई विष्णु न उसकी सत्ता में साझीदार हैं और न ही सहायक , बल्कि ये दोनों पवित्र नाम भी उसी परम शिव के हैं ।
हरेक भाषा में सृष्टा , पालनहार और संहत्र्ता के लिए प्रयुक्त हज़ारों हज़ार नाम भी उसी एक सदाशिव के हैं । अरबी भाषा में अल्लाह , रहमान ,रहीम और रब आदि नाम भी उसी महाशिव के हैं । उसके सिवा न कोई स्वामी है और न ही कोई पूज्य ।
अकल्पनीय सृष्टि के स्वामी का रूप भी अकल्पनीय है ।किसी चित्रकार में इतनी ताक़त नहीं है कि वह उसका चित्र बना सके ।किसी मूर्तिकार के बस में नहीं कि वह उस निराकार का आकार बना सके । जिसने भी जब कभी जो कुछ बनाया अपनी कल्पना से बनाया , अपनी तसल्ली के लिए बनाया ।सत्यस्वरूप शिव हरेक कल्पना से परे है ।उसके हज़ारों हज़ार नामों के बावजूद वास्तव में उसका कोई नाम नहीं है । कोई भी लफ़्ज़ इतना व्यापक नहीं है कि उस अनन्त सत्य का पूरा परिचय प्रकट कर सके ।

वह पवित्र है ।

सारी स्तुति वन्दना का वास्तविक अधिकारी वही अकेला अनादि शिव है । सारी सृष्टि उसी के सुन्दर गुणों को दिखाने वाला दर्पण मात्र है । हर ओर वही व्याप रहा है , बस वही भास रहा है लेकिन इसके बावजूद न कोई उसका अंश है और न ही वंश । उसने सृष्टि की उत्पत्ति अपने अंश से नहीं बल्कि अपने संकल्प से की ।
महिमावान है मेरा प्रभु महाशिवजो असत् ( अदम ) से सत ( वुजूद ) की सृष्टि करने में समर्थ है । उसी ने आदिमानव अर्थात आदम को शिवरूप बनाया । उनके वामपक्ष से पार्वती अर्थात हव्वा को पैदा किया । इन्हीं को ब्रह्मा और सरस्वती भी कहा गया ।

समय गुज़रता गया बात पुरानी पड़ने लगी और यादें धुंधलाने लगीं ।

लोगों ने फिर भी उन्हें याद रखा । कवियों ने उनकी कथाओं को अलंकारों से सजाया । दार्शनिकों ने भी जटिल प्रश्नों का समाधान तलाशना चाहा और खुद जटिलताओं के शिकार हो गये ।वाम मार्गी भी आये आये और कामाचारी पापाचारी भी पैदा हुए ।उन्होंने स्वयं को ईश्वरीय गुणों का दर्पण बनाने के बजाय धर्म को ही अपनी दूषित वासनाओं की पूर्ति का साधन बना लिया । धर्म भीरू जनता गुरूभक्ति में उन इच्छाधारियों का विरोध श्रद्धावश न कर सकी । नशा , व्यभिचार और बुज़दिली वग़ैरह जो बुराइयां खुद इन पाखण्डियों में थी , वे सब इन्होंने अनादि शिव और आदि शिव में कल्पित कर लीं और लोगों को ऐसी विस्मृति के कुएं में धकेल दिया , जहां वे अनादि शिव और आदि शिव का अन्तर ही भूल गए और जब जानने वाले ने उन्हें मानवता का बिसरा दिया गया इतिहास याद दिलाना चाहा तो स्मृति लोप के कारण उन्हें उसकी बातें अजीब सी तो लगीं मगर अच्छी भी लगीं ।

हरेक कमी , ऐब और दोष से पवित्र है वह सृष्टिकर्ता शिव ।

उसकी शान तो इससे भी ज़्यादा बुलन्द है कि कोई सद्गुण ही उसे पूरा व्यक्त कर सके ।

हरेक लफ़्ज़् उसके सामने छोटा और हरेक उपमा उसके लिए अधूरी है ।

सुब्हान अल्लाह - पवित्र है प्रभु परमेश्वर ।

अल्हम्दुलिल्लाह - सच्ची स्तुति वन्दना केवल परमेश्वर के लिए है ।

अल्लाहु अकबर - परमेश्वर ही महानतम है ।

अपने दामन में रिवायात लिए बैठा हूं
कौन जाने कि मैं तारीख़ का आईना हूं


अर्थःरिवायात - परम्पराएं , तारीख़ - इतिहास

रियल शिव नाम महिमा के लिए इस ब्लॉग पर आते रहिये .

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हे परमेश्वर शिव ! अपने भक्त भोले शिव के नादान बच्चों को क्षमा कर दे क्योंकि वे नहीं जानते कि वे आपके प्रति क्या अपराध कर रहे हैं ?
Posted by DR. ANWER JAMAL at
8:03 PM
क्या इस पोस्ट में आपको कुछ भी ग़लत मालूम होता है । नहीं न । लेकिन इसके बावजूद एक आर्य समाजी नैनसुख ‘राज‘ आये और यह टिप्पणी पेल गये -


एक बात तो साफ हो गयी कि, जब किसी चीज का कोई वजूद(काल्पनिक पुरुस) नही हो तो , उसका वजूद जबर्दस्ती बनाने के लिये आदमी बहुत नीची हरकत करने लग जाता है. आज मुस्लिम समाज एक वीरान चौराह पे खडा है, या जैसे बिन पानी की मछली तडपती रहती है, जाऊ तो जाऊ कहां, किसको आपना भगवान बनाऊहे विराट रूपी भगवानएव राक्षसो या 'आततायो" के बध करने वाले,पूरे ब्रह्माण्ड का पालन कर्ता,जिनके भक्त अर्थार्त परमेश्वर भगवान शिव है, इन आततायी बेचारे लोगो का सही मार्गदर्शन कर दो.आज मुस्लिम समाज अपना वजूद ढूढने मे , सारे धर्मो को अपने से जोडने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई भी इनसे नही जुडना चाह्ता, कोई इनको अपने देश मे आने से प्रतिबंध लगा रहा, तो कोई वीजा ही नही दे रहा, तो कोई बुरका पर प्रतिबंध लगा रहा, आज ये कहते फिर रहे कि "माई नेम इज खान - आइ एम नोट आतंकवादी या यू कहे कि सारे मुसल्मान आतंकवादी नही पर सारे आतकवादी, मुसलमान है" ये कभी भोले शिव को अपना भग्वान मानते तो कभी यीशू को तो कभी किसी और को.. इनके भग्वान का कोई वजूद नही, आज ये जाये तो जाये कहा, एक अकेला इजराइल ने इनकी नाक मे दम कर रखा, आज सारे महाद्वीप मे लोग, इनके कर्मो के कारण से इनको नाले के कुत्ते की तरह पहचाती है, इन लोगो ने आपकी बनाये इस सन्सार को दिया ही क्या हैये लोग सबके लिये कूडे के बोझ के समान है, जो निगले नही निगलते, थूके नही थुकते, चाहे अमेरिकन महाद्वीप " अमेरिका" हो, या युरोपिय महाद्वीप " इटली, फ्रान्स,स्पेन....", या अफ़्रिकन महाद्वीप "सोमालिया,नाईजीरिया,सुडान..." हो, या एशिया " चीन- उरिगुरी, पाकिस्तान, भारत वर्ष.." हो, हर जगह इन्होने लोगो, छोट बच्चो, महिलाये सव बेकसूर लोगो को बम से या कोडे से या जलाकर मारा , इनका कोई धर्म नही, और एक काल्पनिक- जिसका कोई वजूद न हो या मुर्दा पुरुस का इनको डर लगा रहता है, आज यही डर या "सच्चा मुसल्मान" सबके लिये गले की हड्डी बन गया, विराट रूपी भगवान इनको सही रास्ता दिखाओ. आज शान्ति, करुणा, क्षमा, ज्ञान, धैर्य अगर कही है, तो विराट रूपी भगवान की शरण या पवित्र धर्म गर्न्थ गीता मे है, आओ हम सब मिलकर विराट रूपी भगवान मे विलीन हो जाये, इस धरती को पाप रहित या "आतम्घाती बम" रहित बनाये, न कोई बिन लादेन होगा, न कोई कसाव होगा, न बटला कांड होगा हर तरफ हरि ही हरि होगे, आरक्षण की भी जरूरत नही पडेगी

अनवर को चाहने वाला "राज"

यही है राज की खाज
लेकिन सभी तो नैनसुख नहीं होते । कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके चेहरों के साथ उनकी अक़्लें भी नूरानी होती हैं । शाहनवाज़ भाई ऐसे ही एक आदमी हैं । उन्होंने ‘राज‘ नामक उस नैनसुख को जो जवाब दिया आप भी उसके सही या ग़लत होने का फ़ैसला कीजिये -
हां , अब भी कोई यह कह सकता है कि शाहनवाज़ तो आपके साथी हैं वे तो आपको सपोर्ट करेंगे ही , लेकिन Mr. Rakesh Ravi तो हमारे साथी नहीं हैं । हमारे लेख की तारीफ़ तो उन्होंने भी की है । देखिये -

Dear Anwar Jamal Ji ,

i was moved by your blog and hence writing this comment in appreciation. It eliminates the differences which are not meaningful and tells the same truth which is the essence of every religion. thank you.

rakesh ravi
इनके अलावा भी बहुत से भाइयों ने लेख की सराहना की है । मैं इन सभी भाइयों का बहुत बहुत आभारी हूं लेकिन उनका काम सराहना पर समाप्त नहीं हो जाता , बल्कि इस तरह तो वे स्वयं को उस दिव्य ज्ञान का पात्र कह रहे होते हैं जो उस मालिक ने ऋषियों के अन्तःकरण पर मानवजाति के कल्याण हेतु उतारा था ।


बस गुमराही में अब और समय न गुज़ारिये ।

थाम लीजिये उस सच्चे मालिक का नाम-ज्ञान ताकि आपके क़दम ग़लत रास्तों पर न जाने पायें , ताकि आपके बच्चों के सामने ‘मार्ग‘ क्लियर रहे और भविष्य में वे ‘लिव इन रिलेशनशिप‘ की गंदी दलदल में न जा धंसें और आपको ऐसे बच्चों का नाना दादा न बनना पड़े जिनका कि आप नाम भी ....

समाज के उन नैनसुखों के लिए भी हम मंगल कामना करते हैं जिन्हें सत्य तो चाहे दिखाई न देता हो लेकिन हमें नापसन्द का वोट देने के लिए उन्हें बिन्दु ज़रूर दिखाई देता है । उनके लिए , अपने लिए और सबके लिए परब्रह्म परमेश्वर से हम फिर यही दुआ करते हैं कि हे परब्रह्म परमेश्वर ! अपने नादान बन्दों को क्षमा कर दीजिये क्योंकि वे नहीं जानते कि वे आपके प्रति क्या अपराध कर रहे हैं ?

23 comments:

Chamupati said...

आज मुस्लिम समाज एक वीरान चौराह पे खडा है, या जैसे बिन पानी की मछली तडपती रहती है, जाऊ तो जाऊ कहां,

हरेक कमी , ऐब और दोष से पवित्र है वह सृष्टिकर्ता शिव said...

सुब्हान अल्लाह - पवित्र है प्रभु परमेश्वर ।


अल्हम्दुलिल्लाह - सच्ची स्तुति वन्दना केवल परमेश्वर के लिए है ।


अल्लाहु अकबर - परमेश्वर ही महानतम है

DR. ANWER JAMAL said...

@Chamupati , Kya aapne bhi nainsukh banne ki than rakhi hai .

bharat bhaarti said...

This is too good.

Aslam Qasmi said...

Very Nice
Aslam Qasmi

sahespuriya said...

ZINDABAAD

Dr. Ayaz ahmad said...

वाह अनवर भाई ऑख के अनधो क़ो आएना दिखा दिया

Dr. Ayaz ahmad said...

अरे नैनसुखो कहाँ हो

Tarkeshwar Giri said...

सारे मुसल्मान आतंकवादी नही, पर सारे आतकवादी मुसलमान है

क्या अनवर बाबु, हिंदी भी सही लिखनी नहीं आती।
आप की कोई गलती नहीं है।
ये तो सारी गलती अरबी संस्कृत की है.

Mohammed Umar Kairanvi said...

गुरू जी तारकेश्‍वर जी ठीक कहते हैं आपकी कोई गलती नहीं,गलती अरबी संस्‍कृति की भी नहीं, अरबी संस्कृत की है जो होती ही नहीं, इनकी बात का आप बुरा न माना करें इन्‍होंने भारतीय संस्‍कृत को बहुत पढा है भारतीय संस्‍कृति इन्‍हें आप सीखा रहे हैं थोडा समय लगेगा लेकिन संस्‍कृत और संस्‍कृति में फर्क समझ में आजायेगा ऐसे हमें विश्‍वास है

विश्‍व गौरव said...

कोई ब्रहमा और कोई विष्णु न उसकी सत्ता में साझीदार हैं और न ही सहायक , बल्कि ये दोनों पवित्र नाम भी उसी परम शिव के हैं ।

बरसाती लाल said...

barsat ke mosam men sajan ko bana loongi anghoothi ka nageena

nikhil said...

वैसे ता आप ज्ञानी हम मूर्ख लेकिन एक बार कहना था कह रहा हूं के डाक्‍टर बाबू कुछ सरल भाषा में देदिया करो

sahespuriya said...

Dr. SAHAB US QISSE KI DUSRI QIST KAHAN HAI, JISME KUCH GIREE MANSIKTA KE LOG AUR KOI HAJJAM BHI THA SHAYAD..
PHIR KYA HUA?

sahespuriya said...

2ND EPISODE KA INTEZAR HAI.

DR. ANWER JAMAL said...

@ sahespuriya - भाई आपकी खाहिश पूरी करने के लिये में इसी समय लग गया हूं इन्‍शा अल्‍लाह कल सुबह पोस्‍ट करूंगा

MLA said...

कमाल का लिखा है डॉ अनवर साहब.....

MLA said...

"शाहनवाज़ भाई ऐसे ही एक आदमी हैं । उन्होंने ‘राज‘ नामक उस नैनसुख को जो जवाब दिया आप भी उसके सही या ग़लत होने का फ़ैसला कीजिये -
हां , अब भी कोई यह कह सकता है कि शाहनवाज़ तो आपके साथी हैं वे तो आपको सपोर्ट करेंगे ही , लेकिन Mr. Rakesh Ravi तो हमारे साथी नहीं हैं । हमारे लेख की तारीफ़ तो उन्होंने भी की है।"

सलीम ख़ान said...

yaqeenan

DR. ANWER JAMAL said...

@ Giri ji ,सारे मुसल्मान आतंकवादी नही, पर सारे आतकवादी मुसलमान है . ye vakya mera hai kab? Apko to bus aitraz karna hai KHAMKHWAH . Na to aap Holy Quran dhang se padh rahe ho aur na hi meri post .
Jo vakya aap mujhe dikha rahe hain ye bhi aap jaise Semi scholar raj ka hai.

SHAZY said...

beautiful post nice work for humanity and peace keep it up.

Anonymous said...

हे विराट रूपी भगवानएव राक्षसो या 'आततायो" के बध करने वाले,पूरे ब्रह्माण्ड का पालन कर्ता,जिनके भक्त अर्थार्त परमेश्वर भगवान शिव है, इन आततायी बेचारे लोगो का सही मार्गदर्शन कर दो.आज मुस्लिम समाज अपना वजूद ढूढने मे , सारे धर्मो को अपने से जोडने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई भी इनसे नही जुडना चाह्ता, कोई इनको अपने देश मे आने से प्रतिबंध लगा रहा, तो कोई वीजा ही नही दे रहा, तो कोई बुरका पर प्रतिबंध लगा रहा,

Nice post

Thank to show mirror to Dr Anvar

Munaf Patel

Anonymous said...

ब्रह्माण्ड mein hajaron KAYANAAT samaa sakti hain

Nain Sukh