सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
Saturday, June 5, 2010
Namaz नमाज़ को उसकी सम्पूर्णता में अदा करना ही इनसान को उसकी मन्ज़िल तक पहुंचाने का एकमात्र मार्ग है।
हे पैग़म्बर! जब आपसे मेरे बन्दे मेरे बारे में पूछें तो उन्हें बता दीजिये कि मैं तो क़रीब ही हूं। मैं सुनता हूं पुकारने वाले की पुकार जब वह मुझे पुकारता है सो उन्हें चाहिये कि वे भी मेरी पुकार पर ध्यान दें ताकि वे सफलता का मार्ग पा जायें। - अलकुरआन
परमेश्वर दूर नहीं है बल्कि क़रीब है, सामने है, साथ है लेकिन हमें बोध नहीं है। हम परमेश्वर के स्वरूप को नहीं पहचानते लेकिन हम दुनिया पर यह ज़ाहिर करते हैं कि हम जानते हैं। अज्ञान और अहंकार हमें सत्य को स्वीकार करने नहीं देता। मस्जिदों से मालिक के दरबार में हाज़िर होकर ज्ञान पाने के लिए पुकारा जाता है लेकिन अक्सर लोग सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। मालिक अजन्मा है लेकिन लोग उसे एवॉइड करके उनकी पूजा में लगे रहते हैं जिन्होंने जन्म लिया और मर गये।
नम + अज = नमाज अर्थात अजन्मे को नमन करना।
नमाज़ में बन्दा अपने रब के सामने झुक जाता है, अपने अहंकार का त्याग करता है। वह अपने मालिक का हुक्म अर्थात कुरआन सुनता है जो उसके अज्ञान का अन्त कर देता है। नमाज़ से इनसान को वह सब कुछ मिलता है जो बन्दे को रब तक पहुंचाने के लिए ज़रूरी है। नमाज़ को उसकी सम्पूर्णता में अदा करना ही इनसान को उसकी मन्ज़िल तक पहुंचाने का एकमात्र मार्ग है।
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