सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Thursday, April 1, 2010

यह बात आज वे सभी लोग मानते हैं जो ईश्वर और धर्म में यक़ीन रखते हैं चाहे उनका मत , वतन और भाषा कुछ भी क्यों न हो ? Same truth .

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि प्रकृति की क्रियाएं बेहतरीन तरीके़ से सम्पन्न हो रही हैं और इसमें भी कोई सन्देह नहीं है कि प्रकृति में बुद्धि और योजना बनाने का गुण नहीं पाया जाता । जब प्रकृति में बुद्धि पायी नहीं जाती और प्रकृति के सारे काम हो रहे हैं बुद्धिमत्तापूर्ण तरीक़े से , तो पता यह चलता है है कि अगर बुद्धि प्रकृति के अन्दर नहीं पायी जाती तो फिर प्रकृति के बाहर तो ज़रूर ही मौजूद है । यही बुद्धिमान अस्तित्व पालनहार ईश्वर के नाम से जाना जाता है ।
जिन हक़ीक़तों को इनसान अपनी आंख से नहीं देख सकता उनका भी पता वह अपनी अक्ल के ज़रिये लगा लेता है । लेकिन यह अक्ल सही फ़ैसला केवल तब कर पाती है जबकि वह निष्पक्ष होकर विचार करे । अगर आदमी पक्षपात के साथ विचार करेगा तो फिर उसे सत्य तथ्य नज़र न आएंगे बल्कि फिर तो उसे वही कुछ दिखाई देगा जो धारणा उसने पहले से ही बना रखी होगी ।
इस जगत का कोई सृष्टा ज़रूर है ।
उसी सृष्टा को अलग अलग भाषाओं में ईश्वर , अल्लाह , खुदा , यहोवा , इक ओंकार और गॉड आदि हज़ारों नामों से जाना जाता है ।
अकल्पनीय सृष्टि के स्वामी का रूप भी अकल्पनीय है ।किसी चित्रकार में इतनी ताक़त नहीं है कि वह उसका चित्र बना सके ।किसी मूर्तिकार के बस में नहीं कि वह उस निराकार का आकार बना सके । जिसने भी जब कभी जो कुछ बनाया अपनी कल्पना से बनाया , अपनी तसल्ली के लिए बनाया।
सत्यस्वरूप शिव हरेक कल्पना से परे है ।

20 comments:

Jandunia said...

ईश्वर को लेकर बहुत सुंदर आलेख। ये सही है प्रकृति का कार्य निरंतर चल ही रहा है। सवाल हमेशा उठता रहा है कि प्रकृति को कौन सी शक्ति चला रही है। सभी ने यही कहा जो शक्ति संसार को चला रही है उसका नाम ईश्वर है। अक्ल पर आपने अच्छा लिखा है।

DR. ANWER JAMAL said...

@ Janduniya walo ! Apke vichar aur apki saralta bhi sunder hai .
Thanks .

Kaviraj said...

nice .

Dr. Ayaz ahmad said...

सच चाहे किसी भी ज़बान मे हो सच ही होता है लेकिन murkhलोग उसे देसी या विदेशी के तौर पर देखकर अपनाने का फैसला लेते है और घाटे मे रहते है

Mohammed Umar Kairanvi said...

ठीक कहते हैं आप 'सत्यस्वरूप शिव हरेक कल्पना से परे है।'

Aslam Qasmi said...

जिसने भी जब कभी जो कुछ बनाया अपनी कल्पना से बनाया , अपनी तसल्ली के लिए बनाया।

नन्‍दू गुजराती said...

डोकटर बाबू तुम एक ठण्‍डी पोस्‍ट मारता है एक गरम मारता है हमको पागल समझता है

Dr. Ayaz ahmad said...

अरे भाई समझने की कया ज़रुरत

sahespuriya said...

किसी चित्रकार में इतनी ताक़त नहीं है कि वह उसका चित्र बना सके ।किसी मूर्तिकार के बस में नहीं कि वह उस निराकार का आकार बना सके ।
BILKUL SACH,

Dr. Ayaz ahmad said...

आपकी POST लाजवाब है अनवर भाई

Dr. Ayaz ahmad said...

आपकी POST लाजवाब है अनवर भाई

मेरा देश मेरा धर्म said...

गुरूजी शिष्यवत करबद्ध प्रणाम !

हरी अनंत हरी कथा अनंता ||

कृपा करके इस वाक्य का अर्थ समझादिजिये.

waiting for your response please answer

EJAZ AHMAD IDREESI said...

सत्यस्वरूप शिव हरेक कल्पना से परे है ।

EJAZ AHMAD IDREESI said...

http://laraibhaqbat.blogspot.com/2010/04/blog-post_02.html

Amit Sharma said...

कोई भी उपासना पद्दत्ति प्रतिक पूजा से दूर नहीं है. चाहे फिर उसका कारण जो भी हो .

एक बार एक राजा ने मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए स्वामीजी से कोई ऐसा तर्क पेश करने को कहा जिससे वो मूर्ती पूजा को सही सिद्ध कर सके इस पर स्वामीजी ने राजा से उनके पिताजी की तस्वीर की और इशारा करते हुए कहा की आप इस तस्वीर पर थूक दीजिये तो राजा क्रोधित हो गए तब स्वामीजी ने कहा की ये तो एक कागज़ का टुकड़ा है आपके पिताजी तो नहीं हैं फिर आप क्रोधित क्यों हो रहे हैं तब राजा के बात समझ में आई की जिस प्रकार उसके पिता के प्रति उसका सम्मान और प्रेम उनकी अनुपस्थिति में अब उस तस्वीर से जुड़ गया है ठीक उसी प्रकार मूर्ती रूप में भक्त की भगवान् से आस्था जुडी होती है

मुस्लिम बंधु "हज़े-अस्वद " को चूमने का कारण बताते हुए कहते है की श्रीमोहम्मद साहब ने इसे चूमा था इसलिए हम इसे चूमते है , और कोई कारण नहीं है.
फिर जब उनसे पूछा जाता है की श्रीमोहम्मद साहब ने इसे क्यों चूमा था तो बताते है की उनसे पहले से ही काबा के लोग इसे चुमते आ रहे थे, इसीलिए उन्होंने लोगो की भावनाओ को बेवजह कष्ठ पहुँचाना उचित ना समझ कर इसे चूमा था.(बात कुछ हजम नहीं हुई- जो श्रीमोहम्मद साहब अपनी छड़ी से काबा के सारे बुतों को तोड़ डालते है,बिना लोगो की भावनाओ का ख्याल किये हुए.वे किस प्रकार सिर्फ "हज़े-अस्वद " को लोगो की भावनाओ का ख्याल करके चूम लेते है.)

DR. ANWER JAMAL said...

मेरा देश मेरा धर्म वालों ने मुझसे पूछा है कि
गुरूजी शिष्यवत करबद्ध प्रणाम !

हरी अनंत हरी कथा अनंता ||

कृपा करके इस वाक्य का अर्थ समझादिजिये.

waiting for your response please answer
पालनहार प्रभु का एक गुणवाचक नाम हरि भी है अर्थात अपने भक्तों के पाप और दुखों का हरण करने वाला । क्यों कि वह अपने पर आश्रित असंख्य जीवों के पाप और दुखों का हरण अनन्त विधियों से करता है इसलिये उस पालनहार प्रभु श्री हरि का गुणगान और उसके आदर्श भक्तों की कथाओं को अनन्त काल तक भी कहा जाये तो उसका हक़ अदा नहीं हो सकता ।
आपने आदेश दिया तो मैंने अति संक्षेप में आपके हुक्म की तामील करते हुए आपके आदरवश कुछ लिख दिया है वर्ना तो आप स्वयं ज्ञानी हैं । आपकी टिप्पणी पाना ही मेरे लिए सम्मान की बात है । स्वयं को शिष्य बताना भी आपके अन्दर के विनय को दर्शाता है । आपके वचनों के द्वारा भी वह पालनहार मेरे दिल के दुख को हरता है । आप भी उस महान प्रभु की अद्भुत योजना में प्रयुक्त हो रहे हैं । आप स्वयं में प्रभु पालनहार का वरदान हैं ।
अन्ततः ईश्वर एक है और नैतिकता के मानदण्ड अर्थात धर्म भी सदा से एक ही है । इसी सच्चाई को आज हमें पहचानना है । आइये , अपना फ़र्ज़ अदा करें ।

DR. ANWER JAMAL said...

Sabh hi bhaiyyon ka shukriya .

sleem said...

saale milawati khoon, gandee nalee ke keede ..mere ek bhi swal ka jawab de nahi paya or apne aap ko doctor kahata he???? chootiye toojhe poochha thaa ki toomahari aurate namaj kyo nahi padhai he....lwab diya??

sleem said...

mene kaha tha ki tere se naa to ugalte abnega naa nigalte....ye to abhi jhanki he makka me shiv ka bhvya mandir baaki he...

Aslam Qasmi said...

इदरीसी जी... कोनसे शिव की बात कर रहे हें ?वही जो भांग पीते थे ? दोस्त तुम ने बहुत गलत समझा
चे निस्बत ए खाक ब आसमान ए पाक