सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Wednesday, March 10, 2010

वेदों में कहाँ आया है कि इन्द्र ने कृष्ण की गर्भवती स्त्रियों की हत्या की ? cruel murders in vedic era and after that

इसलाम का अर्थ है ‘ ‘शान्ति ‘ ,ईश्वर का आज्ञापालन , ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण । जो आदमी इस मौलिक गुण से युक्त हो वह मुसलिम कहलाता है ।
पवित्र हदीस के मुताबिक़ मुसलिम वह होता है जिसके ‘शर से अन्य लोग सुरक्षित हों ।
वर्ण व्यवस्था के अत्याचार से त्रस्त बहूत से लोगों ने राहत पाने के लिए हिन्दू संस्कृति का त्याग किया और जिसको जहां ख़ैरियत नज़र आयी वहीं चला गया । गोरखपुर के राजा ने भी जैन मत अपना लिया था क्योंकि वेदवादी पण्डों ने उससे यज्ञ कराया और यज्ञ के नाम पर उसकी रानी का सहवास घोड़े से करवा दिया । बेचारी कोमल रानी इतना बड़ा पुण्य झेल न सकी और मर गयी । राजा ने वैदिक धर्म को त्याग दिया । इस घटना को दयानन्द जी ने सत्यार्थ प्रकाश में बयान किया है ।
बहरहाल बहुत से कारणों से लोगों ने अन्य मत ग्रहण किये । इन्हीं लोगों में इसलाम ग्रहण करने वाले भी थे । यह भारत में भी हुआ और भारत से बाहर भी हुआ ।
इस तब्दीली के बावजूद प्रायः लोग न तो जात्याभिमान जैसे अपने पूर्व के कुसंस्कारों को त्याग सके और न ही वे ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण के उस स्तर को पा सके जो कि इसलाम एक आदमी के लिए मुक़र्रर करता है ।
पूर्ण ‘शान्ति के लिए ‘शान्तिस्वरूप परमेश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण दरकार है और अधिसंख्य मुसलमानों में इसका अभाव स्पष्ट है । पूर्ण समर्पण का यही अभाव मुसलिम दुनिया में सारे फ़साद की जड़ है । अन्यायपूर्वक किसी को सताना या उसकी जान ले लेना एक मुसलमान के लिए हराम है ।
ऐसे जुर्म के अपराधी को उस मालिक ने पवित्र कुरआन में लोक परलोक में भयानक दण्ड की चेतावनी दी है । ज़ुल्म इसलाम की प्रकृति के खि़लाफ़ है । यह हर काल में निन्दनीय रहा है और आज भी है ।
आपने मुसलमानों द्वारा नाइजीरिया में घटित कुकृत्य की निन्दा करने के लिए मुझे पुकारा है । मैं हाज़िर हूं और आपके साथ हूं ।
यदि यह घटना अपने प्रचार के अनुरूप ही घटी है और इसके ज़िम्मेदार वास्तव में मुसलिम हैं तो मैं इसकी निन्दा करता हूं । साथ ही कुछ अर्सा पहले पाकिस्तान में घटित इसी तरह की घटना की भी मैं निन्दा करता हूं ।
इसी के साथ मैं भारत में आये दिन होने वाली उन घटनाओं की भी निन्दा करता हूं जिनमें कभी तो वर्णवादी हिन्दू ग्राहम स्टेंस को उसके बच्चों के साथ ज़िन्दा जला देते हैं और कहीं ये लोग ईसाई नन्स को अपनी हवस का निशाना बनाते रहते हैं।
ज़ुल्म करने वाले हरेक आदमी की चाहे वह वर्णवादी हो या मुसलमान , मैं निन्दा करता हूं । न केवल वर्तमान काल के ज़ालिमों की निन्दा करता हूं बल्कि पूर्व में गुज़र चुके अत्याचारियों की भी निन्दा करता हूं । चाहे वह कितना ही बड़ा बादशाह या सम्राट ही क्यों न रहा हो ?
हक़ीक़त राय को सज़ा ए मौत देने वाले क़ाज़ी की मैं निन्दा करता हूं और श्री रामचन्द्र जी द्वारा ‘शूद्र ‘शम्बूक की हत्या के प्रकरण की सत्यता को ही नकारता हूं परन्तु जो उसे सत्य घटना मानते हैं उनसे इस जघन्य और निर्मम हत्याकांड की निन्दा का अनूरोध करता हूं ।
अमेरिका के दो टॉवर्स पर हमला करके निर्दोष नागरिकों की जान लेने वालोंकी मैं निन्दा करता हूं और राजा रावण की दुश्मनी के बदले में श्री हनुमान जी द्वारा लंकावासी करोड़ों मासूम ‘शहरियों को जीवित जला देने की घटना को सच मानने से ही इनकार करता हूं परन्तु जो लोग लंका दहन को सच मानते हैं उनसे मैं इस घटना की निन्दा का अनुरोध करता हूं । किस तरह औरतें अपनी छाती से अपने मासूम बच्चे चिपका कर उस आग में जलीं ? रामायण में स्पष्ट लिखा है ।
परशुराम द्वारा अकारण अपनी मां रेणुका को और तत्पश्चात करोड़ों क्षत्रियों को मार डालने की बात को मैं विश्वसनीय नहीं मानता लेकिन जो लोग इन बातों को सच मानते हैं उनपर इनकी निन्दा वाजिब है ।
अकारण हुए महाभारत के युद्ध में मरने वाले एक अरब छियासठ करोड़ मृतकों के प्रति कौन ‘शोक व्यक्त करेगा ?
उनकी विधवाओं और उनके अनाथ बच्चों की दुदर्शा का ज़िम्मेदार किसे माना जाएगा ?
लेकिन हिंसा का इतिहास तो और भी ज़्यादा पुराना है । पवित्र कुरआन में युद्ध के नियमों में हिंसा तलाशने वाले संकीर्णवृत्ति लोगों के ज्ञानवर्धन के लिए वेद से कुछ अंश उद्धृत हैं -

कृष्णगर्भा निरहन्नृजिश्वना
अर्थात इंद्र ने ऋजिश्वा राजा के साथ मिलकर कृष्ण नाम के असुर की गर्भवती स्त्रियों को मारा था। { ऋगवेद
1/101/1 }

यो वर्चिनः शतमिंद्रः सहस्रमपावपद्
अर्थात इंद्र ने वर्ची के सौ हज़ार पुत्रों को भूमि पर सुला दिया अर्थात मार दिया । { ऋगवेद
2/14/6 }
मुसलिम ‘शासकों द्वारा किये गये अपेक्षाकृत न्यून रक्तपात को लेकर आये दिन इसलाम और मुसलमानों के प्रति अपनी दुर्भावना प्रकट करने वाले अपने खू़नी इतिहास पर ‘शर्मिन्दा होना आख़िर कब सीखेंगे ?

आदरणीय चिपलूनकर जी ,यहां आकर पुकार लगाने से पहले क़त्ल आतंकवाद और लुचाप्पन के आरोपों में गिरफ़तार ‘शंकराचार्य पुरोहित साध्वी बापू और बाबाओं की निन्दा में आज तक आपने कुल कितनी पोस्ट क्रिएट कीं ?
आपने हमें जिस आशा के साथ पुकारा था हमने उसे पूरा करने की हद भर कोशिश की है ।
हम भी आपसे उपरोक्त वर्णित घटनाओं की निन्दा की आशा करते हैं। आपके द्वारा उठाये गये अनपेक्षित प्रसंग के पटाक्षेप के बाद मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि आपने श्री रामचन्द्र जी और सीता माता के गौरव को क्षति पहुंचाने वाले उस मुख्य मुद्दे का कोई निराकरण करना क्यों उचित नहीं समझा जोकि प्रस्तुत पोस्ट का मुख्य विषय है ?
क्या इसे आपके द्वारा विषयान्तर करके ध्यान बंटाने की तकनीक का इस्तेमाल माना जाये जो कि आदमी निरूत्तर और लाचार होने की दशा में करता है ?या फिर यह माना जाए कि आपको न तो उन दोनों के मान सम्मान की कोई परवाह है और न ही इसके निराकरण के किसी उपाय का ही ज्ञान है ?आखि़र आपका यह तथाकथित राष्ट्रवाद है किस काम का ?
कम से कम आप मेरी तरह रामायण के ऐसे असुविधाजनक प्रसंगों की सत्यता को तो नकार ही सकते थे । लेकिन आपने यह भी नहीं किया ।
चलिए मान लेते हैं कि आपको तथाकथित राष्ट्रवाद के प्रचार के चक्कर में पड़कर अपने धर्म के मर्म को समझने अवसर नहीं मिला लेकिन दूसरों ने अपने होंठ क्यों सी लिए ?आख़िर मुसलमान से इतनी नफ़रत क्यों ? कि अगर वह भारत की अस्मिता के प्रतीक श्री रामचन्द्र जी के गौरव की लड़ाई लड़े तब भी उसका साथ देनेकोई न आए ?आख़िर वो लोग कहां सो गये जो चिपलूनकर जी की पोस्ट पर उन्हें उनकी निष्पक्षता की बधाई देने के लिए तांता लगाए खड़े थे ?उनमें से कोई हमें बधाई देने आखि़र क्यों नहीं आया ?
अब भी आप इस पोस्ट को पढ़कर ‘शायद चुपचाप सरक जाएं लेकिन मालिक आपको देख रहा है । एक दिन आप उसके सामने होंगे और अपने कर्मों का हिसाब उसे दे रहे होंगे । तब सत्य को नज़रअन्दाज़ करने की आप क्या जायज़ वजह उसे बताएंगे यह आप आज सोच लीजिए ।अपने लिए और आप सभी के लिए प्रभु से आशीष की कामना करता हूं ।

अग्ने नय सुपथा राय अस्मान । { वेद }

34 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

आदरणीय चिपलूनकर जी ,यहां आकर पुकार लगाने से पहले क़त्ल आतंकवाद और लुचाप्पन के आरोपों में गिरफ़तार ‘ांकराचार्य पुरोहित साध्वी बापू और बाबाओं की निन्दा में आज तक आपने कुल कितनी पोस्ट क्रिएट कीं ?
आपने हमें जिस आशा के साथ पुकारा था हमने उसे पूरा करने की हद भर कोशिश की है ।
हम भी आपसे उपरोक्त वर्णित घटनाओं की निन्दा की आशा करते हैं। आपके द्वारा उठाये गये अनपेक्षित प्रसंग के पटाक्षेप के बाद मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि आपने श्री रामचन्द्र जी और सीता माता के गौरव को क्षति पहुंचाने वाले उस मुख्य मुद्दे का कोई निराकरण करना क्यों उचित नहीं समझा जोकि प्रस्तुत पोस्ट का मुख्य विषय है ?
क्या इसे आपके द्वारा विषयान्तर करके ध्यान बंटाने की तकनीक का इस्तेमाल माना जाये जो कि आदमी निरूत्तर और लाचार होने की दशा में करता है ?या फिर यह माना जाए कि आपको न तो उन दोनों के मान सम्मान की कोई परवाह है और न ही इसके निराकरण के किसी उपाय का ही ज्ञान है ?आखि़र आपका यह तथाकथित राष्ट्रवाद है किस काम का ?
कम से कम आप मेरी तरह रामायण के ऐसे असुविधाजनक प्रसंगों की सत्यता को तो नकार ही सकते थे । लेकिन आपने यह भी नहीं किया ।

Anonymous said...

nice post babu.

Anonymous said...

ऐसी बातों की निन्‍दा करता हूं

Anonymous said...

यो वर्चिनः शतमिंद्रः सहस्रमपावपद्
अर्थात इंद्र ने वर्ची के सौ हज़ार पुत्रों को भूमि पर सुला दिया अर्थात मार दिया । { ऋगवेद 2/14/6 }

सोहनी महिवाल said...

badhiya

धीरेन्‍द़ भाई सजवानी said...

आदरणीय चिपलूनकर जी ,यहां आकर पुकार लगाने से पहले क़त्ल आतंकवाद और लुचाप्पन के आरोपों में गिरफ़तार ‘शंकराचार्य पुरोहित साध्वी बापू और बाबाओं की निन्दा में आज तक आपने कुल कितनी पोस्ट क्रिएट कीं ?

सन्‍नौ रानी said...

श्री हनुमान जी द्वारा लंकावासी करोड़ों मासूम ‘शहरियों को जीवित जला देने की घटना को सच मानने से ही इनकार करता हूं

Mohammed Umar Kairanvi said...

अनवर जी मैं आपका सवाल दोहरा देता हूँ तब शायद किसी को सुनायी दे जाये


''आख़िर मुसलमान से इतनी नफ़रत क्यों ? कि अगर वह भारत की अस्मिता के प्रतीक श्री रामचन्द्र जी के गौरव की लड़ाई लड़े तब भी उसका साथ देनेकोई न आए ?आख़िर वो लोग कहां सो गये जो चिपलूनकर जी की पोस्ट पर उन्हें उनकी निष्पक्षता की बधाई देने के लिए तांता लगाए खड़े थे ?उनमें से कोई हमें बधाई देने आखि़र क्यों नहीं आया?''

Anonymous said...

Dr Anvar,
इसलाम का अर्थ है ‘ ‘अशान्ति ‘ ,ईश्वर का आज्ञापालन , ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण । औरतो को बुर्के के अन्दर रखता हो. बेगुना लोगो की बम से हत्या करता हो |(Talibaan have killed 1 lakh people in Afganishtaan and Pakistaan ,50% was Ladies and childern in name of Islam. Few days before Hamid Karzai(President of Afganistaan) said about 50 lakh childer are out of school, because of Taliban . World wide, last year 50 thousand people killed by Islamic terrorist in name of Islam . More people was killed itself in islamic countery. Two days before 500 hundered christian kiiled by islamic terrorist in naizria. How can be a Religion called "SHANTI KA DHARM" if its teaching killed people. All these because of the teaching of Holi Quran - How Funny......ha.ha.ha....)
जो आदमी इन मौलिक गुण से युक्त हो वह मुसलिम कहलाता है
Dr Anvar , AAj sare world mein musalmaan ko gandi nazar se dekha jata , Musalmano ne duniya mein bahut sare begunaa logo ko mara hai. tum log apni chhbi sudharne ke liye, anya sare dharm ka sahara le rahe ho. or Jabardasti Islam ko dusre dharmo kii kitabon se jod rahe . Usi prakar tum hindu dharm ka bhii sahara le raho ho . Maine tumhari saari posto me dekha hain ki tum hindu dharm ke VED or Ramayan or Mahabharat se kuchh baate nikal rahe ho or in baate se tum islam dharm ke "Shanti" ka dharm sabit karne kii koshish kar rahe ho. Lekin in ye sab baate Islam dharm ke prati "Negetive Atitute" hee paida kar rahe hain. Orisse Islam or bhii Badnaam ho raha hai. Hamare Dharm Grandho me kyaa likha , ye tum hinduon mein chhod do, Hame pata kya bura hain kya sahi. Ye bahut hii Mazaak Lagata hai ki Koi Musalmaan ye baate bata raha hai. Mere ko to hansii aa rahi hai TUM logo per.

Meri baat mano, sabko kewal GEETA (not quran) Padao, sab sahi ho jayega. Baba ram dev ke YOG karao.

Tarkeshwar Giri said...

Dusare ke Ghar ki taraf isara karne se pahle apne ghar ko dheko. Kitne Masumo ko Dharm parivartan ke naam par mar diya gaya, iska koi lekha jokha hai aapke pass. Bharat se bahar nikal karke ke dhekhen tab pata chalega ki musalmano ki sacchai kya hai.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

क्या मजाक है? जिस तरह वेद ऋचा का अर्थ किया गया है, उसी तरह कुऱआन का भी अर्थ आप करेंगे? या इजाजत देंगे। फिर तो मोमिन के ब्लाग की आप को ताऱीफ करनी चाहिए।

सलीम ख़ान said...

आख़िर वो लोग कहां सो गये जो चिपलूनकर जी की पोस्ट पर उन्हें उनकी निष्पक्षता की बधाई देने के लिए तांता लगाए खड़े थे ?उनमें से कोई हमें बधाई देने आखि़र क्यों नहीं आया?'

Suresh Chiplunkar said...

1) आपने सिद्ध कर दिया कि आप ज़ाकिर नाईक के परम चेलों में से एक हैं… ठीक उन्हीं की तरह कुतर्क से भरपूर, ठीक उन्हीं की तरह सच्चाई से आँखें मूंदने वाले…
2) आपके इस लेक्चर के लिये मैं संयुक्त राष्ट्र से अपील करता हूं कि वह आपको प्रतिनिधि बनाकर तालिबान के शिविरों में भेजे ताकि विश्व शान्ति स्थापित हो… :)
3) बार-बार मेरा नाम लेकर TRP बढ़ाने (विवाद पैदा करने), वेदों की ऊटपटांग व्याख्या करने की बजाय यह प्रवचन अरब देशों के शेखों को दें, कर्नल गद्दाफ़ी को दें (सद्दाम तो रहे नहीं)

इतने बड़े प्रवचन के बावजूद फ़िलहाल मेरे तीनों प्रश्न अनुत्तरित हैं 1) इस्लाम में समानता की भावना और ऊंच-नीच नहीं है तो ईरान-ईराक 10 साल तक पागल की तरह क्यों लड़े? 2) क्या सभी इस्लामी देशों में इस्लामिक बैंकिंग पद्धति लागू है? यदि हाँ तो क्या वाकई वहाँ खुशहाली आई, और यदि नहीं तो आप उन्हें समझाने क्यों नहीं जाते कि इसे लागू करो, 3) आपके और ज़ाकिर नाईक के प्रवचनों का असर तालिबान और अरब के शेखों पर क्यों नहीं होता?

बड़ा कन्फ़्यूजन है भाई… अगली पोस्ट में मेरा नाम तीन बार लिखियेगा… अच्छे हिट्स मिलेंगे :) और 10-15 फ़र्जी आईडी से टिप्पणी भी करवा लीजियेगा (लेख में से ही कॉपी-पेस्ट करवा कर) :)

DR. ANWER JAMAL said...

@ aadarniya chiplunkar ji
bina kuchh soche bol dete ho.
mere pas pura tonahin hai lekin apka kaam chalane layaq lekha zuroor hai.
varvadiyon ne dharm parivartan ke naam par kitne bodhhon aur jainiyon ko mara hai ?
ye ek puri post ka vishay hai.
Shankar Digvijay namak granth men aap ise padh sakte hai .

DR. ANWER JAMAL said...

@Sir Divedi ji
ye arth maine nahin kiya. Maine to kewal Shree Mahidhar ji ko udDharit kiya hai.
na hi maine iski koi vyakhya di hai . Aap KIsi sanatani vidvan ki jo bhi vyakhya denge use bhi men maan lunga .
Aap khud dekhiye aur in anuvad kartaon se puchhiye .
aapki peera ko men samajh sakta hun aur apse kar badhh chhama bhi mangta hun.
lekin varvadi kupracharakon ne mere samne sawal aur aarop rakh dale to meri majburi ban gayi.

DR. ANWER JAMAL said...

@ priya bandhu
baat karne se pehle Shri Ramchandra ji ke Gaurav raksha abhiyan men haath batayen.
baqi duniya bad ki
pehle raksha ram ki.

DR. ANWER JAMAL said...

@anonymous ji
Sabhi musalman apna aachran sudhar lenge to log musalmano ko achhi nazron se dekhne lagenge.
Aaj bhi achhe musalmano ko koi gandi nazar se nahin dekhta .
unke to marne ke baad bhi log unka aadar karte hain.
Kuchh si baton men hind ke musalmano se yahan ke hindu behtar hain. Musalmano ko unse achhi baten seekhni chahiyen.
Yahan rishiyon ka gyan aaj bhi hai.
main khud unka aadar karta hun.
lekin harek ayra ghayra rishi kehlane ka haqdar nahin hai.

DR. ANWER JAMAL said...

@ margdarshak sakha sathi kairanvi ji
aur bhai saleem khan
aur sabhi blog premiyon ka abhar.
banda sabka aur sabke rab ka hai shukraguzar.

Mohammed Umar Kairanvi said...

गुरू जी आज तो आपके ब्‍लाग की विजिटर संख्‍या 1000 पार करे ही करे, 29 जनवरी को पहली पोस्‍ट से आरम्‍भ हुयी आपकी ब्‍लागयात्रा काफी सराहनीय रही, 42 दिन में 1000 यह आप ही कर सकते थे आपने ही किया, बधाई हो

Anonymous said...

एक बहुसांस्कृतिक देश में ऐसा लेखन शरारती लेखन की श्रेणी में गिना जाएगा . जो एक असहिष्णु और जाहिल आदमी ही कर सकता है .

रही बात उद्धृत करने की तो अभी कोई दूसरा शरारती 'रंगीला रसूल' उद्धृत कर देगा तो चुनचुने काटने लगेंगे . ज्ञान की गठरी अपने दौलतखाने में रखिए. अपनी तंगदस्ती, तंगदिली,तंगनज़री और जहालत का सार्वजनिक प्रदर्शन काहे करते हैं. यह तंगबख्ती और खानाखराबी का रास्ता है . अल्लाह आपको तंदुरुस्ती बख्शे .

-- चौपटस्वामी

कौशल तिवारी 'मयूख' said...

समय बदल रहा है ,दुनिया बदल रही है , और सबसे अच्छी बात आस्थाएँ बदल रही है ऐसे में हम इतिहास की नुक्ता-चीनी में समय ख़राब कर स्वयं का और सामने वाले का दिमाग ख़राब करें यह उचित नहीं है बेहतर यह हो की हम आज और आने वाले समय को अच्छा करे तो हमारा इतिहास का ज्ञान सार्थक होगा |

संजय बेंगाणी said...

कितने हिन्दु है जो सदियों पुरानी किताबों से चिपके बैठे हैं? इसलिए बकवास छोड़िये.

संजय बेंगाणी said...

कितने हिन्दु है जो सदियों पुरानी किताबों से चिपके बैठे हैं? इसलिए बकवास छोड़िये.

GULSHAN said...

jame raho munna bhai .

SHAFIQ BETUK said...

LO MAIN AA GAYA AB BLOGGING MEN.

DR. ANWER JAMAL said...

मैं सभी पाठकवृन्द का आभारी हूं । बेशक आपका यह आना जाना बेकार न जाएगा । आपके सामने यहां वे राज़ प्रकट होंगे जिन्हें वर्णवादियों ने हज़ारों साल से बड़े जतन से छिपा रखा है ।

मालिक आपके सारे दुख दूर करे और आपके साथ मेरे भी ।

आमीन तथास्तु ।

मनुज said...

@ आदरणीय अनवर जमाल महोदय
आपके लेखन की मैं तारीफ करता हूँ, कम से कम आपने तार्किक अन्वेषण तो किया और कैरान्वी जी जैसे लोगो की तरह आप ने नहीं कहा कि "तम्बू यहीं गढ़ेगा".
दूसरी बात ये, कि आपने स्वयं को वृहद् हिन्दू परिवार का अंश माना, ये भी काबिल-ए-तारीफ है.
लेकिन एक बात आप को समझनी चाहिए कि वास्तव में उन बातों का कोई अर्थ नहीं है जो कि हज़ारो साल पहले लिखी गयी. भले ही वो रामायण हो या वेद. actually what the point is only eternal values remain same and constant but contextual meaning keeps on changing with the time. और अगर इस बात को हम सब इश्वर द्वारा प्रदत्त सर्वोत्तम भेंट यानी बुद्धि का प्रयोग कर के समझेंगे तो बात आसानी से समझ में आ जाएगी.
आप कहते हैं कि हिन्दू धर्मग्रंथों के असुविधाजनक प्रसंगों की सत्यता को आप मान ने से आप इनकार करते हैं, मैं कहता हूँ कि चलिए आप सभी हिन्दू धर्मग्रंथों को मन-घरांत कहानियां मान लीजीये, but the point is कि क्या उनकी सत्यता या असत्यता से एक common हिन्दू के जीवन पर कुछ प्रभाव पड़ेगा ? मेरा जवाब हैं, कि नहीं पड़ेगा.
the reason is same as Mr Chiplunkar pointed "हम किसी भी किताब को अंतिम सत्य नहीं मानते ना ही किसी सिध्धांत से चिपके रहते हैं "
जो प्रश्न आदरणीय चिपलूनकर जी ने पूछे हैं उन पर ज़रा गौर फरमाईयेगा, वे बेहद ही गहन सवाल हैं, भले ही पढने से एकदम नोर्मल मालूम होते हो....मात्र निंदा कर देने से उनका निराकरण नहीं हो सकेगा. और इसका जवाब बिलकुल सीधा सा है...फिलहाल समयाभाव के कारण ज्यादा नहीं लिख पा रहा हूँ, समय मिलते ही point-to-point लिखूंगा..
वर्तनी संबंधी त्रुटियों को क्षमा कीजीयेगा

मनुज said...

jaldi hee aapke blog pe fir se aaunga.

DR. ANWER JAMAL said...

@ Manuj ji
aapke pyar ke liye shukriya.
hamara jiwan hamari manyataon ke adheen hota hai.
Ghalat baat ko sach manne se taraqqi rukti hai.
jab tak varnvad ko ghalat samajh kar chhoda nahin gaya , Shudron ki halat men , vidhvaon ki halat men sudhar nahin hua.
Hindu Granthon ki saari baaten ghalat nahin hain. Bahut mahan siddhant bhi unmen hain.
GHalat ko sahi se alag karna waqt ki zururat hai .
THanks again.

मनुज said...

@श्री अनवर जमाल महोदय
आप लिखते हैं
"hamara jiwan hamari manyataon ke adheen hota hai.Ghalat baat ko sach manne se taraqqi rukti hai."
जबकी है इसके बिलकुल उलट ,
हमारी मान्यताएं हमारे जीवन के अधीन होती हैं. इस बात का फैसला करने वाले आप और हम कौन होते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए क्या सही है और क्या गलत??
ये इंसान का जीवन कोई straight-line-graph नहीं होता है कि जिसके हर पहलू को आप हम या कोई ग्रन्थ किसी नियम का हवाला देकर predict कर सके.
मानव का जीवन एक बहुत ही complex-entitiy है जिसमे हजारो variables की equations एक साथ अपना असल डालती हैं. मानव के स्वभाव को का कोई "general equation" नहीं हैं , जिसे किसी ग्रन्थ या किसी नियम रूपी calculas से predict किया जा सके ....
मेरे कमेन्ट पे reply-back करने के लिए आपको साधुवाद..
सधन्यवाद
मनुज

DR. ANWER JAMAL said...

@ mere sutarkwadi mitra
aap ko pakar mujhe bahut khushi hai. aadmi ke gyan me to sachmuch itni samarthy nahin hai lekin jise sarwshaktiman ishwar kaha jata hai , uske aadesh jiwan ke har pehlu men maarg dikhate hain.
Thanks

Anonymous said...

MANANIYA DR MAHODAY SABSE PEHLE TO APKO YE UPADHI KISNE DI YE BATAYE KYO KI BEVKUF INSAN BHI KUCH BOLTA HAI TO SOCHATA HAI KYO BOLU. KYA BOLNE SE FAYDA AUR KON SUNEGA PAR AAP IN SAB BATO KO NAJARANDAJ KARTE HAI MAHAN ECONOMICS MAN CHANAKYA NE KAHA HAI 1 PARIVAR KO BACHANE KE LIYE 1 INSAN , I GAON ( VILLAGE ) KO BACHANE KE LIYE 1 PARIVAR 1 STATE KO BACHANE KE LIYE 1 GAON AUR 1 COUNTRY KO BACHANE KE LIYE 1 STATE KI KURBANI DI JA SAKTI HAI AUR YE BAHOUTR ACHA HAI KYO KI IS SE PURI MANAV JATI BACH JATI HAI AISA HI HANUMAN JI NE KIYA MANAVTA KO BACHNE KE LIYE RAVAN KA LANKA JALANA PADA AUR AAP KE BLOG MAIN KE MUSLIM BHAI NE KAHA KI AGAR MUSLIM RAMCHANDRA JI KE SATH HO TO BHI HINDU NAHI APNAYEGA KITNE SHARAM KI BAAT HAI AAJ JITNI IJJAT AAP KO INDIA MAIN HAI AAP PAKISTAN BHI JAYE TO AAP KO MUSLIM HOTE HUE BHI MUHAJIR ( DHOKEBAJ ) MAKAR INDIAN MUSLIM KAHEGA PAR AAJ PROVE HAI HINDU MUSLIM KE FESTIVEL MAIN JATE HAI PAR MUSLIM HI HINDU KE FESTIVAL MAIN NAHI JATE AUR HINDU SAMAJ JO CHITI KO AATA SNAKE KO MILK PILATI HAI KYA EO AATANKI HO SAKTE HAI JAB AAP MUSLIM CHIRSTAN MILKAR JABARDASTI INDIA PAR ATTACK KARTE HO TO HUM ANSWER DETE HAI YAAD HAI NA PAKISTAN KE 90,000 ARMY KO INDIA NE COD DIYA THA HUM ATTACK NAHI KARTE SIRF APNA BACHAV KARTE HAI KYO KI PRECAUTION IS BETTER THAN PREVENTION ....................... JAI SHRI RAM JAI HIND

Anonymous said...

RIZWAN KHAN....ANWAR BAHI AAPNE SHANKAR DIGVIJAY GRANTH KE BARE ME KAHI KAHA HAIN,
BHAI KYA VASTAV ME GRANTH HOTE HAIN .MUJHE KUCH GRANTHO KE BARE ME AAPSE PUCHNA HAIN PLEASE HELP ME

Anonymous said...

PLEASE HALP ME RIZWAN KHAN
TANTRIK2008@GMAIL.COM