सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
Showing posts with label Satanic activities. Show all posts
Showing posts with label Satanic activities. Show all posts
Saturday, May 22, 2010
Satanic activities पवित्र कुरआन की आयतों को साक्षात होते देख रहा है ब्लॉगिस्तान
114. सूरह ए नास1. कह दो मैं इनसानों के रब की शरण में आया ।
2. मैं इनसानों के बादशाह की शरण में आया ।
3. मैं तमाम इनसानों के बादशाह के माबूद (उपास्य) की शरण में आया ।
4. वसवसा (बुरा ख़याल) डालकर छिप जाने वाले ख़न्नास (शैतान) के शर (उपद्रव) से बचने के लिए 5. जो लोगों के सीनों में वसवसा (बुरा ख़याल, वहम) डालता है ।
6. फिर वह जिन्नों में से हो या इनसानों में से।
...............................................................................................
नेकी और बदी की जंग शुरू से ही जारी है । नेकी और सच्चाई के आम होने से झूठ और अंधविश्वास का ख़ात्मा होना निश्चित है । इनके ख़त्म होने से बहुत से ऐसे लोगों का वुजूद ही मिट जाएगा जिन्हें झूठ और अंधविश्वास के बल पर ही समाज में धन,पद और वैभव प्राप्त है । ऐसे लोग जब धर्म और सत्य के मुक़ाबले में स्वयं को निर्बल और तर्कहीन पाते हैं तो वे सत्य के प्रचारक को समाज की नज़रों में अविश्वसनीय बनाने की घृणित चाल चलते हैं ।
कल ब्लॉगिस्तान ने पवित्र कुरआन की आयतों को साक्षात होते हुए देखा । कल किसी दुर्जन ने मेरे फ़ोटो और मेरे नाम का ग़लत उपयोग करते हुए बहन फ़िरदौस को भी भरमाया और
महाजाल के पाठकों को भी चकराया । नीचता की हद तो उसने तब की जब उसने मेरे ही ब्लॉग पर मेरे विचार और अभियान के खि़लाफ़ ही टिप्पणी कर डाली और यही आदमी मेरा फ़ालोअर भी बन गया ।
यह आदमी उर्दू नहीं जानता इसीलिये हर्फ़ ‘क़ाफ़‘ के बजाए ‘काफ़‘ का इस्तेमाल करता है ।उसका यह कर्म ‘वसवसा डालना‘ कहा जाएगा । वसवसे का मक़सद उपद्रव फैलाना होता है जो कि ‘ख़न्नास‘ अर्थात शैतान का मिशन है । इसका समाधान यह है कि पालनहार प्रभ की शरण पकड़ी जाए ।
ईश्वर दया, प्रेम, ज्ञान और उपकार आदि गुणों का स्रोत है और जो भी उसकी शरण में जाएगा उसमें भी यही गुण झलकेंगे । इन्हीं गुणों के होने या न होने से पता चलता है कि आदमी परमेश्वर की शरण में वास्तव में है कि नहीं ?
और यह भी कि आदमी ने उसकी शरण में आने के लिए वास्तव में प्रयास कितना किया ?
आयतों को जुबान से मात्र पढ़ लेने से ही अभीष्ट लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता । इसके लिए तदनुकूल कर्म भी ज़रूरी है । तभी हरेक उपद्रव और शर का ख़ात्मा होगा ।अपनी और समाज की बेहतरी के लिए ज़रूरी है कि आप शैतानों को पहचानें और उनके शैतानी जाल में न फंसें ।उन्हें आपके द्वारा पहचान लेना ही उनकी साज़िश को नाकाम करने के लिए काफ़ी है ।
अन्त में ...
मेरी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से यह ज़रूर सुनिश्चित कर लें कि वह टिप्पणी वास्तव में मेरी ओर से है या फिर किसी ख़न्नास का फैलाया बड़ा जाल है ?
@ वत्स जी ! हरेक चीज़ का रचयिता एक परमेश्वर है ।
@ भाई अमित जी ! आपके द्वारा पुराण वचनों का संकलन वाक़ई क़ाबिले दीद है । मैं चाहूंगा कि आप उसे संपादित करके पुनः प्रकाशित करें । इससे इसलाम और वैदिक धर्म के आध्यात्मिक एकत्व का भी बोध होगा और विश्वासी जनों को पाप से बचने की प्रेरणा भी मिलेगी ।
@ डा. अयाज़ साहब और सभी भाइयों का मैं आभारी हूं जिन्होंने इस दुर्जन बहुरूपिए का बरवक्त पर्दा चाक कर दिया । और एक अच्छी ख़बर गर्भस्थ भ्रूण के संबंध में भी है जिसे मैं आपसे नेक्स्ट पोस्ट में share करूंगा ।
Labels:
Satanic activities,
इसलाम,
जाल,
पर्दा,
वैदिक धर्म,
शरण
Subscribe to:
Posts (Atom)