सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



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Saturday, May 8, 2010

अजेय भारत के निर्माण के लिए... Unbeatable India


दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में देश के 76 फौजी मारे गए । ये सभी एक एन्टी माइन वाहन में बैठकर नक्सलियों के सफ़ाए के लिए जंगल की तरफ़ जा रहे थे । इनके वाहन को नक्सलियों ने ‘माइन’ से ही उड़ा दिया। इतनी मौतों के बाद ‘विशेषज्ञों’ ने बताया कि इन फ़ौजियों को इस तरह के जंगलो में ऐसे छापामारों से लड़ने के लिए प्रशिक्षित ही नहीं किया गया था ।
फ़ौजियो की लाशें उनके घरों को आने का सिलसिला शुरू हुआ। उनकी विधवाओं और उनके रिश्तेदारों को दहाड़े मार कर रोते हुए न्यूज़ चैनल्स और अखबारों ने दिखाया और यही मीडिया इसी दौरान यह भी दिखा रहा था कि देश का युवा वर्ग आई.पी.एल. क्रिकेट मैच देखने में मगन है और चौके - छक्कों पर चीयर लीडर्स मस्त नाच दिखा रही हैं। कुछ ही समय बाद पता चला कि नेता व्यापारी और सटोरिये भी चांदी-सोना काट रहे थे और नाच रहे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इन्हीं लोगों से चुनाव में होने वाले खर्च में ‘सहयोग’ लेते है और बदले में देश की जनता को इन्हें सौंप देते हैं।
वन्दे मातरम् गाने वाले ये ‘राष्ट्रवादी व्यापारी’ (?) आटा, दाल, चीनी, और दूध जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों की जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी करके नेताओं को अपने द्वारा दिये गए चन्दे से सौ गुना ज़्यादा वसूल करते हैं। नेता लोग कहते हैं कि अभी मंहगाई और बढ़ेगी। क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने मंहगाई बढ़ाने वालों का नमक खाया है और हमारे देश का आदमी ‘नमक हराम’ नहीं होता।
ग़रीब किसान महाजनों से सूद पर रकम लेते हैं और बदले में अपनी इज़्ज़त-आबरू के साथ अपनी जान भी दे देते हैं। अब तक देश के लगभग 2 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं जोकि पाक समर्थित आतंकवाद में मरने वालों की संख्या से कई गुना ज़्यादा हैं। ऐसे ही ग़रीबों-वंचितों के दिलों में निराशा और अवसाद और फिर आक्रोश पैदा होता है। समाज शस्त्र के नियम के अनुसार समस्या से ध्यान हटाने के लिए नेता लोग मनोरंजन के साधन बढ़ा देते हैं लेकिन मनोरंजन के साधन आए दिन ऐसी हिंसक फिल्में दिखाते हैं जिनमें जनता का शोषण करने वाले नेताओं की सामूहिक हत्या को समाधान के रूप में पेश किया जाता है। व्यवस्था और कानून से अपना हक़ और इन्साफ़ मिलते न देखकर हिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। इनकी समस्या के मूल में जाने के बजाय नेता लोग इसे इसलामी आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रवाद का नाम देकर अपनी राजनीति की रोटियां सेकने लगते हैं। व्यवस्था की रक्षा में फ़ौजी मारे जाते हैं और उनके आश्रित नौकरी और पेट्रोल पम्प आदि पाने के लिए बरसों भटकते रहते हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। देश की व्यवस्था को सम्हालने वाले तो उन लोगों की भी ख़बर नहीं लेते जिन्होंने देश का 70 हज़ार करोड़ रूपया विदेशों में जमा कर रखा है लेकिन सरकार उस मध्यवर्गीय क्लर्क की सैलरी से आयकर काटना नहीं भूलती जिसे अपने बच्चों की फ़ीस देना और उनका इलाज कराना तक भारी होता जा रहा है।
समस्याएं बहुत सी हैं लेकिन सारी समस्याओं का कारण अव्यवस्था है। यह ‘अव्यवस्था’ केवल इसलिए है कि व्यवस्था को चलाने वाले नेता और उन्हें चुनने वाली देश की जनता अधिकांशतः अपने फ़र्ज़ की अदायगी को लेकर ‘ईमानदार’ नहीं है।
जब उनके दिल में ‘ईमान’ ही नहीं है तो ईमानदारी आयेगी भी कैसे ?
ईमान क्या है ?
ईमान यह है कि आदमी जान ले कि सच्चे मालिक ने उसे इस दुनिया में जो शक्ति और साधन दिए हैं उनमें उसके साथ -साथ दूसरों का भी हक़ मुक़र्रर किया है। इस हक़ को अदा करना ही उसका क़र्ज़ है। फ़र्ज़ भी मुक़र्रर है और उसे अदा करने का तरीक़ा और हद भी। जो भी आदमी इस तरीक़े से हटेगा और अपनी हद से आगे बढ़ेगा। मालिक उस पर और उस जैसों पर अपना दण्ड लागू कर देगा। इक्का दुक्का अपवाद व्यक्तियों को छोड़ दीजिए तो आज हरेक आदमी बैचेनी और दहशत में जी रहा है। हरेक को अपनी सलामती ख़तरे में नज़र आ रही है।
सलामती केवल इस्लाम दे सकता है
लेकिन कब ?
सिर्फ़ तब जबकि इसे सिर्फ़ मुसलमानों का मत न समझा जाए बल्कि इसे अपने मालिक द्वारा अवतरित धर्म समझकर अपनाया जाए। इसके लिए सभी को पक्षपात और संकीर्णता से ऊपर उठना होगा और तभी हम अजेय भारत का निर्माण कर सकेंगे जो सारे विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखाएगा और सचमुच विश्व गुरू कहलायेगा।