सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Wednesday, April 28, 2010

परमेश्वर के गुणों में भी साझीदार बनाना ‘बड़ा जु़ल्म‘ है । The Way to God .



परमेश्वर के सिवा किसी और की भक्ति-वन्दना करना तो दरकिनार , किसी को उसके गुणों में भी साझीदार बनाना ‘बड़ा जु़ल्म‘ है ।

( पवित्र कुरआन , 31, 13 )


जुल्म का वास्तविक अर्थ है , किसी चीज़ को उसकी असली और सही जगह के बजाय दूसरी जगह पर रखना । शिर्क यानि किसी को ईश्वर का साझीदार ठहराना इसीलिये जुल्म है कि बहुदेववादी भक्ति-वन्दना किसी अन्य की करता है जबकि इसका वास्तविक अधिकारी केवल परमेश्वर है । पवित्र कुरआन में जिन्न अर्थात अदृश्य जीवों और इनसानों की रचना का मक़सद और उनके जीवन का उद्देश्य ही यह बताया गया है कि वे परमेश्वर की भक्ति करने वाले नेक बन्दे बनें -


वमा ख़लक़तुल जिन्ना वल इन्सा इल्ला लिया‘अबुदून । ( पवित्र कुरआन , 51, 56 )


अर्थात हमने तो जिन्नों और इनसानों को केवल इसलिए पैदा किया कि वे मेरी बन्दगी करें यानि आज्ञापालन करें ।
जब पैदाइश की बुनियादी वजह यह ठहरी कि , तो यह कैसे सम्भव है कि उस दयालु पालनहार ने अपने बन्दों के लिए कोई रास्ता न बताया हो , और न ही कोई उस रास्ते का बताने वाला पैदा किया हो ?



इन दोनों में से पहले सवाल का जवाब तो यह है -


इन्नद्-दीन इन्दल्लाहिल-इस्लाम ।


( पवित्र कुरआन , 3 , 19 )


अर्थात हम तक पहुंचने का रास्ता इस्लाम है ।


यहां इस्लाम से तात्पर्य वह धर्म नहीं , जो आज समाज में इस्लाम कहलाता है बल्कि यह कहा गया है कि वह धर्म यानि मार्ग जो इनसान को परमेश्वर तक पहुंचाता है ,उसका नाम ‘इस्लाम‘ है । दूसरे लफ़्ज़ों में , वे सारे धर्म जो समय समय पर परमेश्वर की ओर से अवतरित हुए , उनमें से हरेक का नाम ‘इस्लाम‘ था ।


लेखक : मालिक राम
पुस्तक : इस्लामियात ( उर्दू ) पृष्ठ 16 का हिन्दी अनुवाद
प्रकाशक : मकतबा जामिया लिमिटेड , नई दिल्ली
जो आदमी जानना चाहे कि मालिक राम कौन थे ?
वह इस पते पर ईमेल करके मौलाना वहीदुद्दीन ख़ान साहब से पूछ सकता है ।



आप यहां से पवित्र कुरआन व अन्य सार्थक साहित्य मुफ्त या क़ीमत देकर मंगा सकते हैं ।
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माधुरी गुप्ता जी पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारी देते हुए धरी गईं 007 Indian Bond Madhuri Gupta

जब ऊंची शिक्षा पाने के लिए कोई मोटी रक़म लगाएगा तो वह उसे कई गुना वापस चाहेगा ही , ख़ास तौर से तब जबकि वह ऐसी फ़ैमिली बैकग्राउंड रखता हो जहां बच्चे की तालीम और परवरिश पर आये ख़र्च तक को लड़की पक्ष से ब्याज सहित वसूलने की परम्परा हो । जहां दौलत को बाक़ायदा ईश्वर की पत्नी का दर्जा दे दिया गया हो ।
... लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि प्यादों की बलि चढ़ा दी जाती है और मास्टर माइंड अपने राजनैतिक आक़ाओं के कारण बच निकलते हैं । काश ! इस बार ऐसा न हो । एक बात यह भी क़ाबिले ग़ौर है कि 1 - क्या एक माधुरी के पकड़े जाने के बाद अब सारे हिन्दुओं या सारे बनियों को उसी प्रकार शक की नजर से देखा जाएगा जैसे कि अगर माधुरी की जगह किसी मुस्लिम के पकड़े जाने पर किया जाता ?
2 - क्या अब मुसलमानों के अलावा अन्य समुदायों में भी देशद्रोहियों और आतंकवादियों की तलाश की जाएगी ?
3 - मुसलमानों को तो निशाने पर रखा गया और दूसरों की तरफ़ पर्याप्त तवज्जो न दी गयी जिसकी वजह से दौलत के पुजारी देश को बेहिचक बेचते रहे । क्या अब दौलत की हद से बढ़ी हुई हवस और मुसलमानों से बिला वजह नफ़रत को कम करने के लिए सरकार या समाज कुछ सोचेगा ?
देश और समाज को मजबूत बनाने के लिए हमें देश के ग़द्दारों को सिर्फ़ ग़द्दार के रूप में पहचानना होगा और अपने कुत्सित मक़सद के लिए बिला वजह मुसलमानों को बदनाम करने वालों के हौसले पस्त करने होंगे ।
अन्त में मैं कहना चाहूंगा कि कभी कभी भोले भाले आदमी को मक्कार आदमी फंसा भी देते हैं क्योंकि हमेशा चीज़े वैसी नहीं होती जैसी कि वे नज़र आती हैं ।
अभी कोई राय क़ायम न कीजिये । पहले जांच हो जाने दीजिए ताकि सच सामने आ जाये ,अगर दबा न दिया जाए तो .... ।

32 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

@ अमित जी ! आपने कहा - हमारे यहाँ सारे रूप उस एक ईश्वर के है. चलिए अब यूं समझिये कि मैं भी ईश्वर का रूप और उसका अंश हूँ .
जब मैं ईश्वर हूँ तो मेरी बात भी सत्य हुई लेकिन आप हैं कि मुझे ईश्वर मानने के बावजूद मेरी बात को नहीं मानते . जो आदमी किसी ऋषि या पैग़म्बर का अनुसरण नहीं करता वह ऐसे ही खुद भी confuse रहता है और दूसरों को भी करता रहता है और वह सच सामने आने के बाद भी बात को मान यूं नहीं सकता कि मेरे नवरतन जैसे साथियों में मेरी इज्ज़त ख़ाक में मिल जाएगी कि यह क्या, जिसे हमने संस्कृति का रक्षक समझा था वह तो हाजी नमाज़ी बन गया . क्यों ?

PARAM ARYA said...

बेटे ! न तो तेरे दिल है और न ही गुर्दा , फिर भी अड़ा पड़ा है . तू न तो सुरेश के बस का और न तू अमित के कब्जे का , तेरी खाट के पाए तो मेरा देश मेरा धर्म वाला काटता था या फिर अब त्यागी कटेगा . कालिमा पढ़ ले बच्चे तेरा अंत अर्थात तेरे ब्लॉग का अंत अब निकट है .

मनुज said...

माधुरी गुप्ता को तुरंत गोली से उड़ा देना चाहिए.
..लेकिन दिखावे के लिए नहीं,और ना ही मुसलमानों को रिझानें के लिए ही ...
आपने लिखा
"मुसलमानों से बिला वजह नफ़रत को कम करने के लिए सरकार या समाज कुछ सोचेगा ?"
डॉ साहब, वजह कम नहीं हैं, ये आप भी जानते हैं, और हम भी जानते हैं...और रही बात
"क्या एक माधुरी के पकड़े जाने के बाद अब सारे हिन्दुओं या सारे बनियों को उसी प्रकार शक की नजर से देखा जाएगा जैसे कि अगर माधुरी की जगह किसी मुस्लिम के पकड़े जाने पर किया जाता ?"
तो क्या किसी मुस्लिम के देश-विरोधी गतिविधी में पकडे जाने के एकाध ही केस हुए हैं, जो कि आम जन ने उनके खिलाफ राय कायम कर ली. और ये सिर्फ भारत की ही बात नहीं है कि मुसलमानों को शक की निगाह से देखा जाता है, लगभग पूरे विश्व में आपके तथाकथित "religion of peace" के अनुयाईयों को शक की निगाह से देखा जाता है...कृपया चिन्तन करें क्यों ऐसा है. पाञ्चजन्य के इसी संस्करण में "मुजफ्फर हुसैन" के लेख में इस पर विस्तार से चर्चा की गयी है, कृपया स्वयं देखें.
http://www.panchjanya.com/dynamic/modules.php?name=Content&pa=showpage&pid=375&page=35

मनुज said...

@परम आर्य,
ऐसे बेशर्म कमेंट्स देने से बाज़ आओ.
डॉ जमाल भले ही कुछ भी लिखते हों, पर उनकी भाषा गलीज नहीं होती.
आपको भी सभ्यता और शिष्टाचार वाली भाषा ही प्रयोग करनी चाहिए.

Mohammed Umar Kairanvi said...

यह बात मालिकराम ने कही इस लिये मान लेते हैं आप कहते तो भी मान लेते अच्‍छी बातें हमें मानना सिखाया गया है

गुरू जी panchjanya शायद आप शायद देख नहीं पाओगे मनुज भाई को उसे देखने की विधि भी लिखनी होगी मुझे फुरसत होगी तो आपको बताउंगा वैसे कम शब्‍दों में समझे तो अलग ढपली अलग राग है अखबारों की दुनिया में (फोंट का) हो सके तो आप भी panchjanya वाली वह पुरानी चीज कभी दिखा दो जो कभी मुझे दिखायी थी

फहमीदा रियाज said...

फहमीदा रीयाज
जमाल भाई आज मेरा दिल बडा उदास है,यह क्‍या हो रहा है, आपने पढी होगी खबर स्टार न्यूज, की सायमा 'सहर' हाँ न करने के कारण परेशान और जिन्‍होंने हाँ कर दी होगी चाहे वह शायर ही क्‍यूं न हो वह कितनी परेशान होंगी वह तो बस यही कहती होंगी ऐसी किताबों को ताक पे रख दो जो हमें तरक्‍की से रोकें.... हमारे बच्‍चा स्‍टार न्‍यूज का या कोई सी भी न्‍यूज के बास का हो हम तो नाम रखेंगे 'फरीद खान'

फहमीदा रीयाज said...

हम तो नाम रखेंगे 'फरीद खान'

जमाल भाई आज मेरा दिल बडा उदास है,यह क्‍या हो रहा है, आपने पढी होगी खबर स्टार न्यूज, की सायमा 'सहर' हाँ न करने के कारण परेशान और जिन्‍होंने हाँ कर दी होगी चाहे वह शायर ही क्‍यूं न हो वह कितनी परेशान होंगी वह तो बस यही कहती होंगी ऐसी किताबों को ताक पे रख दो जो हमें तरक्‍की से रोकें.... हमारे बच्‍चा स्‍टार न्‍यूज का या कोई सी भी न्‍यूज के बास का हो हम तो नाम रखेंगे 'फरीद खान'

फहमीदा रीयाज said...

जिन्‍होंने हाँ कर दी होगी चाहे वह शायर ही क्‍यूं न हो वह कितनी परेशान होंगी

जमाल भाई आज मेरा दिल बडा उदास है,यह क्‍या हो रहा है, आपने पढी होगी खबर स्टार न्यूज, की सायमा 'सहर' हाँ न करने के कारण परेशान और जिन्‍होंने हाँ कर दी होगी चाहे वह शायर ही क्‍यूं न हो वह कितनी परेशान होंगी वह तो बस यही कहती होंगी ऐसी किताबों को ताक पे रख दो जो हमें तरक्‍की से रोकें.... हमारे बच्‍चा स्‍टार न्‍यूज का या कोई सी भी न्‍यूज के बास का हो हम तो नाम रखेंगे 'फरीद खान'

Anonymous said...

ओ के

sahespuriya said...

POST का पहला हिस्सा तो माशाल्लाह ,
रही बात माधुरी मेडम की, कल जब ये न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ में चल रही थी तो दिल धड़क रहा था और यही दुआ कर रहा था या अल्लाह कोई अपना बेवकूफ़ ना हो, मगर जब तफ़सील सामने आई तो और अफ़सोस हुआ, इक औरत और वो भी कुँवारी, पढ़ी लिखी, इतने बड़े औहदे पर,
लेकिन अब भी कुछ ऐसा है जिसको छुपाया जा रहा है कोई तो है जिसे बचाया जा रहा है ?
कहाँ है औरतो की आज़ादी के अलंबरदार ?
देखना है फिर्दोस ख़ानम और उनके''भाई'' लोग अब अपनी बहन का डिफेन्स किस तरह से करते हैं?

sahespuriya said...

@ आप भी panchjanya वाली वह पुरानी चीज कभी दिखा दो जो कभी मुझे दिखायी थी.

नेकी और पूछ पूछ, ज़रा हमको भी तो पता चले हमरे ''देशप्रेमियो'' की हक़ीक़त.....

sahespuriya said...

संघ परिवार से तो हमें बहुत प्रेम है जिस तरह से उन्हे हमसे प्यार है उससे थोड़ा ज़्यादा...

मनुज said...

@सहसपुरिया
"रही बात माधुरी मेडम की, कल जब ये न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ में चल रही थी तो दिल धड़क रहा था और यही दुआ कर रहा था या अल्लाह कोई अपना बेवकूफ़ ना हो"

यही तो बात है. आपको क्यूँ लगा कि कोई अपना बेवकूफ न हो? क्यूँ खुद की कौम के देशप्रेम पर शक हुआ? जवाब आप खुद जानते हैं और वजहे भी हम खूब जानते हैं. एक सार्थक चिंतन की आवश्यकता है इस मुद्दे पर.

मनुज said...

इस देश के आम मुसलमानों का जो चरित्र है वो आम हिन्दुओ के चरित्र के अलहदा नहीं है. उनकी भी मुख्य समस्यायें भी वही हैं जो कि आम हिंदुओं की है - बेरोजगारी, भूख, भ्रष्ट-प्रशासन, भ्रष्ट-पुलिस इत्यादि.
लेकिन फिर भी एक फर्क है दोनों कौमों में - वो फर्क है attitude का यानी के समस्याओं के प्रति आपके रुख का.
हिंदू समाज जहां अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आगे की तरफ, भविष्य की तरफ रुख करते हैं तो वहीं मुस्लिम समाज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए १५०० साल पीछे मुढ कर देखता है.
और आग में घी डालने का काम करते हैं ये ज़ाकिर नाईक जैसे self-proclaimed विद्वान जो कि समस्याओं के सही और ठीक निराकरण के बजाए कुर'आन की मनमानी व्याख्याओं से मुस्लिमो को भ्रमित करते रहते हैं. (बात बात पर गला फाड़ कर फतवा देने वाले ये तथाकथित इस्लामी विद्वान "उलेमा" भी इसी श्रेणी में आते हैं ). ऐसे में जहां मुजफ्फर हुसैन, फिरदौस खान, तस्लीमा नसरीन,एम् जे अकबर जैसे कुछ प्रगतिवादी मुसलमान कुछ समाज सुधार का काम 'कुछ' हद तक करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें काफिर घोषित कर दिया जाता है.

मनुज said...

@Mohammed Umar Kairanvi
आप पाञ्चजन्य की वेबसाईट पर जाकर वहाँ इंस्टाल फॉण्ट आप्शन पर क्लिक करना, फिर फॉण्ट डाउनलोड करना, फिर फॉण्ट डाउनलोड करना, फिर वेब-ब्रोज़र को रिस्टार्ट करना, फिर वो वेब-पेज जिसका लिंक मैंने दिया है, उसको address-bar में पेस्ट करना...फिर वो लेख आपके सामने खुल जाएगा...

Mahak said...

@ मनुज

"क्या किसी मुस्लिम के देश-विरोधी गतिविधी में पकडे जाने के एकाध ही केस हुए हैं, जो कि आम जन ने उनके खिलाफ राय कायम कर ली. और ये सिर्फ भारत की ही बात नहीं है कि मुसलमानों को शक की निगाह से देखा जाता है, लगभग पूरे विश्व में आपके तथाकथित "religion of peace" के अनुयाईयों को शक की निगाह से देखा जाता है...
इस देश के आम मुसलमानों का जो चरित्र है वो आम हिन्दुओ के चरित्र के अलहदा नहीं है. उनकी भी मुख्य समस्यायें भी वही हैं जो कि आम हिंदुओं की है - बेरोजगारी, भूख, भ्रष्ट-प्रशासन, भ्रष्ट-पुलिस इत्यादि.
लेकिन फिर भी एक फर्क है दोनों कौमों में - वो फर्क है attitude का यानी के समस्याओं के प्रति आपके रुख का.
हिंदू समाज जहां अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आगे की तरफ, भविष्य की तरफ रुख करते हैं तो वहीं मुस्लिम समाज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए १५०० साल पीछे मुढ कर देखता है.
बात बात पर गला फाड़ कर फतवा देने वाले ये तथाकथित इस्लामी विद्वान "उलेमा" भी इसी श्रेणी में आते हैं . ऐसे में जहां मुजफ्फर हुसैन, फिरदौस खान, तस्लीमा नसरीन,एम् जे अकबर जैसे कुछ प्रगतिवादी मुसलमान कुछ समाज सुधार का काम 'कुछ' हद तक करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें काफिर घोषित कर दिया जाता है."




आपकी आज की बातों से पूर्णतया सहमत हूँ

Mahak said...
This comment has been removed by the author.
Dr. Ayaz ahmad said...

@मनुज जी सहसपूरया जी की सोच सही है क्योकि हमे हमारे गुनाहो के साथ आपके गुनाहो का हिसाब भी देना पड़ता है

Amit Sharma said...

जमाल साहब बिलकुल सही कहा आपने ईश्वर के गुणों में कोई भी साझीदार नहीं हो सकता है. क्योंकि ऐसा कुछ है ही नहीं जो उस सर्वव्यापी से व्याप्त ना हो. जो उससे अलग होगा तो उसका साझीदार बनने की कोशिश करेगा ना. लेकिन जीव कभी ईश्वर नहीं बन सकता इसको आप सिर्फ इतने से से भी समझ सकते है की, सागर की लहरें सागर का ही अंश होती है, मतलब सागर से ही लहर है, लेकिन लहरें सागर नहीं है. यह साफ़ है.
अब यहाँ जीव, ईश्वर के स्वरुप की चर्चा करेंगे तो कोई विशेष अर्थ नहीं है क्योंकि ईश्वर की उपासना के तरीके पे तो सहमती असहमति का कोई प्रश्न ही नहीं,जिसकी जो रूचि हो उसके मुताबिक उस परम सत्ता की उपासना करे, तो वह उसका धर्म है. कोई ईश्वर बोले,कोई अल्लहा बोले, कोई कैसे कोई कैसे .लेकिन यहाँ एक बात ध्यान देने की है की यह उपासना प्रलोभन से ना हो,किसी को पीड़ित करके ना हो,किसी को परवश करके ना हो .
किसी को पीड़ित करके ,लोभ से ,परवश करके किसी पद्दति में रूचि लेने के लिए कहा जाए तो ये अधर्म है. और शायद कोई भी बुद्धिमान प्राणी इस बात से असहमत नहीं होगा.

इस एक माधुरी को धुरी बनाकर सारी गुप्तचर व्यवस्था में छुपे भेदियों को पहचाना जा सकता है. इसको गोली मार देना तो काफी कम है, बल्कि इसकी पहचान से ओरों का भी पता लगा कर इनको ऐसी भयंकर सजा मिलनी चहिये की सारी मधुरिओं और मधुरों का कलेजा दहल उठे. कलेजा तो हम जनता का भी दहलना चाहिये, क्योंकि कहीं ना कहीं हम सभी जिम्मेवार है इस चीज के , कोई कम कोई ज्यादा.

sleem said...

अरे ये तो माधुरी गुप्ता भी लव इन जेहाद का शिकार हो गयी ही ही ही ही

Dr. Ayaz ahmad said...

मनुज जी आज मुसलमानो को सबसे बड़ी टैंशन आतंकवाद की है जब भी कोई केस होता है मुसलमानो की गिरफतारिया शुरू हो जाती है बाद मे वे सब अदालत से बरी हो जाते है मगर उस समय जो मीडिया शोर मचा रही होती है

Dr. Ayaz ahmad said...

वो मीडिया मुसलमानो के रिहा होने पर खामोश हो जाते है लेकिन इस बीच उन लोगो का धन समय और कॅरियर खराब हो जाता है इसलिए आतंकवादी घटनाओ से मुसलमानो को डर लगने लगा है कि पकड़ा तो हमने जाना है करे कोई भी जैसा कि पिछली घटनाओ मे आप देख भी चुके है

Dr. Ayaz ahmad said...

अब ये ठीक है हमारी कम जनसंखया से कम प्रतिनिधी होने के कारण हमारी आवाज ही नही उठ पाती और न ठीक से पैरवी हो पाती इस तरह आप लोगो के गुनाह भी हमारे सर मढ़ दिए जाते है और हम आतंकवाद की डबल भेँट चढ़ते है

Anonymous said...

अयाज़ जी आपने ठीक कहा यही काम हम ब्लागवाणी पर भी देख रहे है वहाँ जमाल जी की पोस्ट हिट होने के बावजूद हटा दी जाती है एक आदमी भी ढंग से जवाब देने वाला ये लोग सह नही पाते करते है बात सहनशीलता की

Mohammed Umar Kairanvi said...

जमाल साहब
यह सहसपुरिया फिर्दोस ख़ानम और उनके''भाई'' वाली क्या बात कह रहा है पहले यह यह बात लखनऊ की शान से सुनी थी यह चन्द्रमा तक कैसे गयी?

इसका कहना मानने में जल्दी मत करना उचित समय का इन्तज़ार किजिये

मनुज भाई के बताये तरीके पर अगर आप पाञ्चजन्य की वेबसाईट देख लेते हैं तो शरबती आँखों वाले के रेस्टोरेंट पर मुर्गा मेरी तरफ से


महक को कासमी साहब की किताब पढवानी पडेगी जिसमें साबित किया गया है कि कि हिन्दू धर्म अपने सब हल इसी धर्म जिसे यह 1500 बता रहे हैं की तरफ देखता है, असलम कासमी साहब की पब्लिश बुक 'हिन्दू राष्ट्र- सम्भव या असम्भव' में साबित किया गया है नया हिन्दू धर्म 80 प्रतिशत इस्लाम से लिया गया है
aslamqasmi.blogspot.com

मनुज said...

@महक
"आपकी आज की बातों से पूर्णतया सहमत हूँ"
आप मेरी बातों से कब सहमत नहीं थे कृपया बताएं.

@डॉ अयाज़ अहमद जी
"अब ये ठीक है हमारी कम जनसंखया से कम प्रतिनिधी होने के कारण हमारी आवाज ही नही उठ पाती और न ठीक से पैरवी हो पाती इस तरह आप लोगो के गुनाह भी हमारे सर मढ़ दिए जाते है और हम आतंकवाद की डबल भेँट चढ़ते है"
मुसलमानो की जनसंख्या और वो भी कम. मजाक तो नहीं कर रहे? आंकड़े उठाकर देखिये, सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा भारत की मुस्लिम आबादी का growth-rate क्या है? 29 % के growth-rate के साथ मुस्लिम भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कौम है.(अब ये मत कहने लगना कि ये सब दुसरे धर्मों से परिवर्तित हुए लोग हैं ). पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, बंगाल, उत्तर-पूर्व, में सैकड़ों जिले ऐसे है जहाँ मुस्लिम आबादी पचास प्रतिशत को पार कर गयी है. इस पर भी आपका ये कहना कि हम अल्पसंख्यक है इसलिए हमारी कोई नहीं सुनता, बस (मुझे क्षमा कीजिये), नमक-हरामी कहलायेगी.

@मोहम्मद उमर कैरानवी जी
"महक को कासमी साहब की किताब पढवानी पडेगी जिसमें साबित किया गया है कि कि हिन्दू धर्म अपने सब हल इसी धर्म जिसे यह 1500 बता रहे हैं की तरफ देखता है, असलम कासमी साहब की पब्लिश बुक 'हिन्दू राष्ट्र- सम्भव या असम्भव' में साबित किया गया है नया हिन्दू धर्म 80 प्रतिशत इस्लाम से लिया गया है"
हिंदू संस्कृति में कुछ भी नया या पुराना नहीं होता है. जो चलन में है, और जो सुविधाजनक होता है, वही प्रचलन में आ जाता है. इस बात से आम-हिंदू को कोई मतलब नहीं रहता कि क्या चीज़ कहाँ से ली गयी है. उदहारण के तौर पे, मैंने कहीं सुना था कि "परांठा" भारत में मुस्लमान लेकर आये थे और आलू पुर्तगाली. आज परांठा भारत के घर घर में बनता है, और आलू के बगैर भारतीय खाने की कल्पना भी नहीं कि जा सकती. लेकिन क्या आम हिंदू ये बात जानता भी है कि इन चीज़ों को लाने वाला कौन है?
विषयान्तर: भारत की प्राचीन हिंदू संस्कृति ने विश्व को क्या-क्या दिया है, इस पर भी पूरी किताब लिखी जा सकती है, और डॉ जमाल भी इस बात से अनभिज्ञ नहीं हैं, चाहे तो आप उनसे स्वयं पूछ लें.

"मनुज भाई के बताये तरीके पर अगर आप पाञ्चजन्य की वेबसाईट देख लेते हैं तो शरबती आँखों वाले के रेस्टोरेंट पर मुर्गा मेरी तरफ से "

क्षमा चाहूँगा कि एक स्टेप उसमे नहीं लिख पाया - फॉण्ट को डाउनलोड करने के बाद उसे c:\windows\fonts फोल्डर में कॉपी-पेस्ट कर दें..बाकी से स्टेप वैसे ही..पुनः प्रार्थना है कि उस लेख को अवश्य पढ़ें.

Info said...

Respected Jamal Sb.

A true description of GOD.
I too believe that there is none but one & only GOD and everybody should worship him only without any "VaiBhichar". This the only path leading to success. I want to write a shair in this regards for those who don't believe in one God or believe in many Gods and after death are brought before their true God :

Jo laut aayen to kuch kehna nahin
But dekhna unhen ghor se
Jinhe Manzilon par khabar hui
Ke woh rasta koi aur tha.

Zafar

आलोक मोहन said...

हम जो ये सकल दुनिया देखते है ,जिसमे धरती, चाँद, सितारे ,वनस्पति, जीव जंतु हम मनुष्य सब निवास करते है
इस बड़ी दुनिया में हमारा कौन सा स्थान है .क्या वजह है जिसके कारण कुछ खास है हम ||||
शरीर (body) के हिसाब से हम अन्य जीवो के मुकाबले कही नही ठहरते .... हम आम जानवर जैसे कुता से हम अपना मुकाबला करे , क्या हम उसे मुकाबले में तेज भाग सकते है,क्या उसके तरह हमारे दात पंजे तेज है.
नही ,फिर भी हम अपने घर में पालते है


हाथी से २-४ क्या १०-२० भी आदमी भिड जाए फिर भी उसका कुछ नही कर सकते .है उसके शरीर का कोई मुकाबला ..हम तो उसकी सवारी करते है
इसी तरह कोई भी जानवर घोडा गधा कोई आम जानवर
नही नही नही. किसी भी जानवर के मुकाबले हम कमजोर है

फिर हम सब पर अपना सिक्का चलाते है
परमात्मा ने मनुष्य को एक विशेष बुधि दी है जिसके कारण सब संभव है
बुदिदायक परमात्मा का और अपना स्थान हम भूलते जा रहे है

दुनिया में हर वस्तु जो हम इस्तेमाल करते है सब परमात्मा और हमने मिल कर बनायीं है
आप जिस घर में रहते है जरा उसके बारे में सोचिये घर में जो ईटे लगी है किसने बनायीं है
ईटे में जो मिटटी लगी है उसे परमात्मा ने बनाया है उस मिटटी से ईटे मनुष्य ने बनायीं है
पहला सामान उसका(परमात्मा) दूसरा काम हमारा
घर में जो दरवाजे है वो सब लकड़ी या लोहे के होते है .वो लकड़ी पेड़ से कटकर लायी जाती है उसको दरवाजो का रूप आदमी देता है
लोहा मूल रूप से भूमि में अयस्क के रूप में पाया जाता है मनुष्य उसको लोहे के रूप में ढालकर बहुत कुछ बनता है जैसे दरवाजे ,टला ,रेल ,पटरी ,हवाई जहाज आदि आदि
मूल लोहा परमात्मा का बनाया है फिर हम उसका उपयोग करते है
नंबर १ पर भगवान् की वस्तु और नंबर दो पर हम
हम जो अन्न खाते है वो अन्न खेतो में उगता है वो परमात्मा का बनाया है |
उस अन्न से हम भिन्न भिन्न पकवान बनाते है और सेहत बनाते है
यहाँ भी वो नंबर १ और हम २
इस तरह जो भी हम वस्तु इस्तेमाल करते है सब में परमात्मा से बनी है व् हम उसका प्रयोग करते है

इस तरह सब कुछ बनाए वाला भगववान है तो हमे उसका पूजन करना चाहिए और उसको धन्नवाद देना चाहिए

ये सब क्या कोई विज्ञानं बना सकती है नही ,वो सब मूल वस्तु का इस्तेमाल करती है
या ये सब किसी गुरु ने या किसी देवी देवता या किसी अवतार ने बनाया है
नही ना वो सब भी यहाँ आये है चले गए
सब इन्ही की पूजा में लगे है
इस तरह का आदमी जो खाता अपने पिता @परमपिता का हो और, नाम किसी और का जपता हो तो उसे क्या कहेगे आप

Dr. Ayaz ahmad said...

@मनुज भाई क्या प्रतिशत के साथ प्रतिनिधित्व भी बढ़ रहा है ये नही बताया आपने ये आँकड़े उसी तरह झूठे है जैसे मुसलमानो पर इल्ज़ाम झूठे है

मनुज said...

@डॉ अयाज़ अहमद जी
अब आप आंकड़ों को गलत ठहरा रहे हैं. मुझे तो इन आकडों में कुछ भी गलत नहीं लगता, और न ही मुझे लगता है कि किसी भी व्यक्ती जिसके आँख - कान खुले हों उसे कुछ भी गलत मालूम होगा. आस पास नज़र उठाईये, आप स्वयं देखेंगे कि "परिवार नियोजन" को ही गैर-इस्लामी ठहरा दिया जाता हो तो फिर आम मुस्लिम क्यूँकर जनसंख्या वृद्धी में contribute नहीं करेगा. एक व्यक्तिगत अनुभव बताना चाहूँगा कि मुझे आज तक कोई भी ऐसा मुस्लिम परिवार नहीं मिला जहां संतान की संख्या चार से कम हों.(ऐसे प्रगतिवादी मुस्लिम परिवार निश्चित रूप से होंगे जो कि परिवार नियोजन अपना कर अपने बच्चों का भविष्य सुखमय बनाने के पावन कार्य में लगे होंगे, पर मुझे नहीं मिले, ऐसा कहना मेरा प्रयोजन है).

और जहाँ तक प्रश्न है प्रतिनिधित्व का, मुझे नहीं लगता कि मुसलमानों को इससे ज्यादा प्रतिनिधित्व कहीं और मिलेगा.
आपकी सेवा में सदा उपस्थित रहने वाला मीडिया, जो कि गुजरात दंगो को बढ़ चढ कर दिखाता है, पर गोधरा को भूल जाता है, जो मोदी ने दंगों के दौरान कौनसे कर्त्तव्य नहीं निभाये, ये तो चीख-चीख कर बताता है, परन्तु मोदी ने जो गुजरात को भारत के विकास का मोडल बना दिया उस पर चुप्पी साध लेता है. जिसके लिए गाजा में मरने वाले मुसलमान अपने ही देश में शरणार्थी बनने को मजबूर कर दिए गए कश्मीरी हिन्दू ज़्यादा importance रखते हैं. जो ये तो दिखाता है कि मोदी ने अवैध कब्ज़ा कर बनाये गए मजार तो गिरा दिए, पर ये नहीं दिखाता कि उसी मोदी ने अवैध कब्ज़ा कर बनाये गए कितने ही हिन्दू मंदिर भी गिरवा दिए.
ऊपर से आपके लिए 24x7 रोने के लिए लालू, मुलायम, माया, वामपंथी, पवार, जैसे नेता मोजूद हैं.
आपके लिए करण जोहर और यश चोपड़ा जैसे फिल्मकार भी मोजूद हैं जिन्हें इस बात की चिंता अधिक है कि "अमेरिका में किसी मुसलमान को शक की निगाह से क्यूं देखा जाता है " बजाये इसके कि "ऑस्ट्रेलिया में क्यूँ भारतीयों पर हमले हो रहे हैं".
अब फिर कभी मत कहियेगा कि आपको सही प्रतिनिधित्व और स्वर नहीं मिला हुआ है.

विश्‍व गौरव said...

मनुज भाई अगली पोस्‍ट पर पधारो आपका जमकर स्‍वागत किया गया है

आस्तिक होने के लिए केवल ईश्वर का गुणगान करना ही काफ़ी नहीं है बल्कि उसकी बताई हुई ‘जीवन पद्धति‘ का पालन करना भी ज़रूरी है ।
Follow The Truth
http://vedquran.blogspot.com/2010/04/follow-truth.html

sahespuriya said...

@ UMAR SAHAB
जमाल साहब
यह सहसपुरिया फिर्दोस ख़ानम और उनके''भाई'' वाली क्या बात कह रहा है पहले यह यह बात लखनऊ की शान से सुनी थी यह चन्द्रमा तक कैसे गयी?

इसका कहना मानने में जल्दी मत करना उचित समय का इन्तज़ार किजिये.
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इज़्ज़त अफज़ाई का शुक्रिया, शायद हम इसी लायक़ है ? ये तो आपका बड़प्पन है कि तू तङाक ही की.
मगर ये क्या कम है की आपके लबो पर हमारा नाम तो आया...