सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Friday, March 26, 2010

मेरे प्रिय श्री रामचन्द्र जी को उनके कुल सहित नष्ट करने की धमकी देने वाला और उन्हें सचमुच नष्ट करने वाला दुर्वासा भी क्या मुसलमान था ? Balmiki Ramayna


@आदरणीय ब्लॉग पधारक परछिद्रान्वेषाभ्यासमग्नजनशिरोमणि नास्तिक्यभ्रमधुंधाच्छादित विकलहृदय क्षीणमनबलेन्द्रिय दुसाध्य वायरसयुक्त ब्लॉगरूपी ध्वस्त दुर्गस्वामी प्रश्नकलाविस्मृत सद्भाव वक्तव्य याचक प्रवीण जी , 3 बिन्दीयुक्त आपकी टिप्पणी प्राप्त हुई परन्तु उसमें आपके व्यक्तित्व की छाप न थी ।

1- उसमें आपने हस्बे आदत यहां और यहां कहकर कुछ भी न दिखाया था । हालांकि आप कम से कम जनाब सतीश सक्सेना जी के ब्लॉग का लिंक तो दे ही सकते थे , जहां आपने यह कमेन्ट तब किया था जब मैंने ‘शिव महाशिव व्याख्यानमाला‘ का उद्घाटन नहीं किया था ।

2- आप अपने वक्तव्यानुसार नास्तिक हैं और श्री श्री सारथि जी महाराज की पावन सूची कलंकित कॉलम में नास्तिक नम्बर 3 की उपाधि से विभूषित भी हैं ।नास्तिक होने के दावे के बावजूद ईश्वर और धर्म को कल्याणकारी मानने का क्या अर्थ है ?

क्या मेरे प्रवचन के बाद आपने नास्तिक मत त्याग दिया है ?

या फिर आप लोगों को अपने बारे में धोखा दे रहे थे और आप नास्तिक केवल इसलिये बने हुए थे कि आप तो दूसरों की मान्यताओं पर प्रश्नचिन्ह लगा सकें लेकिन कोई आपसे कुछ न पूछ सके ?

हमारे स्वर्गीय गुरू जी कहा करते थे कि हिन्दुस्तान की मिट्टी का मिज़ाज आध्यात्मिक है , यहां का आदमी नास्तिक नहीं हुआ करता । भारत का नास्तिक भी ईश्वर से डरता है ।

ख़ैर जो भी आपकी मानसिक प्रॉब्लम हो ।हमें तो यह बताइये कि मेरी किस बात से दुर्भावना फैली है ?मेरी दुर्भावना के शिकार प्रमुख व्यक्तियों के नाम क्या हैं ?

वे व्यक्ति खुद तो इसी जुर्म के आदी तो नहीं हैं ?

ब्लॉग मेरे गीत पर आपकी टिप्पणी के बाद ‘आदि शिव और अनादि शिव पर सुन्दर तत्वचर्चा‘ चल रही है । क्या इतने लम्बे चैड़े और इतने प्यारे व्याख्यान के बाद भी दुर्भावना वालों की दुर्भावना दूर नहीं हुई ?

आखि़र जब इतनी पवित्र हस्तियों पर इतनी बड़ी बातें देख सुनकर भी लोगों के दिलों का ज़ंग न छूटा तो आपके द्वारा प्रस्तावित मात्र 3 सैन्टेन्स कह देने से कैसे छूट जाएगा ?

जब आप पहले से ही बदगुमान हैं कि मैं आपके प्रस्ताव को न मानूंगा तो आप यहां करने क्या आये हैं ?

लेकिन याद रखिये , नास्तिकों की बुद्धि के तंग दायरे से केवल ईश्वर ही नहीं बल्कि उसके बन्दे भी परे होते हैं ।जो आप कह रहे हैं मैं कह दूंगा ।


लेकिन...


1- आपकी बात मानने से पहले मैं 3 बातों की गारण्टी चाहूंगा ।उनमें सबसे पहली बात यह है कि आप मुझे यक़ीन दिलाएं कि यह प्रस्ताव सचमुच आपका ही है , किसी अन्य ने आपके नाम से नहीं भेजा है और जो कुछ आप मुझसे मानने के लिए कह रहे हैं , आप स्वयं भी उसपर विश्वास रखते हैं । ...जारी


धन्य हैं श्री श्री सारथि जी महाराज , जिनकी नीति कुशलता के कारण आज यहां याचक मुद्रा में खड़े बड़े मुझसे वह कुछ मांग रहे हैं , जो कि मैं स्वयं बांट रहा हूं । मेरे रथ को जेट गति से ब्लॉगाकाश में पहुंचा देने वाले शत्रुनिद्राहरणहार श्री उमर कैरानवी जी को उनके जन्म दिन पर डबल बधाई ।क्या कहा ?


उनका जन्म तो 13 को हुआ था और मैं उनको बधाई दे रहा हूं 26 को ?


दरअस्ल बात यह कि 13 दुनी 26 । आज 26 है जो कि 13 का डबल है । मैं श्री 1008 विहीन सारथि जी महाराज को उनके जन्मदिन पर डबल मुबारकबाद पेश करता हूं ।

हो सकता है कि आज मैं उन्हें मुबारकबाद देना भूल जाता लेकिन ...

आदरणीय प्रवीण जी की आमद ने उनके जन्म दिन की याद को ताज़ा कर दिया । यही तो वह दिन है जब...

ख़ैर... अब कहां प्रवीण जी के ब्लॉग में कोई वायरस छिपा होगा ?

कोई देखे तो मेरे मायावी की उपकार लीला ।

प्रशंसा , बहुत प्रशंसा ।

आप चाहे न जियें हज़ारों साल

परन्तु दुष्ट रोयें हज़ारों साल

और वैसे भी आप हज़ारों साल से ज़्यादा जी चुके हैं

क्योंकि शेर की एक दिन की ज़िन्दगी हज़ार कुत्तों के हज़ार वर्ष के जीवन से बेहतर है ।


मुस्लिम काफिरो ने भारत वर्ष के टुकडे किये, ये गद्दार है, देश द्रोही है, देस के गद्दारो को जूते मारो (या कोडे) सालो को
यह इस लायक़ नहीं कि इसे ज़्यादा स्पेस दिया जाए इसे तो हम यूं ही चलता कर देंगे । बेशक हमने अपने विरोधी प्रवीण जी का विरोध किया है लेकिन अपनी पोस्ट में उन्हें इतना ज़्यादा स्पेस देकर हमने उनके प्रति अपने प्रेम को ही प्रकट किया है ।निःसन्देह वे मेरे विरोधी हैं लेकिन एक बेतरीन विरोधी हैं । एक बेहतरीन आदमी हैं । उनकी वाणी से मैंने कभी कोई गाली निकलते हुए नहीं सुनी ।

उन्हें यक़ीन आये या न आये लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि मैं उनसे दिल से प्यार करता हूं । मैं तो अपने हरेक दिन को अपना आखि़री दिन मानता हूं ।

रोड एक्सीडेन्ट में आये दिन लोगों को मरते हुए देखता हूं और खुद भी बहुत बार चपेट में आने से उस मालिक के करम से बचा हूं लेकिन आख़िरकार मौत तो मुझे आकर रहेगी । कब आ जाये , नहीं जानता ?

बहरहाल इस मर्त्यलोक में मुझे सदा नहीं रहना है ।

... लेकिन मैं जहां भी रहूंगा प्रवीण जी को एक बेहतर इनसान के रूप में अरबों खरबों साल तक याद रखूंगा । मेरे मरते ही प्रवीण जी कृपया मेरे कटु वचनों को माफ़ कर दीजियेगा । लेकिन जब तक मैं जियूंगा हरेक नास्तिक को हैरान किये रखंगा और आप को भी ।

अरे इस राज की खाज मिटाना तो रह ही गई ।

रह जाने दो भाई ये आदमी नालायक़ है और दो महान आदमियों के साथ इसका ज़िक्र करना ठीक नहीं है । पहले ये किसी लायक़ बने तो सही ।यह अपना ब्लॉग बनाने या उसे बताने तक के लायक़ नहीं । गद्दार खुद है । बता दयानन्द जी को ज़हर किस मुसलमान ने दिया ?आदि शंकराचार्य को ज़हर किस मुसलमान ने दिया ?

मेरे प्रिय श्री रामचन्द्र जी को उनके कुल सहित नष्ट करने की धमकी देने वाला और उन्हें सचमुच नष्ट करने वाला दुर्वासा भी क्या मुसलमान था ?

गांधी को , इंदिरा गांधी को और राजीव गांधी को मारने वाला किस धर्म का था ?

अब पाकिस्तान की सुन !जिन्नाह की मज़ार वन्दना करने वाले हिन्दुस्तानी लाल का नाम बताओ ?

जिन्नाह को 800 पेज से ज़्यादा लिखकर दोषमुक्त किस नेता ने कहा ?

मुसलमानों के भारत आगमन से पहले ही आर्यावर्त का हज़ारों टुकड़ों मे विभाजन करने वाले हिन्दू राजाओं को और उनके वंशजों को ग़द्दार कब कहा जायेगा ?

विदेशी हमलावरों को भारत पर हमले के लिए बुलाने वाले और उनकी मदद करने वाले ग़द्दार राजा और सिपाही तुम्हारे बाप दादा ही तो थे ।

ग़द्दारी तो तुम्हारे खून में है ।

आज भी जिस सीट पर बैठे हो जनता से रिश्वत लिये बग़ैर काम ही नहीं करते । वाह क्या खूब राष्ट्रभक्ति है ?

नकटे ही आज नाक वालों को नक्कू कह रहे हैं?

हम मुसलमां हैं जां निसारे वतन

हमने क़ायम किया है वफ़ा का चलन

हम ख़ुलूस ओ मुहब्बत के पैकार हैं

राहे हक़ में सिदाक़त के पैकार हैं

दुश्मनों के लिए तीर ओ तलवार हैं

हमसे कहते हैं फिर भी कि ग़द्दार हो

इस हसीं लफ़्ज़ के तुम ही हक़दार हो

सच कहो सच से अगर रखते प्यार हो

क़त्ल किसने किया बापू ए वतन ?
...और ए बी उर्फ़ अर्ध बुद्धि ! ये बता कि तू छोटा है या झूठा है ।

तू 30 साल का होकर अपने चाचा को बेटा बता रहा है । बदतमीज़ कहीं के ।

या तो बता कि तू 70 साल का है । बुड्ढा समझकर तेरी हर बात झेलेंगे लेकिन अगर तू मुझसे 10 साल छोटा है तो फिर फिर छोटा बनकर बात कर ।

विरोध कर मगर मर्यादा को न भूल ।

तुझ आस्तिक से तो प्रवीण जी जैसे नास्तिक बेहतर हैं ।

उन्हीं से कुछ सीख ले । मैं भी उनसे सीखने का प्रयास कर रहा हूं ।

... बस प्रवीण जी के प्यारे नाम और उनसे सादर क्षमा के साथ अब की बोर्ड को आराम देता हूँ ।

जय हिन्द .

30 comments:

sleem said...

CACHHA VYAKHAYAN KI JAGAH BHASHAN DENE LAG GAYE ,,,CHOONAVA LADOGE KYA???? MUNCIPALTY KAA....CHCHHHA GOOSE ME HO .....PARA CHADH GAYA CHACHHHA??????

Anonymous said...

juta bhiga kar marte hain aap...kuch to raham karo in nasamjho par...

sleem said...

CHACHAA CHACHHA SARE MUSLIM GADDAR THODE HI HE..LAKIM VANDE MAATRM KE KHILAAF FTAVA JARI KARNE VALEE DEV BAND KE KHILLAAF BOLTE KYO NAHI HO....AATANG VADIYO KAA KHOOL KR VIRODH KYO NAHI KARTE HO????BATALA KAND KO JHOOTA KYO BATATE HO KOOCHH GADDAR NETAVO KE SAATH...KABHI KYO NAHI KAHATE HO KI AFJAL KO FANSEE PER CHADHAYA JAYE??????

Mohammed Umar Kairanvi said...

गुरू जमाल जी आज तो कमाल की जगह जलाल आधिक दिखा रहे हो, जन्‍मदिन की बात खूब रही, गद्दारों को शीशा दिखा दिया,

यह केवल सवाल करते हैं जवाब नहीं देते, वैसे है ही नहीं इनके पास जवाब, बस टीवी पे रामायण देख ली इतना ज्ञान है इनके पास,
फिर भी देखते हैं आपके सवालों को यह आज जवाब देते हैं कि नहीं मैं सवाल दोहराता हूं ---

श्री रामचन्द्र जी को उनके कुल सहित नष्ट करने की धमकी देने वाला और उन्हें सचमुच नष्ट करने वाला दुर्वासा भी क्या मुसलमान

Mohammed Umar Kairanvi said...

मुसलमानों के भारत आगमन से पहले ही आर्यावर्त का हज़ारों टुकड़ों मे विभाजन करने वाले हिन्दू राजाओं को और उनके वंशजों को ग़द्दार कब कहा जायेगा ?

सलीम ख़ान said...

मेरे प्रिय श्री रामचन्द्र जी को उनके कुल सहित नष्ट करने की धमकी देने वाला और उन्हें सचमुच नष्ट करने वाला दुर्वासा भी क्या मुसलमान था ?

impact said...

आज भी जिस सीट पर बैठे हो जनता से रिश्वत लिये बग़ैर काम ही नहीं करते । वाह क्या खूब राष्ट्रभक्ति है ?

नन्‍दू गुजराती said...

क्या 'हिन्दू शब्द भारत के लिए समस्या नहीं बन गया है?
आज हम 'हिन्दू शब्द की कितनी ही उदात्त व्याख्या क्यों न कर लें, लेकिन व्यवहार में यह एक संकीर्ण धार्मिक समुदाय का प्रतीक बन गया है। राजनीति में हिन्दू राष्ट्रवाद पूरी तरह पराजित हो चुका है। सामाजिक स्तर पर भी यह भारत के अनेक धार्मिक समुदायों में से केवल एक रह गया है। कहने को इसे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय माना जाताहै, लेकिन वास्तव में कहीं इसकी ठोस पहचान नहीं रह गयी है। सर्वोच्च न्यायालय तक की राय में हिन्दू, हिन्दुत्व या हिन्दू धर्म की कोई परिभाषा नहीं हो सकती, लेकिन हमारे संविधान में यह एक रिलीजन के रूप में दर्ज है। रिलीजन के रूप में परिभाषित होने के कारण भारत जैसा परम्परा से ही सेकुलर राष्ट्र उसके साथ अपनी पहचान नहीं जोडऩा चाहता। सवाल है तो फिर हम विदेशियों द्वारा दिये गये इस शब्द को क्यों अपने गले में लटकाए हुए हैं ? हम क्यों नहीं इसे तोड़कर फेंक देते और भारत व भारती की अपनी पुरानी पहचान वापस ले आते।


हिन्दू धर्म को सामान्यतया दुनिया का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि दुनिया में ईसाई व इस्लाम के बाद हिन्दू धर्म को मानने वालों की संख्या सबसे अधिक है। लेकिन क्या वास्तव में हिन्दू धर्म नाम का कोई धर्म है? दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर रहे डॉ. डी.एन. डबरा का कहना है कि 'हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे नया धर्म है।

http://navyadrishti.blogspot.com/2009/12/blog-post_31.html

Aslam Qasmi said...

हम मुसलमां हैं जां निसारे वतन

हमने क़ायम किया है वफ़ा का चलन

हम ख़ुलूस ओ मुहब्बत के पैकार हैं

राहे हक़ में सिदाक़त के पैकार हैं

दुश्मनों के लिए तीर ओ तलवार हैं

हमसे कहते हैं फिर भी कि ग़द्दार हो

इस हसीं लफ़्ज़ के तुम ही हक़दार हो

सच कहो सच से अगर रखते प्यार हो

क़त्ल किसने किया बापू ए वतन ?

muk said...

बात को रखने का कोई तरीका तो श्रीमान ने सीखा ही नहीं बस अपनी अपनी हांके जा रहे हो

ab inconvinienti said...

सबसे बड़े कायर और गद्दारअगर कोई है तो वह मुसलमान हैं, जिनके पूर्वजों ने डर या लालच के वशीभूत अपनी संस्कृति और माँ बाप के धर्म को छोड़ दिया.

गद्दारी तुम्हारे खून में है, तभी जिस देश में मुसलमान रहते हैं उसी के खिलाफ साज़िश करने लगते हैं, वहां दहशतगर्दी फ़ैलाने लगते हैं. चाहे वह अमेरिका हो, हिंदुस्तान हो, या पाकिस्तान ही क्यों न हो.

जो सामने है उसे प्रमाण की क्या आवश्यकता? और हद्द यह की, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे?

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मैं नास्तिक हूँ पर अपने परिवेश के की इज्ज़त करता हूँ. जिसने आस्तिक होते हुए भी मुझे नास्तिकता की स्वतंत्रता दी. अपने परिवेश और संस्कृति का अपमान मैं सहन नहीं कर सकता. एक सच्चा नास्तिक होने के नाते अपने परिवेश और संस्कृति का सम्मान और सच की रक्षा करने का पूर्ण प्रयास मेरा कर्त्तव्य है.

क्या कोई मुस्लिम परिवेश में पैदा सरेआम कह सकता है की वह 'मुसलमान है पर अल्लाह पर विश्वास नहीं रखता'? मुस्लिम देशों में नास्तिकता संज्ञेय अपराध है. बाकी सभी देशों में आप आस्तिक होने न होने के लिए स्वतंत्र हैं.

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अडवाणी ने जिन्ना की मजार पर सरकारी प्रोटोकॉल के तहत श्रद्धांजलि अर्पित की थी. बिलकुल वैसे ही जैसे पाकिस्तानी मंत्री सरकारी यात्रा पर दिल्ली आए तो उसे कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत महात्मा गाँधी की समाधी पर फूल चढ़ाने ही पड़ते हैं. चाहे वह महात्मा गाँधी को कितना ही बड़ा खलनायक क्यों न मानता हो, कितनी ही नफरत क्यों न करता हो. समाधी पर जाने की आपकी मर्ज़ी हो या न हो, यह कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है. कोई राजनेता इससे इनकार नहीं कर सकता.

जमाल बेटे! जमालगोटे! क्या तुमने जसवंत सिंह की 'जिन्ना : भारत-पाकिस्तान विभाजन के आईने में' पुस्तक पढ़ी है? मुझे विश्वास है की जैसे तसलीमा की किताबें बिना पढ़े जलाने लगे बस वैसे ही जसवंत सिंह के बारे में कुछ भी कहने लगे. मैंने पढ़ी है वह किताब, इसमें बड़ी बेबाकी से जसवंत सिंह ने जिन्ना की असुरक्षा का वर्णन किया है. क्या चल रहा था उसके दिमाग में १९४० के दशक में?

दुःख इस बात का है की भाजपा को भी ओछी राजनीती और अफवाह के कारण जसवंत सिंह की सदस्यता रद्द करनी पड़ी. जबकि यह अपने आप में एक सशक्त विश्लेषण है, की अलग पाकिस्तान की मांग के पीछे कौन सी मानसिकता काम कर रही थी.

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और अंत में दुर्वासा, गुस्से में धमकाने वालों का या कुछ भी कह जाने वालों की बातों का समझदार लोग बुरा नहीं माना करते. बस माफ़ कर देते है और भूल जाया करते हैं.

ab inconvinienti said...

@ A B ...और ए बी उर्फ़ Ardh बुद्धि ! ये बता कि तू छोटा है या झूठा है । तू 30 साल का होकर अपने चाचा को बेटा बता रहा है । बदतमीज़ कहीं के । या तो बता कि तू 70 साल का है । बुड्ढा समझकर तेरी हर बात झेलेंगे लेकिन अगर तू मुझसे 10 साल छोटा है तो फिर फिर छोटा बनकर बात कर । विरोध कर मगर मर्यादा को न भूल । तुझ आस्तिक से तो प्रवीण जी जैसे नास्तिक बेहतर हैं । उन्हीं से कुछ सीख ले । मैं भी उनसे सीखने का प्रयास कर रहा हूं ।

शुक्रिया!

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भले ही उम्र में तुमसे छोटा सही. पर तुम मुझे पहले ही वटवृक्ष और बुजुर्ग मान चुके हो. तो मेरा भी फ़र्ज़ है की तुम्हे नादां बच्चा समझ नसीहत दूँ. वैसे मेरी उम्र साढ़े अट्ठाईस है.

जो जितनी इज्ज़त के लायक होता है उससे उतनी ही मर्यादा निभाई जाती है. बड़े होने के नाते सम्मान चाहते हो तो पहले खुद में बड़प्पन लाओ.

एक कहावत है, फर्स्ट डिसर्व देन डिज़ायर! उम्मीद है की गौर फरमाओगे.

Anonymous said...

Anvar,
Saam ko tumhe saare savaal kaa javaav doonga.
Tab tak Taslima kii kahanii padho. Lajja "Shame " on Islam.


"Talima has said ....for a revision of the Quran; she claims she only called for revision of the Sharia, the islamic religious law.[2] "

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Article in WIKIPEDIA....
.....
Following the publication of Lajja, Nasrin suffered a number of physical and other attacks. In October 1993, an Islamic fundamentalist group called the Council of Islamic Soldiers offered a bounty for her death.[6][9] In May 1994 she was interviewed by the Kolkata edition of The Statesman, which quoted her as calling for a revision of the Quran; she claims she only called for revision of the Sharia, the islamic religious law.[2] In August 1994 she was brought up on "charges of making inflammatory statements," and faced death threats from Islamic fundamentalists. A hundred thousand demonstrators called her "an apostate appointed by imperial forces to vilify Islam"; a "militant faction threatened to loose thousands of poisonous snakes in the capital unless she was executed."[10] After spending two months in hiding, at the end of 1994 she escaped to Sweden. One of the results of her exile was that she did not get to practice medicine anymore; she became a full-time writer and activist.

http://en.wikipedia.org/wiki/Taslima_Nasrin


Raj

Amit Sharma said...

सम्माननीय जमाल साहब,
उस अन्नंतकोटि ब्रह्माण्डनायक सर्वेश्वर्य अधिष्ठान स्व्भाव्तोपास्त समस्त्दोशमशेष क्ल्यान्गुनैकराशिम सर्वेश्वर की प्राप्ति के अनुष्ठान में हमारी राहें अनन्त काल तक जुदा नहीं रह सकती है, चाहे अलग अलग दिखती हो,और कोई उन अलग अलग राहों में से किसी एक राह को ना तो परम उत्कृष्ठ बताने का अधिकारी हो सकता है, और ना ही किसी राह को निम्नतर बताने का .

आदरणीय बंधुवर आप कह रहे है की मै पोस्ट के विषय से अलग राग अलापता हूँ,किस प्रकार? थोडा समझाने का कष्ट करेंगे!
१.मैंने सर्वप्रथम आपकी पोस्ट "गायत्री को वेदमाता क्यों कहते" है पे कमेन्ट की थी,अगर आपको लगता है की वह कमेन्ट विषय से अलग थी,तो बताइए किस प्रकार अलग थी ?

२.फिर आपकी पोस्ट "आखिर हिन्दू नारियों को पुत्र प्राप्ति की खातिर सिमन बैंको से वीर्य लेने पर कौन मजबूर करता है,यह विषय निहायती बचकाना लगा और यह सोचकर की इसका दिव्य-ज्ञान से क्या प्रायोजन टिपण्णी नहीं कर पाया, वैसे क्या आप स्पष्ट कर सकतें है की यह किस प्रकार इश्वर प्राप्ति में सहायक है और शिव वंश की एकता में सहायक है .

३.आपकी अगली पोस्ट थी "लंका दहन नायक पवन पुत्र महावीर हनुमान जी ने मंदिर को टूटने से बचाना क्यों जरुरी ना समझा " इस पोस्ट में आपके द्वारा किये गए सवालात किस प्रकार उस कल्याणकारी शिव की राह पे लेजाने वाले थे ?
और उसमें मैंने जो कमेन्ट की थी वह किस प्रकार विषय से हटकर थी?
उसी पोस्ट में आपसे मैंने मुस्लिम समाज द्वारा किये जा रहे सेवा कार्यों का विवरण जानना चाहा था, अगर वह उजागर हो तो इससे मुस्लिम समाज के प्रति आदर ही बढता क्या गलत किया.

४."किस अनुवाद में लिखा है की अल्लहा का अर्थ मनमोहन है" वाली पोस्ट से आपने अपना लहजा बदला और अपने हृदय परिवर्तन का दावा किया,उस पोस्ट में की गयी मेरी टिपण्णी किस प्रकार विषय विपरीत थी ?

५. "आखिर एक हिन्दू भाई गाली दे तो क्या दे " में आप से थोडा झुंझलाया था,पर गाली देने वालो को भी कोई समर्थन नहीं दिया था ,बताइए यहाँ किस प्रकार विषय से भटका था

६. "क्या यही रीत होती है सच के कद्रदानो की" पोस्ट में तो से उल्टा आप मेरी पहचान ही मिटाने पे तुल गए ,और उल्टा मुझे ब्लॉग से भगाने की धमकी (या समझाईश ? ) करने लग गए

७."क्या वाकई भगवान् छोटा अल्लहा बड़ा है " में आपने मूर्ति पूजा पे कुछ आक्षेप लगाये थे,समय नहीं था और थोडा भ्रम हज यात्रा के कर्मकांड को लेकर था ,तो भ्रम दूर करने के लिए हज यात्रा के कर्मकांड के बारे में पूछ कर क्या गलत किया ?

८.उसके बाद से आपकी पोस्ट क्या काबा सनातन शिव मंदिर है से आपका शिव तत्व सम्बन्धी व्याख्यानमाला शुरू हो गयी ,उसी में आपने एक प्रिय बंधु की आड़ लेकर मुझे कुत्ता भी कह डाला ,बजाये मेरी जिज्ञासाओ का समाधान करने के .

जमाल साहब बताइए तो सही ........................ क्या कहूँ आपसे बंधु ?

वैसे समय की काफी कमी होने की बावजूद लिख रहा हूँ ,प्रश्न और भी है ,और ज़वाब भी काफी है ,संपर्क बना ही रहेगा .
ईश्वर सभी का कल्याण करे

Ram Pal Singh said...

किस पागल से भिड रहे हो इसे इसके हाल पो छोड दो अन्‍यथा खुद भी पागल हो जाओगे

indian said...

राम को प्रिय बताओ पहले सीता को माता कहा था लक्ष्‍मण क्‍या है तुम्‍हारा?

बरसाती लाल said...

barsat ke mausam men, sajan ko bana loongi angoothi ka nagina

Tarkeshwar Giri said...

Jamal ji kya aap ko sawalo ka jabab dena nahi aata hai kya.

Aapko Haridwar le kar ke jana hi padega.

Tarkeshwar Giri said...

Rishi Durvasha ji ne kab dhamki di thi.

मेरा देश मेरा धर्म said...

न मुसलमान गद्दार होता है न ही हिन्दू , एक स्वार्थी दानव जो मानव रूप में होता है वो ही देश का कौम का गद्दार होता है, अदि कोई मुझसे असहमत हो तो जरूर लिखे - forallover@gmail.com or http://meradeshmeradharm.blogspot.com/

zeashan zaidi said...

'Mera desh mera dharm' से सहमत!

Anonymous said...

@ न मुसलमान गद्दार होता है न ही हिन्दू , एक स्वार्थी दानव जो मानव रूप में होता है वो ही देश का कौम का गद्दार होता है, अदि कोई मुझसे असहमत हो तो जरूर लिखे - forallover@gmail.com or http://meradeshmeradharm.blogspot.com/

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मेरा देश मेरा धर्म , Aapne sahii kahaa, Lekin Dr Anvar kaa es blog ko chalaane kaa kyaa swaarth hai, Unkaa swaarth sabko pataa hai, Pahle to vo Saare Hindu God Ko Galat bolte hai, phir kahate hain ki "I am Hindu", Jabaki vo musalmaan hai, unkaa hindu god ke baare main kyaa kahne kaa hak, Ye unkaa kewal swaarth hi hai kii dosre dharm ko galat dikhana or apne dharm kii gungan karna, to iskaa matlab Dr Anvar Swaarthi hain
स्वार्थी दानव जो मानव रूप में होता है वो ही देश का कौम का गद्दार होता है,
@zeashan zaidi , bhii meri baat se sahmat honge

Raj

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय डॉ० अनवर जमाल साहब,

आदरणीय ब्लॉग पधारक परछिद्रान्वेषाभ्यासमग्नजनशिरोमणि नास्तिक्यभ्रमधुंधाच्छादित विकलहृदय क्षीणमनबलेन्द्रिय दुसाध्य वायरसयुक्त ब्लॉगरूपी ध्वस्त दुर्गस्वामी प्रश्नकलाविस्मृत सद्भाव वक्तव्य याचक प्रवीण जी

हा हा हा, यह संबोधन तो मजेदार रहा, मैं गया पेंटर के पास अपनी नेम प्लेट बनवाने, वह बोला " साहब, बना तो दूंगा पर यह इतनी लम्बी बनेगी कि आपके घर से डॉ० अनवर जमाल साहब के घर तक पहुंच जायेगी... खैर घर में तो न सही, समय मिलते ही अपने ब्लॉग पर जरूर आप द्वारा दी गई यह उपाधि डिस्प्ले करूंगा।


अब आते हैं आप की बात पर...

आप जनाब फरमाते हैं...

जो आप कह रहे हैं मैं कह दूंगा ।
लेकिन...
1- आपकी बात मानने से पहले मैं 3 बातों की गारण्टी चाहूंगा ।
उनमें सबसे पहली बात यह है कि आप मुझे यक़ीन दिलाएं कि यह प्रस्ताव सचमुच आपका ही है , किसी अन्य ने आपके नाम से नहीं भेजा है और जो कुछ आप मुझसे मानने के लिए कह रहे हैं ,आप स्वयं भी उसपर विश्वास रखते हैं।


देखिये मेरा पहले से ही अनुमान था कि आप शब्दजाल बुनोगे, उलजलूल बहस करोगे परंतु वह बात कभी नहीं कहोगे... और आप ने मुझे सही साबित कर दिया...

फिर भी अपनी बात रखूंगा... वह प्रस्ताव मेरा ही है किसी और का नहीं न ही किसी ने मेरे नाम से भेजा है... और मैं तहे दिल से यह मानता हूँ कि यदि कोई शख्स परोपकार भरा व न्यायपूर्ण जीवन जीये तो चाहे वह किसी धर्म या ईश्वर पर विश्वास करता हो या न हो... उसे किसी भी ताकत से डरने की जरूरत नहीं...

मैं अनीश्वरवादी हूँ अत: अपनी बात खत्म करता हूँ मार्कस आरीलियस के इस उद्धरण से, जो मुझे बहुत प्रिय है...

"Live a good life. If there are gods and they are just, then they will not care how devout you have been, but will welcome you based on the virtues you have lived by. If there are gods, but unjust, then you should not want to worship them. If there are no gods, then you will be gone, but will have lived a noble life that will live on in the memories of your loved ones. I am not afraid."

Marcus Aurelius,
Stoic philosopher and Roman Emperor during the 1st century CE.

So, Live a good life and don't be afraid !


जो पाठकगण इस वार्तालाप को समझने में दिक्कत महसूस कर रहें हैं वह कृपया यह पोस्ट और उस पर की गई मेरी टिप्पणी
अवश्य देखें, मामले को समझने के लिये...

zeashan zaidi said...

@ Raj Singh
राज साहब, मुझे विश्वास है की आपने पिछली टिप्पड़ी क्रोध में की थी वरना आपका ऐसा मतलब हरगिज़ न था की सारे मुसलमानों को गद्दार ठहरा दें, आपको लगा की अनवर साहब आपके धर्म पर ऊँगली उठा रहे हैं. लेकिन केवल धर्म के बारे में बहस करने पर किसी को गद्दार ठहरा देना तो मेरे विचार में न्यायेसंगत नहीं. ये तो शास्त्रार्थ है. और भारत में शास्त्रार्थ की मज़बूत परंपरा रही है. इस्लाम पर भी लोग ऊँगली उठाते हैं और हम उसका जवाब भी शांतिपूर्वक देते हैं. जहां तक मैंने अनवर साहब की पोस्टें पढी हैं तो उन्होंने किसी धर्म को बुरा नहीं कहा.

Mohammed Umar Kairanvi said...

जीशान जी से सहमत - धर्म के बारे में बहस करने पर किसी को गद्दार ठहरा देना तो मेरे विचार में न्यायेसंगत नहीं.

चमुपति said...

पैगेम्बर की तारीफ़

चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके

सदा बहार सजीला है रसूल मेरा
हो लाखपीर रसीला है रसूल मेरा
जहे जमाल छबीला है रसूल मेरा
रहीने इश्क रंगीला है रसूल मेरा

चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके

किसी की बिगड़ी बनाना है ब्याह कर लेंगे
बुझा चिराग जलाना है ब्याह कर लेंगे
किसी का रूप सुहाना है ब्याह कर लेंगे
किसी के पास खजाना है ब्याह कर लेंगे

चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
बलिहारीजाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके
चमुपति

Suresh Chiplunkar said...

Dear Mr. Pravin Shah ji
nice quote from your side, but where you posting this?
this blog writer should be able to understand proper english itself :)

Mr. Tarkeshwar has posted something nice on his blog about so called koran, one more blog is there named "harf-e-galat", kindly go through these blogs.

kunwarji's said...

"नकटे ही आज नाक वालों को नक्कू कह रहे हैं?"


samajh lo bas....
kunwar ji,

DR. ANWER JAMAL said...

@भाई प्रवीण जी , लीजिये आपके पेन्टर की चिन्ता दूर किये देते हैं ।
लेकिन न तो आपने मेरे द्वारा मांगी गयी जानकारी ही पूरी दी है और न ही यहां और यहां कुछ दिखाया है । आपने मेरी दुर्भावना के शिकार बने लोगों के नाम भी नहीं बताए हैं और नास्तिकों के कल्याण का पॉइन्ट और बढ़ा दिया । क्यों ?
पहले तो आप मुझसे केवल सभी धर्मों के मानने वालों के कल्याण की बात कहलवाना चाहते थे लेकिन अब नास्तिक और बढ़ा दिये । कल आप समलैंगिकों को और सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़ राधा मोहन की तरह रिलेशनशिप में रहने वालों को भी जोड़ लाएंगे । आप जो कहेंगे मैं कह दूंगा लेकिन पहले अपनी लिस्ट फ़ाइनल तो कर लीजिये और मुझे मांगी गयी सूचना पूरी दीजिये । यह शब्दजाल नहीं है मेरा मौलिक अधिकार है । सूचना तो अब सरकार तक देने को बाध्य है मेरी सरकार ।
अल्लाह अर्थात परमेश्वर आपको वह ज्ञान दे जो उसने धरती के सबसे अच्छे आदमियों को दिया है ।

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय डॉ० अनवर जमाल साहब,

आप भले ही मानें या न मानें, परंतु अपने धर्म को एकमात्र सही धर्म तथा अपने धर्मग्रंथ में वर्णित ईश्वर को ही एकमात्र उपास्य बता रहे हैं आप, वह भी दूसरे धर्म के उपास्यों को नीचा या अपने धर्म में वर्णित ईश्वर के आधीन दिखाकर... अब इस सब से दुर्भाव तो उत्पन्न होगा ही, लोगों की भावनायें आहत हो रही हैं यह तो आप अपने ब्लॉग पर हुई टिप्पणियों से ही समझ सकते हैं... मुझे उनके नाम गिनाने की आवश्यकता नहीं ।

मुझे अच्छा आदमी बनने के लिये किसी परमेश्वर के आशीर्वाद या कृपा की दरकार नहीं... मेरे लिये अपने जीवन मुल्यों पर ईमानदारी से चलने का प्रयास करते रहना ही काफी है... परंतु आपके लिये यह जरूर चाहूंगा कि अल्लाह अर्थात परमेश्वर यदि है तो उस से आपको धर्म की वह समझ मिले जो उसने धरती के सबसे समझदार आदमियों को बखशी है ।

अलविदा!