सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
Saturday, May 8, 2010
अजेय भारत के निर्माण के लिए... Unbeatable India
दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में देश के 76 फौजी मारे गए । ये सभी एक एन्टी माइन वाहन में बैठकर नक्सलियों के सफ़ाए के लिए जंगल की तरफ़ जा रहे थे । इनके वाहन को नक्सलियों ने ‘माइन’ से ही उड़ा दिया। इतनी मौतों के बाद ‘विशेषज्ञों’ ने बताया कि इन फ़ौजियों को इस तरह के जंगलो में ऐसे छापामारों से लड़ने के लिए प्रशिक्षित ही नहीं किया गया था ।
फ़ौजियो की लाशें उनके घरों को आने का सिलसिला शुरू हुआ। उनकी विधवाओं और उनके रिश्तेदारों को दहाड़े मार कर रोते हुए न्यूज़ चैनल्स और अखबारों ने दिखाया और यही मीडिया इसी दौरान यह भी दिखा रहा था कि देश का युवा वर्ग आई.पी.एल. क्रिकेट मैच देखने में मगन है और चौके - छक्कों पर चीयर लीडर्स मस्त नाच दिखा रही हैं। कुछ ही समय बाद पता चला कि नेता व्यापारी और सटोरिये भी चांदी-सोना काट रहे थे और नाच रहे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इन्हीं लोगों से चुनाव में होने वाले खर्च में ‘सहयोग’ लेते है और बदले में देश की जनता को इन्हें सौंप देते हैं।
वन्दे मातरम् गाने वाले ये ‘राष्ट्रवादी व्यापारी’ (?) आटा, दाल, चीनी, और दूध जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों की जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी करके नेताओं को अपने द्वारा दिये गए चन्दे से सौ गुना ज़्यादा वसूल करते हैं। नेता लोग कहते हैं कि अभी मंहगाई और बढ़ेगी। क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने मंहगाई बढ़ाने वालों का नमक खाया है और हमारे देश का आदमी ‘नमक हराम’ नहीं होता।
ग़रीब किसान महाजनों से सूद पर रकम लेते हैं और बदले में अपनी इज़्ज़त-आबरू के साथ अपनी जान भी दे देते हैं। अब तक देश के लगभग 2 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं जोकि पाक समर्थित आतंकवाद में मरने वालों की संख्या से कई गुना ज़्यादा हैं। ऐसे ही ग़रीबों-वंचितों के दिलों में निराशा और अवसाद और फिर आक्रोश पैदा होता है। समाज शस्त्र के नियम के अनुसार समस्या से ध्यान हटाने के लिए नेता लोग मनोरंजन के साधन बढ़ा देते हैं लेकिन मनोरंजन के साधन आए दिन ऐसी हिंसक फिल्में दिखाते हैं जिनमें जनता का शोषण करने वाले नेताओं की सामूहिक हत्या को समाधान के रूप में पेश किया जाता है। व्यवस्था और कानून से अपना हक़ और इन्साफ़ मिलते न देखकर हिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। इनकी समस्या के मूल में जाने के बजाय नेता लोग इसे इसलामी आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रवाद का नाम देकर अपनी राजनीति की रोटियां सेकने लगते हैं। व्यवस्था की रक्षा में फ़ौजी मारे जाते हैं और उनके आश्रित नौकरी और पेट्रोल पम्प आदि पाने के लिए बरसों भटकते रहते हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। देश की व्यवस्था को सम्हालने वाले तो उन लोगों की भी ख़बर नहीं लेते जिन्होंने देश का 70 हज़ार करोड़ रूपया विदेशों में जमा कर रखा है लेकिन सरकार उस मध्यवर्गीय क्लर्क की सैलरी से आयकर काटना नहीं भूलती जिसे अपने बच्चों की फ़ीस देना और उनका इलाज कराना तक भारी होता जा रहा है।
समस्याएं बहुत सी हैं लेकिन सारी समस्याओं का कारण अव्यवस्था है। यह ‘अव्यवस्था’ केवल इसलिए है कि व्यवस्था को चलाने वाले नेता और उन्हें चुनने वाली देश की जनता अधिकांशतः अपने फ़र्ज़ की अदायगी को लेकर ‘ईमानदार’ नहीं है।
जब उनके दिल में ‘ईमान’ ही नहीं है तो ईमानदारी आयेगी भी कैसे ?
ईमान क्या है ?
ईमान यह है कि आदमी जान ले कि सच्चे मालिक ने उसे इस दुनिया में जो शक्ति और साधन दिए हैं उनमें उसके साथ -साथ दूसरों का भी हक़ मुक़र्रर किया है। इस हक़ को अदा करना ही उसका क़र्ज़ है। फ़र्ज़ भी मुक़र्रर है और उसे अदा करने का तरीक़ा और हद भी। जो भी आदमी इस तरीक़े से हटेगा और अपनी हद से आगे बढ़ेगा। मालिक उस पर और उस जैसों पर अपना दण्ड लागू कर देगा। इक्का दुक्का अपवाद व्यक्तियों को छोड़ दीजिए तो आज हरेक आदमी बैचेनी और दहशत में जी रहा है। हरेक को अपनी सलामती ख़तरे में नज़र आ रही है।
सलामती केवल इस्लाम दे सकता है
लेकिन कब ?
सिर्फ़ तब जबकि इसे सिर्फ़ मुसलमानों का मत न समझा जाए बल्कि इसे अपने मालिक द्वारा अवतरित धर्म समझकर अपनाया जाए। इसके लिए सभी को पक्षपात और संकीर्णता से ऊपर उठना होगा और तभी हम अजेय भारत का निर्माण कर सकेंगे जो सारे विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखाएगा और सचमुच विश्व गुरू कहलायेगा।
फ़ौजियो की लाशें उनके घरों को आने का सिलसिला शुरू हुआ। उनकी विधवाओं और उनके रिश्तेदारों को दहाड़े मार कर रोते हुए न्यूज़ चैनल्स और अखबारों ने दिखाया और यही मीडिया इसी दौरान यह भी दिखा रहा था कि देश का युवा वर्ग आई.पी.एल. क्रिकेट मैच देखने में मगन है और चौके - छक्कों पर चीयर लीडर्स मस्त नाच दिखा रही हैं। कुछ ही समय बाद पता चला कि नेता व्यापारी और सटोरिये भी चांदी-सोना काट रहे थे और नाच रहे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इन्हीं लोगों से चुनाव में होने वाले खर्च में ‘सहयोग’ लेते है और बदले में देश की जनता को इन्हें सौंप देते हैं।
वन्दे मातरम् गाने वाले ये ‘राष्ट्रवादी व्यापारी’ (?) आटा, दाल, चीनी, और दूध जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों की जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी करके नेताओं को अपने द्वारा दिये गए चन्दे से सौ गुना ज़्यादा वसूल करते हैं। नेता लोग कहते हैं कि अभी मंहगाई और बढ़ेगी। क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने मंहगाई बढ़ाने वालों का नमक खाया है और हमारे देश का आदमी ‘नमक हराम’ नहीं होता।
ग़रीब किसान महाजनों से सूद पर रकम लेते हैं और बदले में अपनी इज़्ज़त-आबरू के साथ अपनी जान भी दे देते हैं। अब तक देश के लगभग 2 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं जोकि पाक समर्थित आतंकवाद में मरने वालों की संख्या से कई गुना ज़्यादा हैं। ऐसे ही ग़रीबों-वंचितों के दिलों में निराशा और अवसाद और फिर आक्रोश पैदा होता है। समाज शस्त्र के नियम के अनुसार समस्या से ध्यान हटाने के लिए नेता लोग मनोरंजन के साधन बढ़ा देते हैं लेकिन मनोरंजन के साधन आए दिन ऐसी हिंसक फिल्में दिखाते हैं जिनमें जनता का शोषण करने वाले नेताओं की सामूहिक हत्या को समाधान के रूप में पेश किया जाता है। व्यवस्था और कानून से अपना हक़ और इन्साफ़ मिलते न देखकर हिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। इनकी समस्या के मूल में जाने के बजाय नेता लोग इसे इसलामी आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रवाद का नाम देकर अपनी राजनीति की रोटियां सेकने लगते हैं। व्यवस्था की रक्षा में फ़ौजी मारे जाते हैं और उनके आश्रित नौकरी और पेट्रोल पम्प आदि पाने के लिए बरसों भटकते रहते हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। देश की व्यवस्था को सम्हालने वाले तो उन लोगों की भी ख़बर नहीं लेते जिन्होंने देश का 70 हज़ार करोड़ रूपया विदेशों में जमा कर रखा है लेकिन सरकार उस मध्यवर्गीय क्लर्क की सैलरी से आयकर काटना नहीं भूलती जिसे अपने बच्चों की फ़ीस देना और उनका इलाज कराना तक भारी होता जा रहा है।
समस्याएं बहुत सी हैं लेकिन सारी समस्याओं का कारण अव्यवस्था है। यह ‘अव्यवस्था’ केवल इसलिए है कि व्यवस्था को चलाने वाले नेता और उन्हें चुनने वाली देश की जनता अधिकांशतः अपने फ़र्ज़ की अदायगी को लेकर ‘ईमानदार’ नहीं है।
जब उनके दिल में ‘ईमान’ ही नहीं है तो ईमानदारी आयेगी भी कैसे ?
ईमान क्या है ?
ईमान यह है कि आदमी जान ले कि सच्चे मालिक ने उसे इस दुनिया में जो शक्ति और साधन दिए हैं उनमें उसके साथ -साथ दूसरों का भी हक़ मुक़र्रर किया है। इस हक़ को अदा करना ही उसका क़र्ज़ है। फ़र्ज़ भी मुक़र्रर है और उसे अदा करने का तरीक़ा और हद भी। जो भी आदमी इस तरीक़े से हटेगा और अपनी हद से आगे बढ़ेगा। मालिक उस पर और उस जैसों पर अपना दण्ड लागू कर देगा। इक्का दुक्का अपवाद व्यक्तियों को छोड़ दीजिए तो आज हरेक आदमी बैचेनी और दहशत में जी रहा है। हरेक को अपनी सलामती ख़तरे में नज़र आ रही है।
सलामती केवल इस्लाम दे सकता है
लेकिन कब ?
सिर्फ़ तब जबकि इसे सिर्फ़ मुसलमानों का मत न समझा जाए बल्कि इसे अपने मालिक द्वारा अवतरित धर्म समझकर अपनाया जाए। इसके लिए सभी को पक्षपात और संकीर्णता से ऊपर उठना होगा और तभी हम अजेय भारत का निर्माण कर सकेंगे जो सारे विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखाएगा और सचमुच विश्व गुरू कहलायेगा।
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53 comments:
फ़ौजियो की लाशें उनके घरों को आने का सिलसिला शुरू हुआ। उनकी विधवाओं और उनके रिश्तेदारों को दहाड़े मार कर रोते हुए न्यूज़ चैनल्स और अखबारों ने दिखाया और यही मीडिया इसी दौरान यह भी दिखा रहा था कि देश का युवा वर्ग आई.पी.एल. क्रिकेट मैच देखने में मगन है और चौके - छक्कों पर चीयर लीडर्स मस्त नाच दिखा रही हैं। कुछ ही समय बाद पता चला कि नेता व्यापारी और सटोरिये भी चांदी-सोना काट रहे थे और नाच रहे थे..
समस्याएं बहुत सी हैं लेकिन सारी समस्याओं का कारण अव्यवस्था है। यह ‘अव्यवस्था’ केवल इसलिए है कि व्यवस्था को चलाने वाले नेता और उन्हें चुनने वाली देश की जनता अधिकांशतः अपने फ़र्ज़ की अदायगी को लेकर ‘ईमानदार’ नहीं है।
जब उनके दिल में ‘ईमान’ ही नहीं है तो ईमानदारी आयेगी भी कैसे ?
सलामती केवल इस्लाम दे सकता है
लेकिन कब ?
सिर्फ़ तब जबकि इसे सिर्फ़ मुसलमानों का मत न समझा जाए बल्कि इसे अपने मालिक द्वारा अवतरित धर्म समझकर अपनाया जाए। इसके लिए सभी को पक्षपात और संकीर्णता से ऊपर उठना होगा और तभी हम अजेय भारत का निर्माण कर सकेंगे जो सारे विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखाएगा और सचमुच विश्व गुरू कहलायेगा...
सलामती केवल ईमान सकता है .... ईईईईईईईईमान
ये कैसे सुनिश्चित किया जाय की इस्लाम अनुसरण करने वाला ईमानदार व्यक्ति ही है
इसाई भी तो ईमानदार होते हैं और सिक्ख धर्म भी तो ईमानदार होते हैं
शुरुआत से लेकर अन्तिम दो पैराग्राफ़ पहले तक लेख अच्छा है, विचार अच्छे हैं, व्यवस्था के प्रति आक्रोश सही है। लेकिन अन्तिम पैराग्राफ़ आते-आते आप फ़िर से अपनी "औकात" पर आ गये और अच्छे खासे लेख का गुड़गोबर कर दिया।
यही बात मैं आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि जैसे ही कोई भी अपने लेख में "इस्लाम" का प्रचार करने की कोशिश करेगा, तत्काल उसकी नीयत पर शक किया जायेगा…। चाहे कैरानवी हों, सलीम हों या आप हों… कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अच्छा लिख भी सकते हो, लेकिन जैसे ही आप लोग विभिन्न इस्लामी प्रचार लिंक, पुस्तकों के लिंक, हर बात को इस्लाम से जोड़ना आदि शुरु कर देते हो… पाठक बिदकने लगते हैं, नाक पर रुमाल रखकर निकल लेते हैं, कई लोग इसी वजह से आप लोगों से चिढ़ने लगे हैं।
हम तो कभी नहीं कहते कि गीता पढ़ो, फ़लाँ ग्रन्थ का लिंक यहाँ है, हिन्दू धर्म में आओ आदि-आदि, लेकिन आप लोगों के साथ "इस्लाम का प्रचार" यही एक मुख्य समस्या है, जिसकी वजह से पूरे हिन्दी ब्लॉग जगत में आप जैसों के ब्लॉग से लोग बिदकते हैं और आपकी निगेटिव "इमेज" बन गई है।
इस पोस्ट में भी आपने राष्ट्रीय सरोकार के मुद्दों में भी ईमान के बहाने इस्लाम को जोड़ दिया… बकवास की हद है ये तो…। क्या बाकी के धर्म बेईमानी सिखाते हैं? या सूडान से पाकिस्तान तक सभी इस्लामी देश ईमानदारी के पुतले हैं? थोड़ा तो दिमाग से लिखो…
aor kiya hindu imandar nahi hota soyam se kiyon miyan mitthu bn rahe ho ,,,, ham bhi muh men zubaan rakhte hen,,,
Suresh Chiplunkar Ji ne BAhut achhi baat likhi,
Jaise KUTE kii DUM seeddhi nahi ho saktii, waise hi ISLAM manene walo kii DUM bhii seedhii nahi ho saktii,
Enko har baat mein ISLAM najar aata hain, GAAND dhone mein bhii ye ALLAH bolte honge
Anvar ko Faujiyo kii maute se jyadaa ISLAM kii chinta hain
SUVAR Kahiinka
Thanks
--TERA BAAP---
Anvar tum ye des prem kii chintaa kaa jhoota dhhong chhod do, Ye baaten GADDHAR musalmaan ke muh se jhooti lagatii hain
Musalmaano ka ISLAM ke alawa aur kishii kii chintaa nahi hotii, Begunaah logo ko maro, kato, Yahi QURAN kii pahachaan hain "KHOONI KITAB"
@सुरेश चिपलूनकर - वेद रामायण से सम्बन्धित ब्लाग पर जाकर किसी मुसलमान ने आज तक न तो उनकी नीयत पर शक जाहिर किया और न ही अपनी नाक पर रूमाल रखने का किक्र किया आप भी उनसे यह गुण सीख कर अपनी गन्दी मानसिकता को स्वच्छ बना सकते हैं अब यह आपके ऊपर है कि आप चाहें तो यह गुण कैरानवी से सीख लें या सलीम खान से या फिर अनवर जमाल से और मैं भी बुरा नहीं हूँ
@गौरव जी जो भी ईमानदार होगा उसके दिल में इसलाम जरूर होगा चाहे वह इसलाम का नाम वह अपनी भाषा में कुछ और ही क्यूं न लेता हो प्रचीनकाल में कुरआनी धर्म को ही वैदिक धर्म कहा जाता था वैदिक धर्म तो लुप्त हो गया लेकिन कुरआनी धर्म आज भी साक्षात है अपने कल्याण के लिये सत्य को स्वीकार किजिये
मिस्टर Anonymous हिन्दू तो सद गुणों की खान होते हैं और आर्य समाजी बदजबान होते हैं अब यह बता तू अग्णिवेष का चेला है या राजिन्द्र जिज्ञासु का?
वन्दे मातरम् गाने वाले ये ‘राष्ट्रवादी व्यापारी’ (?) आटा, दाल, चीनी, और दूध जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों की जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी करके नेताओं को अपने द्वारा दिये गए चन्दे से सौ गुना ज़्यादा वसूल करते हैं। नेता लोग कहते हैं कि अभी मंहगाई और बढ़ेगी। क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने मंहगाई बढ़ाने वालों का नमक खाया है और हमारे देश का आदमी ‘नमक हराम’ नहीं होता।
डा० साहब सलाम क़बूल कीजिए.
रही बात आपके लेख की.....
तो जी हमारी राय में तो देशप्रेम का ठेका तो ''कुछ '' ही लोगो के पास है, आप कितना भी लिख लिख कर अपने आप को देशप्रेमी साबित करें, मगर जब तक इनकी मर्ज़ी ना होगी, आपको सर्टिफिकेट नही मिलेगा.....
अजी आप ही क्या......
किसी भी मुसलमान को नही मिलेगा...
देशप्रेमी बनने के लिए सबसे पहले ढोंग रचाना सीखिए.
अब आप कहेंगे कैसा ढोंग ?
सुनिए सबसे पहले तो '' इस्लामी आतंकवाद'' से सबको डराएँ.
दूसरे मुसलमानो को गाली दीजिए, हर समस्या के लिए उनको ज़िम्मेदार बताएँ, यहाँ तक की महगाई के लिए भी....
तीसरे कुछ ''ब्रॅंडेड चीज़ो '' का प्रचार कीजिए मगर पहले देशप्रेम के ठेकेदारो से इजाज़त ले लें.
कुछ नुस्खे और हैं . इन सब को आज़मा कर इक ''सच्चा देशप्रेमी'' बना जाता है.
फिर आप को इजाज़त है
जमाखोरी कीजिए,
देश की गुप्त जानकारी बेचिये.
लोगो का हक खाइये.
रिश्वत लीजिए.
स्विस बॅंको में खाते खोलिए.
दंगे करवाएँ
लूट मचाएँ
अजी जो दिल में आए करे अब आपको कोई कुछ भी कहने हिम्मत नही करेगा
क्यूंकी आअपके पास होगा हज़ारो का आज़माया हुआ सबका प्यारा ब्रांड '' देशप्रेम''
@Dr. Sahab
लो जी हमसे तो वोट देने का अधिकार भी छीन लिया गया है शायद ........
कई बार कोशिश की मगर आपको वोट नही दे पाया.
क्यूँ ??????????????
नक्सलियों ने फिर किया सीआरपीएफ पर हमला
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ)की एक गाड़ी को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया। पुलिस क
े अनुसार इस हमले में सात जवान शहीद हो गए और 10 घायल हो गए। एक महीने पहले भी 6 अप्रैल को दंतेवाड़ा जिले में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों समेत 76 जवान शहीद हो गए थे।
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अब क्या कहें ??????
बस अफ़सोस ही कर सकते है......................
वाह अनवर साहब आपने तो इन लोगो की कथित राष्ट्रवाद की दुकान ही बंद कर दी
अबे नाम के राष्ट्रवादीयो तुम मुसलमानो से ऐसी नफरत क्यो करते हो? जैसी नफरत नाजायज़ औलाद अपने बाप के नाम से करती है ।कहीं मामला लव इन जेहाद वाला तो नही?
कुछ लोगों की 'इस्लाम' नाम ही से ढीली हो जाती है.
बाद ब्लॉग खोला तो आप नज़र आए ,श्री आनन्द जी ने आप की समसियाओं का समाधान किया हे ,मुझे अच्छा नहीं लगता की उस बात पर टिपण्णी करूँ जिस पर उन्हों ने हाथ जोड़ कर चुप रहने को कहा हे ,परन्तु सोचता हूँ की सच को छुपाने वाला भी गुनाहगार हे ,इस लिए मुआफी के साथ कुछ बातें,,,श्री आनन्द जी ने स्वय ही माना हे की इन धर्म पुस्तकों में छेड़ छाड़ हुयी हे , अब कहने को तो कुछ रहता नहीं परन्तु अफ़सोस हे की उनहों ने फिर भी गलत को सही ठहरने का पर्यास किया हे ,किया वह बताएगें की वर्ण व्यवस्था स्वयं मनुष्य के शरीर में हे तो बाहर समाज में क्यों फेली हुयी हे ,ओर अगर विधवा को सती उस के योन शोषण के भय से किया जा ता था ,तो क्या उस समय का हिन्दू इतना बुजदिल था ,जो बहुसंख्यक होकर भी अपने सामने अपनी विधवाओं को शोषण के लिए किसी को भी लेजाने देताथा,ओर वह शोशनकर्ता कोन थे जो केवल विधवाओं को ही उठाते थे,ओर कुवारियों को ताक़तवर होते हुए भी छोड़ जाते थे ,यह अपने गुनाह का इलज़ाम दूसरों को देना हे ,एक बार राष्ट्रपति महोदया ने कहा था कि पर्दा पर्था हिदुओं में उन मुग़ल शहजादों के कारण आई जो बहु बेटियों को उठालेजाते थे ,मेरा प्रश्न यह हे कि जिन शहजादों के सामने बड़े बड़े दुर्ग आड़ नहीं
http://aslamqasmi.blogspot.com/2010/05/blog-post.html
डा.जमाल आप बार बार हर सम्शया का हल इस्लामी जीवन पद्त्ती से निकलना चाहते हे ,लेकिन क्यों ?यंहा बात आती हे इमानदारी की ना की किसी के धरम और रास्ट्र के पार्टी दर्स्ती कोण की ?क्या भारत ने इतनी उनती की हे वो इस्लामिक जीवन पड़ती से की हे क्या ??आप उनती को भी तो देखो |किसी भी इस्लामिक रास्ट्र से वर्षो आगे हे भारत ,बात आती हे यंहा बेईमान पिसू जेसे घटिया नेतावो की ,हराम की ओलादे पैदा करने वाले रिश्वत खोर बड़े अफसरों की ...ये हराम की कमाई खा के बड़ी होने वाली पब कल्चर की ओलादो को दंतेवाडा जेसे कांड पर कोई अफ़सोस नहीं होता हे और ये गंदगी एक दिन अपने बूढ़े माँ को घर से बाहर निकल देती हे जो की रिश्वत की खाते खाते बूढ़े हुवे हे ?भाई जब आपको पता हे की राजनितिक पार्टिया ऐसा कतरी हे तो आप वोटो में बढ़ चढ़ कर भाग क्यों लेते हो ?एक विशेष पार्टी के कारण देश का ये हाल हुआ हे और आप इतने ही रास्ट्र प्रेमी हो तो उस घटिया पार्टी को एक मुश्त वोट क्यों देने पर मरे जाते हो ?बहिष्कार करो उसका ?खुले आम निंदा करो उसकी ?नहीं करोगे ना ?क्योकि वो आप का पोषण करती हे ?वो आप को विशेष धिकार देती हे ?वो आप को कोछ भी करने की छूट देती ?अब आपका ईमान कान्हा गया ?
पैगम्बर मोहमद(paigambar mohammad )का पेट या इतर का कारखाना
http://quranved.blogspot.com/
ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ah aha haha ha ah aha ha ha aha ha aha h.....................
दो तीन दिनों से बोलती बंद क्यों हे मान के सामने ?
@Nitin Tyagi
उनके बारे में आपका क्या विचार है जो लोग रास्ता चलते वीर्य टपकाया करते थे. और वह वीर्य घड़े में गिरकर सुन्दर कन्या बन जाता था. और जब वहाँ हल चलाया जाता था तो वह सुन्दर कन्या प्रकट भी हो जाती थी.
ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ah aha haha ha ah aha ha ha aha ha aha h..................
@मान जी आप कब तक दिवालीया साबित हो चुके हिंदु कल्चर के लिए सच्चाई को नकारते रहेंगे ।आज और हमेशा से इस्लाम का सच जगजाहिर रहा है इसे नकारना बवकूफ़ी है
डा.अयाज, कोनसा कल्चर दिवालिया हे आप खुद भी जानते हे ,जन्हा दुनिया के सभी गैर इस्लामिक हवाई अड्डो पर थोडा सा भी इस्लामिक नजर आने पर नंगे करके तलाशी ली जाती हे ,जार्ज फ़्रन्दिएस की इसी कारण अमेरिका के न्यू योर्क हवाई अड्डे पर नंगा किया गया की ये मुस्लिम हे(जबकि वो था नहीं ) ????????????????अब आप ही बताये कोनसा कल्चर दिवालिया हे ?ज्यादा मूह नहीं खोलूँगा
।आज और हमेशा से इस्लाम का सच जगजाहिर रहा है इसे नकारना बवकूफ़ी ..............सही हे डा .इसके सच को नकारना बेवकूफी हे ,.......... स्वामी विवेकानन्द
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।
कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३
@मान ! किस दल को सत्ता मे लाना चाहिए क्या उस दल के सरकार मे रहते महँगाई नही बढ़ी, आतंकियो को कंधार नही पहुँचाया गया? क्या उसने कश्मीर से अपने वादे के मुताबिक धारा 370 हटाई? उसने आम हिंदु का क्या भला किया? गौमांस का export उसने पिछली सरकार के मुकाबले दुगुना क्यो कराया ?
ayaj da. mere us coment ka to jvab de dete aap .....un dono comento ka ...please ????dal to sabhi dal dal he ye abhi he jo jyaada badoboo daar he in per bad me baat karenge
@मान आपका ये कथन खुद आपकी ना समझी का प्रतीक है क्योकि विवेकानंद जी ने भी इस्लाम की महानता को माना है जिसे आप इसी ब्लाग पर देख सकते है। R.K.राव की किताब भी आपका भ्रम दूर कर देगी islaminhindi.blogspot.com पर
आज और हमेशा से इस्लाम का सच जगजाहिर रहा है इसे नकारना बवकूफ़ी है........सही हे डा .इसके सच को नकारना बेवकूफी हे ,........
बाबा साहब भीम राव अंबेडकर
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१ ....do. ab bhi koochh kahoge ...जवाब देना डा.
@नितिन त्यागी ऋषि व्यास के शरीर की बदबू मेल कुचैल और बैढंगेपन से डर कर अम्बिका ने नियोग के लिए अपनी एक दासी को उनके पास भेज दिया था। क्या आपको पता है
@मान विवेकानंद की बात पर सोचो।
vedas are worthless books-डा बाबा साहब अम्बेडकर राइटिँग एंड स्पीचीज़ (खंड 3 पेज 8)
@मान जी क्या आप अम्बेडकर जी के इस कथन से सहमत है।
डॉ विवेकनद ने सही कहा हे .जो भी मेने यंहा कमेन्ट में डाला हे ,,,लकिन आप आंबेडकर वाली बात पर चक्कर घिन्नी खा गए हे ,...में आप से पूछ ता हूँ की आप कह दे की उन्होंने सही कहा हे या गलत कहा हे .....और नमूना देखिये अपने ही भाई का
&&&&&&&
zeashan zaidi said...
@Man
इस्लाम और मुसलमान दो अलग अलग चीज़ें हैं. इस्लाम नाम है कानूनों का और मुसलमान नाम है उसका जो उन कानूनों का पालन करता है. ये ज़रूरी नहीं की हर मुसलमान इस्लाम के सभी कानूनों का पालन करे इसलिए क्योंकि मानवीय कमजोरियां उसमें भी पाई जाती हैं. एक दूसरे से असमानता का व्यवहार और अपने को दूसरे मुसलमानों से श्रेष्ठ समझना इन्हीं मानवीय कमजोरियों का फल है....pichhhalee post ka coment
डॉ.अयाज अहमद फिर इस्लाम में स्पेशल तो वो ही चीजे रह जाती जीस कारणों से वो कुख्यात हे ???????
बिलकूल ऐसा उन्होंने कहा होगा ....लकिन इन्सान की पवर्ती की बात जंहा आती हे उन्होंने उसी पर्वती को मुस्लिमो के संधर्भ यंहा परकट किया हे ,की बब्ब्बर पर्वती .....आप इसे मानते हो अयाज अहमद ?????????
@impact
घड़े में वीर्य टपका तेरे अब्बा ने तुझे पैदा किया है, जभी तू बार -२ ये सब लिखता है क्या ?
हिंसा +सेक्स +गंदगी =इस्लाम
jnab bhaai jaan aadaab ajay bhaart kaa nirmaan aap ko hemn hmaare saathiyo ko hi mikr krnaa he netaa afsr or akhbaar to bs kyaa kr rhe hen sbko ptaa he to dosto bhaaiyon ke saath milkr hm aaj se hi bhaarat ko ajay or nvnirmit aadhunikbnaane ki koshishen shuru kr den . akhtar khan akela kota rajasthan
salaam bhai anwer aapki desh ke prati bhavna ki hum qadr karte hain.its really has been a excellent post.aur beshak aap ek achhi disha main kaaam kar rahe hain.aur jo log aapse bure shabdo ka prayog karke apna status dikha rahe hain unhe pls maaf kijiye kyunke yehi satya hai ki wo sab jo aapki ninda karne main lage huve hai wo sab k sab baat aap hi ki mante hai.congrats good work.
@ Slave ! I don't mind like these filthy people .Thanks .
@Nitin Tyagi
तुझे तो अपने ही इतिहास का पता नहीं. कभी सीता माता के जन्म की कहानी पढ़ी है?
सुरेश जी मनुज ने कहा था कि बाल ठाकरे भी गिलानी की तरह देश का गददार है और आप इसके अनुचर है क्या हमने कभी आप पर शक जाहिर किया ? फिर आप मात्र इस्लाम की बात बताने पर ही क्यो एक मुसलमान पर शक करने लगते है?
@impact
मैंने तो पढ़ी है , और उसमे ऐसा नहीं है , पर तू अपने बाप से पूछ
क्या तेरी बहन भी घड़े में ही पैदा हुए थे जो तू इतना पगला रहा है |
@DR. ANWER JAMAL
u r a intelligent terrorist who is spreading terrorism by his article
by your articles
@nitin tyagi
चलो फिर सीता माता की माता और पिता का नाम बताओ! उनका जन्म कैसे हुआ ये भी बताओ.
आपने अपने लेख में जो मुद्दा उठाया उसके लिए आपको बहुत धन्यवाद| आपका शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने देश कि वास्तविक समस्या पर ध्यान दिलाया|
यह समस्या सामाजिक और नैतिक मूल्यों की है, यह आर्थिक समस्या है, यह समस्या हमारे देश के नेतृत्व में राष्ट्र प्रेम के अभाव की है| यह राष्ट्रीय समस्या है| इसका किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है| देश में स्वतंत्रता के बाद ज़्यादातर कांग्रेस का नेतृत्व रहा है | कांग्रेस सबसे ज़्यादा भ्रष्ट बेईमान नीच लोगों की पार्टी है |
98% मुसलमान कांग्रेस को वोट देते हैं| बाकी राजनीतिक पार्टियाँ भी बर्बाद हैं, बेईमान हैं|
हम सबको मिल कर एक बार विचारवान, ऊर्जावान,गैररजनीतिक निर्दलियों चुनाव में जिताना चाहिए| क्या भारत के मुसलमान अपना कांग्रेस से प्रेम तोड़ सकते हैं | जिस तरह देश के हिंदू वोट बिखरे हुए पड़ते हैं उसी तरह यदि मुसलमानों के वोट भी एकमुश्त न पड़ें तो इस हालत से निपटा जा सकता है, लेकिन मुझे पता है की ऐसा नहीं हो सकता है
"क्योंकि एक बेईमान क़ौम HII BEYIMAN PARTY KO HI CHUN SAKTI HAI, BEYIMAN KAUM HI BEYIMAN CONGRESS KE LIYE SANGTHIT HO SAKTI HAI"
जनाब शिवलोक जी ! यह मसला नैतिकता के अभाव का है . धर्म के अभाव में नैतिकता का होना असंभव है . ईश्वर को अपने कर्मों का हिसाब देने का और उनका फल भोगने का सिद्धांत ही आदमी को नैतिक और ईमानदार बना सकता है . राष्ट्रवाद किसी समस्या का हल नहीं है बल्कि यह कोढ़ में खाज की मानिंद है . जो लोग राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद कर रहे हैं उन्होंने देश और दुनिया को क़त्ल ओ घरात्गिरी के सिवा कुछ न दिया . हिटलर से लेकर गोडसे तक को और उनके पंथानुयायियों को देख लीजिये .
राष्ट्रवाद व साम्राज्यवाद में भारी अंतर होता है| राष्ट्रवादी अपने राष्ट्र से प्रेम करता है, घृणा किसी से नहीं करता| साम्राज्यवादी अपने विस्तार का भाव रखता है| राष्ट्रप्रेमी निश्चित ही होना चाहिए परंतु साम्राज्यवादी होना बुरा विचार है| जमाल साहब कुतर्क बड़ी आसानी से किया जा सकता है| तर्क करना सीखिए| मेरे निम्न विचार पर अपना संजीदगी से भरा तर्कपूर्ण जवाब दीजिए| जिससे आपकी वैचारिक शुद्धता सिद्ध हो |कांग्रेस पार्टी को एक मुश्त पड़ने वाले मुस्लिम वोटो पर अपना विचार व्यक्त करो| :
देश में स्वतंत्रता के बाद ज़्यादातर कांग्रेस का नेतृत्व रहा है | कांग्रेस सबसे ज़्यादा भ्रष्ट बेईमान नीच लोगों की पार्टी है |
98% मुसलमान कांग्रेस को वोट देते हैं| बाकी राजनीतिक पार्टियाँ भी बर्बाद हैं, बेईमान हैं|
हम सबको मिल कर एक बार विचारवान, ऊर्जावान,गैररजनीतिक निर्दलियों चुनाव में जिताना चाहिए| क्या भारत के मुसलमान अपना कांग्रेस से प्रेम तोड़ सकते हैं | जिस तरह देश के हिंदू वोट बिखरे हुए पड़ते हैं उसी तरह यदि मुसलमानों के वोट भी एकमुश्त न पड़ें तो इस हालत से निपटा जा सकता है, लेकिन मुझे पता है की ऐसा नहीं हो सकता है
"क्योंकि एक बेईमान क़ौम SIRF BEYIMAN PARTY KO HI CHUN SAKTI HAI, BEYIMAN KAUM HI BEYIMAN CONGRESS KE LIYE SANGTHIT HO SAKTI HAI"
मैं मेरे राष्ट्र से प्यार करता हूँ | इसका विस्तार नही चाहता| मैं अपने परिवार से प्यार करता हूँ , पड़ौसी से भी प्यार करता हूँ | मेरे परिवारप्रेमी होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि मैं पड़ौसी का घर हड़पना चाहता हूँ| जमाल साहब आप अपनी बुद्धि का विकास कीजिए|मैं मालिक से प्रार्थना करूँगा कि आपको विकसित बुद्धि दे|
Respected Jamal Sb. ASAK.
Congratulations for the nice post. But a lot of filthy comments are seen on the blog, which must not be there. But the propagator of Islam & peace should never be bothered because of these filthy persons who are as good as blind for the truth as bright as sun.
Keep Up.
सलामती सिर्फ इस्लाम दे सकता है ..या हिन्दू दे सकता है..या सिख , इसाई दे सकते हैं... इस सोच से उबरने की ज़रूरत है.. मुझे यकीं है आप सब इस बात को मानेगे की , सारे धर्म मोहबत सिखाते हैं ..कोई गुनाह नहीं सिखाता ... समस्या की सारी जड़ अपने को सबसे बेहतर साबित करने की जिद्द है..और दुसरे को निचा दिखाने की सोच... उसके बाद उसकी वकालत करना और साबित करने के लिए मरने मारने पर उतारू हो जाना... अपने दिल में आरजू रखना की सब हमारी ज़मात में शामिल हो जाएँ..नहीं तो जीना छोड़ दे... गलत है... बाहियात पाना है... आप सब ने अपने अपने दावे किये , सब अहंकार से भर के... ज़रूरत है, प्यार से सोचें ..सबको अपने रस्ते पर चलने दे... अल रोअड्स लीड टू रोम... कहने का मतलब है...हर रास्ता खुदा की तरफ जाता है... वो रास्ता भी खुदा का बनाया है... नाम अलग है..तो अपने रस्ते को बेहतर साबित करने की जिद्द क्यूँ? जिसको जिस रस्ते चलना अच्छा लगता है जाने दे... अपनी बात कहें ..लेकिन किसी के साथ ज़बरदस्ती नहीं... जब ऐसा होने लगेगा... सलामती होगी... और कुछ स्वार्थी लोग जो जोड़ तोड़ की बातें कर के अपना उलू सीधा करना चाहते हैं... उन्हें शर्म करनी चाहिए ... धर्म को धंधा समझने वालो पर लानत भेजो और उनकी मत सुनो... सलामती तब आएगी..जब सब एक दुसरे का आदर करें...
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