सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
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Thursday, May 27, 2010
Countless blessings of God हे मानव! दयालु दाता को छोड़कर तू किसके सामने अपनी झोली फैला रहा है और किसे शीश नवा रहा है ?
आरम्भ अल्लाह के नाम से जो अत्यन्त दयालु सदा कृपाशील है ।आ गया परमेश्वर का आदेश, सो उस (प्रलय और प्रकोप) की जल्दी न करो। वह पवित्र और महान है उससे जिसको वे साझीदार ठहराते हैं।
वह फ़रिश्तों को रूह के साथ अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है उतारता है कि लोगों को ख़बरदार कर दो कि मेरे सिवा कोई ‘इलाह‘ (उपास्य,सृष्टा,विधाता) नहीं, सो तुम मुझसे डरो।
उसने आसमानों और ज़मीन को सत्य के साथ पैदा किया है, वह महान है उस साझेदारी से जो वे कर रहे हैं।
उसने इनसान को वीर्य से उत्पन्न किया। फिर वह (उपकार भुलाकर धर्म प्रचारक से) खुल्लम खुल्लम झगड़ने लगा।
और उसने चौपायों को बनाया उनमें तुम्हारे लिए लिबास भी है और खुराक भी और दूसरे फ़ायदे भी, और उनमें से खाते भी हो। और उनमें तुम्हारे लिए रौनक़ है जबकि शाम के समय उनको लाते हो और सुबह के समय छोड़ते हो। और वे तुम्हारे बोझ ऐसी जगहों तक पहुंचाते हैं जहां तुम सख्त मेहनत के बिना नहीं पहुंच सकते थे। निस्संदेह तुम्हारा पालनहार बड़ा प्रजा वत्सल, दयालु है।
और उसने घोड़े,ख़च्चर और गधे पैदा किये ताकि तुम उनपर सवार हो और शोभा के लिए भी और वह ऐसी चीज़ें पैदा करता है जिन्हें तुम नहीं जानते।
और परमेश्वर तक पहुंचती है सीधी राह और कुछ राहें टेढ़ी भी हैं और अगर परमेश्वर चाहता तो तुम सबको (एक ही मार्ग की) प्रेरणा दे देता।वही है जिसने ऊपर से पानी उतारा तुम उसमें से पीते हो और उसी से पेड़ होते हैं जिनमें तुम चराते हो। वह उसी से तुम्हारे लिए खेती और ज़ैतून और खजूर और अंगूर और हर क़िस्म के फल उगाता है।
और उसने तुम्हारे काम में लगा दिया रात को और दिन को और सूरज को और चांद को और सितारे भी उसके हुक्म से वशीभूत हैं, निस्संदेह इसमें निशानियां हैं बुद्धिजीवियों के लिए। और ज़मीन में जो चीज़ें मुख्तलिफ़ क़िस्म की तुम्हारे लिए फैलाईं, निस्संदेह इसमें निशानी है उन लोगों के लिए जो (घटनाओं को देखकर) सबक़ हासिल करें।
और वही है जिसने समुद्र को तुम्हारी सेवा में लगा दिया ताकि तुम उसमें से (मछली आदि का) ताज़ा मांस खाओ और उससे आभूषण निकालो जिसको तुम पहनते हो और तुम नौकाओं को देखते हो कि उसमें चीरती हुई चलती हैं और ताकि तुम उसका फ़ज़्ल तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो।
और उसने ज़मीन में पहाड़ रख दिये ताकि वह तुमको लेकर डगमगाने न लगे और उसने नहरें और रास्ते बनाए ताकि तुम राह पाओ। और दूसरे बहुत से चिन्ह भी हैं और लोग तारों से भी रास्ता मालूम कर लेते हैं।
फिर क्या जो पैदा करता है वह उसके बराबर है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकता, क्या तुम सोचते-विचारते नहीं ?
अगर तुम परमेश्वर की भेंट-उपहारों को गिनो तो तुम उनको गिन न सकोगे। निस्संदेह परमेश्वर क्षमाशील दयावान है।
अनुवाद- मौलाना वहीदुददीन ख़ान, तज़्कीरूल कुरआन, उर्दू से हिन्दी
-पवित्र कुरआन, सूरह ए नहल,1-18
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