सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



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Thursday, June 10, 2010

You have to delink problem to opportunities . अरब देश अपनी ग़लत पॉलिसियों की क़ीमत अदा कर रहे हैं।




कश्मीर के मसले को भी मुसलमानों ने ही बिगाड़ा है। सन् 1949 में वल्र्ड वॉर सेकंड में जापान ने ओकिनावा जज़ीरे पर क़ब्ज़ा कर लिया। जापान के रिकन्सट्रक्शन के लिए वहां के रहनुमा ने 30 का एक प्रोग्राम बनाया। उसने ओकिनावा को वैसे ही छोड़ दिया। जापान इकॉनॉमिक सुपर पॉवर बनकर उभरा और 1972 में अमेरिका को वहां से अपना क़ब्ज़ा हटा लिया। इसे ‘डीलिंकिंग पॉलिसी‘ कहा जाता है।  पाकिस्तान को बिज़नेस की अपॉरचुनिटी पर ध्यान देना चाहिये और कश्मीर के मसले बातचीत के लिए मेज़ पर छोड़ देना चाहिये। You have to delink problem to opportunities .
जापान ने सब्र किया और इकॉनॉमिक सुपर पॉवर बन गया और पाकिस्तान ने बेसब्री दिखायी और आज वह एक फ़ेल्ड स्टेट बनकर रह गया है। वह आज अमेरिका की मदद से चल रहा है।
यही हाल सददाम हुसैन का हुआ। 57 मुस्लिम देश हैं। सब जगह इस्राईल को सबसे बड़ा दुश्मन बताया जाता है। मैं कहता हूं कि अरब देश अपनी ग़लत पॉलिसियों की क़ीमत अदा कर रहे हैं।
इस मजलिस में हमारे साथ भाई तारकेश्वर गिरी, डा. अयाज़, मास्टर अनवार और भाई शाहनवाज़ भी थे। सभी को एक बिल्कुल रूहानी अहसास हो रहा था।
सहनशीलता सारी कामयाबियों की कुंजी है, जब कोई व्यक्ति सहनशीलता धारण करता है तो सारी प्राकृतिक शक्तियां उसकी सहायता करना शुरू कर देती है। वहीँ असहनशीलता अर्थात बेसब्री स्थिति को सामान्य करने की प्राकृतिक प्रक्रिया को समाप्त कर देती है।
मौलाना बिना किसी लाग लपेट के अपनी बात कह रहे थे और मैं सोच रहा था कि यह सब आज एक सपना हो चुका है। आज जितने भी वाद हैं वे दरअस्ल विवाद हैं न कि विवादों का समाधान । सारे मसलों का हल सच को जानना और मानना है।

Wednesday, June 9, 2010

Pakistan is a failed state पाकिस्तान नफ़रत में अंधा हो गया है। उसने 4 बार इन्डिया पर अटैक किया और चारों बार हारा। कश्मीर के मसले को भी मुसलमानों ने ही बिगाड़ा है।

बेशक मुश्किल के साथ आसानी है। -अलकुरआन
प्रॉब्लम और अपॉरचुनिटीज़ दोनों ‘ट्विन‘ हैं। दोनों साथ साथ होती हैं। अगर आप भड़क उठते हैं तो आप अंधे हो जाते हैं। पाकिस्तान नफ़रत में अंधा हो गया है। उसने 4 बार इन्डिया पर अटैक किया और चारों बार हारा। उसे चाहिये था कि समस्याओं को बातचीत के ज़रिये हल करता और अपॉरचुनिटीज़ को इस्तेमाल करता। पाकिस्तान के पास सुई गैस है वह उसे इन्डिया को बेचता और उसे कोयले की ज़रूरत है वह कोयला यहां से ख़रीदता। पाकिस्तान आस्ट्रेलिया से कोयला ख़रीदता है जोकि उसे कई गुना महंगा पड़ता है। पाकिस्तान ने अपॉरचुनिटीज़ को नहीं देखा। मैं इसे
‘डीलिंकिंग की पॉलिसी‘ कहता हूं।


कश्मीर के मसले को भी मुसलमानों ने ही बिगाड़ा है।

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब का लेक्चर जारी था जिसे हाज़िरीने मजलिस के साथ साथ दुनिया के दूर दराज़ में बैठे लोग भी इंटरनेट पर देख रहे थे। मौलाना के लेक्चर को प्रत्येक रविवार को भारतीय समय के अनुसार 10 : 30 बजे सुबह देखा जा सकता है। इस लेक्चर को इस लिंक पर देखा जा सकता है।
  http://www.youtube.com/watch?v=cJvIgiII5QU&feature=related
मौलाना बिना किसी लाग लपेट के सच को खुद भी स्वीकार करते हैं और दूसरों को भी सच को जानने मानने की तालीम देते हैं और हक़ीक़त भी यही है कि जब तक हमारे अन्दर यह गुण पैदा नहीं होगा हमारे मसलों का हल होने वाला नहीं है।

क्लास के बाद भाई तारकेश्वर गिरी जी के तास्सुरात भी यही थे कि यहां जो कुछ देखा वह उससे बहुत अलग है जो मेरे दिमाग़ में था। मौलाना ख़ान साहब और गिरी जी, दोनों में दो बातें समान हैं। एक तो यह कि दोनों ही सच को बेखटके स्वीकारते हैं और दूसरी बात यह कि दोनों ही आज़मगढ़ के बाशिन्दे हैं।
भाई शाहनवाज़ ने भी मौलाना के अनमोल मोतियों से अपनी झोली भर ली।