सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



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Sunday, May 23, 2010

डा. मीनाक्षी राना जैसे डाक्टरों की सलाह मानकर कितने ही लोग अपने होने वाले बच्चों को मात्र इस कारण से मार डालते हैं कि वे अपाहिज क्यों हैं ?अपने अपाहिज होने का ज़िम्मेदार गर्भ में पलने वाला मासूम बच्चा तो नहीं है न , तो फिर उसे किस जुर्म के बदले में क़त्ल किया जाता है ?
यह घिनौना जुर्म आज का सभ्य समाज अंजाम दे रहा है । लोग दुनिया के स्टैण्डर्ड और स्टेटस की ख़ातिर अपने ही हाथों अपने बच्चों को मार कर आधुनिक बनकर विदेशी धुनों पर थिरक रहे हैं । अगर इन्हें इनके पैदा करने वाले दयालु मालिक का कोई वचन सुनाकर नेकी की तालीम दी जाती है तो ये उस आदमी की अक्ल पर तरस खाते हुए सोचते हैं कि यह बेचारा वक्त के साथ न चल सका । ख़ैर मैंने डाक्टर साहिबा की सलाह रद्द कर दी और अपने ज़मीर से फ़त्वा लिया और फिर
‘अगर अब भी न जागे तो‘ के लेखक महोदय से भी दीनी हुक्म मालूम किया तो वहां से भी मेरे ज़मीर की ही तस्दीक़ हुई ।मेरी वाइफ़ के गर्भ में बच्चा बिना किसी मूवमेंट के पिछले 7 महीनों से पड़ा था । मैंने वैद्य जी नरेश गिरी को अपने घर पर आने के लिए कहा ।
वैद्य जी आयुर्वेद में सिद्धहस्त हैं । उनसे मेरे 7 साल पुराने संबंध हैं । वे एक पौराणिक मान्यताओं में जीने वाले सरल स्वभाव के इनसान हैं । मैं जिन बातों को धर्म के विरूद्ध और आडम्बर मानता हूं उनपर उनको हमेशा टोकता हूं । पहले पहल तो उन्हें काफ़ी नागवार लगा लेकिन अब वे मेरी बात पर प्रतिक्रियास्वरूप सिर्फ़ मुस्कुराते हैं । बहरहाल मान्यताओं का अन्तर और टोकाटाकी हमारे दरम्यान कभी दीवार नहीं बना क्योंकि हमारी बातचीत की बुनियाद हमेशा मुहब्बत ही रही है । मेरे बुलाने पर वे आये और नब्ज़ देखकर उन्होंने ‘गर्भचिन्तामणि रस‘ और ‘सारिवाद्यासव‘ प्रेस्क्राइब किया ।
इनके सेवन से बच्चे ने अगले ही दिन गर्भ में मूवमेंट करना आरम्भ कर दिया ।
यह आयुर्वेद का एक चमत्कार है , हमारे पूर्वजों की महानता का जीता जागता सुबूत है । यह हिन्दू-मुसलिम प्रेम और सहयोग की मिसाल है । यह वाक़या भारत के अद्भुत रंग रूप से भी परिचय कराता है । जो काम एक वैल सर्टिफ़ाइड ऐलोपैथ के लिए संभव न हो सका उसे उस आदमी ने कर दिखाया जिसे सरकारी काग़ज़ों में ‘झोलाछाप‘ कहा जाता है ।
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अपने वक़्त पर एक नन्ही सी बच्ची ने जन्म लिया. उसकी कमर पर एक बड़ा सा फोड़ा था . 'स्पाइना बिफिडा' इस बीमारी का नाम है.
एक महीने से भी कम वह ज़िंदा रही और फिर वह जन्नत का फूल बन गयी. उसकी मौत पर हिंदी ब्लॉग जगत  ने हमें जज्बाती सहारा भी दिया और दुआ देने वालों ने दुआएं भी दीं .
(यह अंश आज 20 मार्च 2011 को बढाया गया)