सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
Showing posts with label कन्या भ्रूण. Show all posts
Showing posts with label कन्या भ्रूण. Show all posts
Tuesday, May 18, 2010
आज के मां-बाप और डाक्टर : क़ातिल या मसीहा

डाक्टर मीनाक्षी राना ने रिपोर्ट देखकर कहा कि
आपकी पत्नी के गर्भ में पल रहा शिशु जन्मजात विकृतियों का शिकार है । आपको उसे टर्मिनेट करवाना होगा ।
मेरी वालिदा साहिबा भी साथ में थीं , उन्होंने पूछा कि अगर बच्चे को पैदा होने दिया जाए तो डिलीवरी नार्मल होगी या फिर आप्रेशन करना पड़ेगा ?
डाक्टर साहिबा ने जवाब दिया - बच्चे की कमर में जो रसौली है वह अभी तो छोटी है लेकिन अगर उसका साइज़ बड़ा हो गया तो फिर आप्रेशन की नौबत भी आ सकती है । तब आप खुद को बड़ा कोसेंगी ।
मैंने पूछा - बच्चा ज़िन्दा तो है न ?
मेरे पूछने के लहजे से वह जान गईं कि मैं भी अपनी मां की तरह उनसे सहमत नहीं हूं । उन्होंने जवाब दिया - हां । देखिये , जज़्बाती मत होइये । आपके तो और भी बच्चे हैं । आप रसौली की बात भी जाने दीजिये । यह बच्चा एक बोझ है । मैं तो आपको इसे टर्मिनेट कराने की सलाह ही दूंगी । बाक़ी आपकी इच्छा । यह कहकर उस बेहतरीन पर्सनैलिटी और आला सलाहियत की मालिक उस मसीहा ने अपनी क़लम से बच्चे के लिए मां के गर्भ में ही उसकी मौत का सजेशन तहरीर कर दिया । उन्होंने फिर एक बार कोशिश करना मुनासिब समझा - और लोग अनपढ़ होते हैं , ऐसी हालत में वे उम्मीद करते हैं कि शायद जन्म के समय बच्चा सही पैदा हो जाए ?
लेकिन ऐसा नहीं होता । आप लोग एजुकेटिड हैं । आप ज़रा अक्ल से सोचिए । मैंने पहले दिल से , फिर ज़मीर से और फिर इन सबसे हटकर अक्ल से भी सोचा लेकिन हर बार जवाब यही मिला कि गर्भ में पल रहे शिशु का क़त्ल करना जायज़ नहीं है , चाहे उसमें जन्मजात विकार ही क्यों न हों और जीवन भर उनके ठीक होने की उम्मीद भी न हो ।
आप क्या सोचते हैं ?
जो जवाब मुझे मिला , क्या वह सही है ?
यासही जवाब कुछ और है ?
आप में से कौन बताएगा कि कल की संवेदनशील पोस्ट पर भी मुझे माइनस के 2 वोट क्यों मिले ? और ब्लागवाणी ने मुझे अपनी हॉटलिस्ट में लेने के लिए संकोच क्यों दिखाया ?
@अविनाश वाचस्पति जी ! आप या तो दो बोल मेरी हमदर्दी में बोलते या फिर अपाहिज भ्रूण के हक़ में अपनी जुबान खोलते लेकिन यह क्या कि आप इतनी संवेदनशील पोस्ट पर ‘ज़लज़ला‘ उठा लाए ?
ब्लॉगर्स से भरे इस आभासी संसार में हमदर्दी के दो बोल अगर मिले भी तो अपने इस्लामी भाइयों से , बाक़ी सबकी संवेदना कहां सो गई ?
एक दो जाली राष्ट्रवादी आये भी तो अपना वही पाकिस्तान का राग अलापते रहे या फिर मुझे ही झूठा कहकर अपना फ़र्ज़ पूरा समझ लिया ।
मैं सभी मोमिन भाइयों का बेहद शुक्रगुज़ार हूं
और ख़ास तौर पर ज़ीशान भाई का कि उन्होंने भारत में हिन्दी साहित्य संसार में पहली बार अपाहिज भ्रूणों के जीवन की रक्षा के हक़ में उठने वाली आवाज़ को बल दिया । मेरे दिल का हौसला और मेरे ईमान को तक़वियत दी । अभी-अभी पोस्ट लिखने के दौरान ही भाई तारकेश्वर गिरी जी से बात हुई । उनकी जानकारी में मेरे हालात पहले से ही हैं । उनसे मैंने विशेष तौर कहा कि जो भी आपको उचित लगे आप ज़रूर बतायें । देखिये कि उनकी टिप्पणी कितनी देर में प्राप्त होती है ।
Labels:
jannah,
muslim in jannah,
Operation,
कन्या भ्रूण,
डिलीवरी
Monday, May 17, 2010
A grave in the womb . क्या मां-बाप को अपने अपाहिज भ्रूण को गर्भ में ही मार डालना चाहिये ?

मैं 15 अप्रैल 2010 को डा. मीनाक्षी राना के केबिन में अपनी पत्नी के साथ था ।
मेरी वाइफ़ प्रेग्नेंट है और उनकी तरफ़ तवज्जो देने की ख़ातिर मैंने अपना टी. वी. भी बन्द कर दिया है और अपने इन्टरनेट के सभी कनेक्शन भी सिरे से ही कटवा डाले । जो भी ज़रूरी चीज़ें दरकार हैं तक़रीबन सभी मुहैया करने की कोशिश की । डा. मीनाक्षी अपने पेशेंट्स की 7 वें महीने के बाद अल्ट्रा साउंड रिपोर्ट्स देखकर गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत का अन्दाज़ा करती हैं । पहली रिपोर्ट के बाद आज उन्होंने ‘बी‘ लेवल का अल्ट्रा साउंड टेस्ट करवाया था । रिपोर्ट देखकर उन्होंने बताया कि शिशु का दिमाग़ आपस में जुड़ते वक्त थोड़ा ओवरलेप करके जुड़ा है , उसकी रीढ़ की हड्डी भी तिरछी है और उसकी कमर में एक रसौली भी है । डा. मीनाक्षी ने मुझे सारी कैफ़ियत बताने के बाद कहा कि मेरी राय में आप
‘इसे‘ टर्मिनेट करा दीजिये ।
मैंने उन्हें क्या जवाब दिया और क्यों दिया , यह तो मैं आपको बाद में बताऊंगा लेकिन पहले मैं आपका जवाब जानना चाहता हूं कि अगर पेट में पल रहा बच्चा अपाहिज हो और पैदा होने के बाद भी वह आजन्म अपाहिज ही रहे तो क्या उसकी मां की कोख को ही उसकी क़ब्र बना दिया जाए ?
आजकल आपने कन्या भ्रूण की हिफ़ाज़त के हक़ में कुछ आवाजे़ ज़रूर सुनी होंगी लेकिन क्या आपने अपाहिज भ्रूण की हिफ़ाज़त में उठने वाली कोई आवाज़ कभी सुनी है ?
जबकि इस तथाकथित सभ्य समाज में बड़े पैमाने पर पढ़े-लिखे लोग अपाहिज भ्रूणों की हत्या कर रहे हैं ?
आप यह भी देखिएगा कि लोग बिना पढ़े ही किस तरह इस पोस्ट को माइनस वोट करते हैं ?
Labels:
islam,
अपाहिज,
कन्या भ्रूण,
गर्भ,
प्रेग्नेंट,
शिशु
Subscribe to:
Posts (Atom)