सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
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Tuesday, June 1, 2010
Everyone will get the result soon . भलाई या बुराई जो कोई भी करेगा वह उसका फल ज़रूर पायेगा चाहे वह औरत हो या मर्द
दयालु और न्यायकारी परमेश्वर कहता है-122. और जो लोग ईमान लाये और उन्होंने नेक काम किये उनको हम ऐसे बाग़ों में दाखि़ल करेंगे जिनके नीचे नहरें जारी होंगी, परमेश्वर का वादा सच्चा है और परमेश्वर से बढ़कर कौन अपनी बात में सच्चा होगा ?
123. न तुम्हारी इच्छा पर है और न पूर्व ईशग्रन्थ वालों की इच्छा पर। जो कोई भी बुरा करेगा उसका बदला पायेगा और परमेश्वर के सिवा अपना कोई हिमायती और मददगार न पायेगा।
124. और जो कोई नेक काम करेगा चाहे वह मर्द हो या औरत बशर्ते कि वह विश्वासी हो तो ऐसे लोग स्वर्ग में प्रवेश करेंगे और उनपर ज़रा भी ज़ुल्म न होगा।
125. और उससे बेहतर किस का धर्म है जो अपना चेहरा परमेश्वर की ओर झुका दे और वह नेकी करने वाला हो और वह चले इबराहीम के मार्ग पर जो एकनिष्ठ था और परमेश्वर ने इबराहीम को अपना मित्र बना लिया था।
126. और परमेश्वर का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और परमेश्वर ने सब चीज़ों को अपने घेरे में ले रखा है।
कुरआन मजीद,सूरह ए निसा, 122-126
दुनिया की चीज़ों को मालिक ने इनसान को दिया ताकि वह उन्हें बरतना सीख ले। इसी शिक्षण, प्रशिक्षण और परीक्षण के लिए मालिक ने दुनिया को और इनसान को बनाया है।
जिन लोगों ने मालिक की इस नीति और योजना को जान लिया, उन्होंने एकनिष्ठ होकर पूर्ण समर्पण भाव से मालिक के हरेक हुक्म का पालन किया और लोकहित में अपनी तमाम राहतें और खुशियां कुर्बान कर दीं। यही लोग मानवता के आदर्श और धर्मपथ के मार्गदीप हैं। इन्हीं में एक नाम हज़रत इबराहीम अलैहिस्सलाम का है। स्वर्ग में प्रवेश करने के लिये उनका अनुकरण लाज़िमी है, केवल दावा और इच्छा करना ही काफ़ी नहीं है।
भलाई या बुराई जो कोई भी करेगा वह उसका फल ज़रूर पायेगा चाहे वह औरत हो या मर्द, मुसलमान हो या फिर पहले अवतरित हो चुके ज्ञान पर विश्वास रखने वाला।
इनसान की सफलता इसी में है कि जो कुछ उसे कल नज़र आने वाला है उसे वह अपनी अक्ल से आज ही पहचान ले और खुद को उस मालिक के प्रति पूरी तरह से समर्पित कर दे और लोगों का हक़ और अपना फ़र्ज़ बेहतरीन तरीक़े से अदा करे ताकि वह स्वर्ग में प्रवेश करने का पात्र सिद्ध हो।अफ़सोस इनसान के हाल पर कि वह दुनिया की मामूली चीज़ों को पाने के लिये तो योजनाबद्ध तरीक़े से मेहनत करता है और सदा के स्वर्गिक सुख को पाने के लिये वह केवल इच्छा, दावे और दिखावे की रस्मों को ही काफ़ी समझता है।
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