सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Monday, August 19, 2013

मुसलमान की पहचान क्या है ?

मुस्लिम का अर्थ है ईश्वर के प्रति समर्पित और उसकी आज्ञा का पालन करने वाला.
इस बात को हम अपने लेख में बता चुके हैं.
जो लोग ईश्वर की आज्ञा के बजाय अपने मन की करते हैं. वे चाहे ख़ुद को मुसलमान कह लें लेकिन हकीक़त में वे अवज्ञाकारी होते हैं.
ईश्वर के आदेश पर चलने के लिए अपने निजी एजेंडे छोड़ने पड़ते हैं. मुसलमान बादशाहों की लड़ाईयां उनके अपने निजी एजेंडों के लिए होती थीं. इसके बावुजूद उन्हॊने भारत पर राज किया तो केवल इसलिए कि अपने निजी एजेंडे के लिए यहाँ के हिन्दू राजाओं ने उन्हें न्यौता भी दिया और उनकी मदद से अपने दुश्मन हिन्दू राजाओं को मारा भी.
धर्म के आदेश की अनदेखी हिन्दू राजाओं ने भी की और मुस्लिम बादशाहों ने भी.
अब समय आ गया है कि हर आदमी अपने निजी एजेंडे को त्याग कर ख़ुद को एक ईश्वर के प्रति समर्पित कर दे. समर्पण से ही शांति आएगी.
लोगों की भलाई शांति में है। आज ऐसे लोगों की सख्त ज़रूरत है जो कि सबकी भलाई के लिए काम कर सकें। सबकी भलाई के लिए काम करने वाले आज कम हैं। अक्सर लोग सिर्फ़ अपनी भलाई के लिए काम कर रहे हैं।
वंदे मातरम कहने वाला एक मूर्तिपूजक अपने ही जैसे दूसरे वंदे मातरम गायक से चक्रवृद्धि ब्याज ले रहा है। तौहीद का नारा अल्लाहु अकबर बुलंद करने वाला एक मुसलमान अपनी ही बेटियों को शरीयत के मुताबिक़ अपनी जायदाद में हिस्सा नहीं दे रहा है। हक़ मारना आम बात है। एक ही राजनैतिक दल में मूर्तिपूजक, तौहीद के अलम्बरदार और नास्तिक सब मिल जाएंगे। सब के उसूल अलग अलग हैं लेकिन सब एक झूठे और खुदग़र्ज़ नेता की जय-जयकार करते मिल जाएंगे। इनका निजी मतलब जिससे सिद्ध हो रहा होगा, ये उसके पीछे चल रहे होंगे। अपने दीन-धर्म और अपनी विचारधारा से इन्हें कोई रिश्ता कम ही है।
मूर्तिपूजक और नास्तिक अपने मन की इच्छा के अनुसार करने के लिए आज़ाद हैं लेकिन एक मुसलमान नहीं। उसके लिए उसूलों की पाबंदी लाज़िम है। उसके लिए मन की वासना के पीछे भटकते रहने की कोई गुंजाइश नहीं है। उसे उसी रास्ते पर चलना है, जो कि उसके दयालु पालनहार ने मुक़र्रर कर दिया है। पैग़म्बर मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जीवन उसका अमली नमूना अर्थात व्यवहारिक आदर्श है।
आज इंसान इस व्यवहारिक आदर्श की जितनी अनदेखी कर रहा है, उतना ही ज़्यादा परेशान है। मुसलमानों की परेशानी का सबब भी यही है।
ये परेशान मुसलमान ही दूसरों को परेशान कर रहे हैं। इसलाम के दुश्मन इन्हें सामने दिखाकर कहते हैं कि देखो, मुसलमान लूटमार और ख़ून-ख़राबा कर रहे हैं।
इस तरह वे लोगों को यह दिखाना चाहते हैं कि अगर हम ब्याज लेकर लोगों का ख़ून चूस रहे हैं तो चुपचाप अपना ख़ून चुसवाते रहो। हमारी सरकार बनवाते रहो। अगर तुम इधर उधर मुक्ति पाने के लिए मुसलमान बनोगे तो किसी मुसलमान के हाथों ही मारे जाओगे। जैसे हम हैं वैसे ही मुसलमान भी हैं। तुम्हें दो बुरों में से एक चुनना ही है तो अपने राष्ट्रवादी भाई को चुनो। अपना शोषण हमसे करवाओ और गर्व करते रहो।
...लेकिन लोग बेवक़ूफ़ नहीं हैं। वे जानते हैं कि इसलाम में नाजायज़ माल कमाना और गाली देना तक हराम है तो फिर मुसलमान लूटमार और ख़ून-ख़राबा कैसे कर सकता है ?
ये बुरे काम वही लोग करते हैं जो इसलाम के सीधे रास्ते से हटकर चल रहे हैं जैसे कि दूसरे चल रहे हैं। ऐसे लोग इसलाम का इस्तेमाल अपने संकीर्ण राजनैतिक हित के लिए करने के लिए मुसलमानों में फूट डाल कर उन्हें आपस में लड़ाने से भी बाज़ नहीं आते।
आम जनता के जज़्बाती नौजवान इन्हें पहचान नहीं पाते। ख़ुद मुसलमान तक इनसे धोखा खा जाते हैं। कई बार ये मौलवी और पीर तक बनकर लोगों को गुमराह कर देते हैं। इनकी पहचान बस यही है कि ये कभी सामूहिक भलाई के लिए अपना माल ख़र्च नहीं करते। ये मुसलमानों से माल बटोरकर अपना घर भरते रहते हैं। ग़ैर-मुस्लिमों से माल मिल जाए तो ये उसके समर्थन में भी खड़े हो जाते हैं। मुसलमानों का ख़ून बहाने वाले इसलाम दुश्मनों के हक़ में भी ये वोट देने की अपील कर देते हैं। उनकी पार्टी के प्रवक्ता भी ये बन जाते हैं। उन्हें ऐसा करते देखकर इसलाम दुश्मन उन्हें अपना दामाद तक बना लेते हैं।
आज मुसलमानों में इस तरह के लोग अपनी लीडरी ख़ूब चमका रहे हैं। ऐसे लोगों से एक सच्चा मुस्लिम बिल्कुल अलग चरित्र रखता है। वह सबकी भलाई के लिए दुआ करता है और सबकी भलाई के लिए अपना माल ख़र्च करता है और बहुत बार वह इसी मक़सद के लिए अपनी जान भी क़ुरबान कर देता है। जिन्हें सीधे-सच्चे रास्ते की तलाश है, वह ऐसे ही लोगों के जीवन से प्रेरणा लेता है और जो इनसे प्रेरणा नहीं लेता, वह ख़ुद को ख़ुद ही बहकाता रहता है और अपने रब के हुक्म के खि़लाफ़ करता हुआ इंसानियत का मुजरिम बनकर मर जाता है।
इस जीवन का बहरहाल अंत है और जीवन अनन्त है। आज इन्हें मरने के बाद मिलने वाला स्वर्ग-नर्क कल्पना लग रहा है लेकिन मरने के बाद वह इनके लिए हक़ीक़त बन जाएगा। जिस रब की दुनिया में इंसान रह रहा है, उसके खि़लाफ़ बग़ावत करना अक्लमंदी नहीं है।
मुस्लिम से तात्पर्य एक अक्लमंद पर्सनॅलिटी से है जो कि उस रब का हुक्म मानता है और जो नहीं मानते, उनसे उसका हुक्म मानने के लिए कहता रहता है।
अपने इसी अमल से वह सबके बीच पहचान लिया जाता है।

2 comments:

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति-
आभार आदरणीय-

Ashok Khachar said...

बढ़िया प्रस्तुति-