सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



Thursday, April 5, 2012

इस्लाम सारी इंसानियत को उसके माँ बाप की पहचान भी कराता है और उनका आदर करना भी सिखाता है

बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ के सन्दर्भ में

ख़ुशदीप सहगल किसी ब्लॉग पर अपनी मां का काल्पनिक नंगा फ़ोटो देखें तो उन्हें दुख होगा इसमें ज़रा भी शक नहीं है लेकिन उनकी मां का नंगा फ़ोटो ब्लॉग पर लगा हुआ है और उन्हें दुख का कोई अहसास ही नहीं है।
...और यह फ़ोटो उनके ही ब्लॉग पर है और ख़ुद उन्होंने ही लगाया है।
उन्होंने चुटकुलों भरी एक पोस्ट तैयार की। जिसका शीर्षक है ‘बोल्डनेस छोड़िए और हो जाइये कूल‘
इस पोस्ट का पहला चुटकुला ही हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और अम्मा हव्वा अलैहिस्सलाम पर है। इस लिहाज़ से उन्होंने एक फ़ोटो भी उनका ही लगा दिया है। फ़ोटो में उन्हें नंगा दिखाया गया है।
दुनिया की तीन बड़ी क़ौमें यहूदी, ईसाई और मुसलमान आदम और हव्वा को मानव जाति का आदि पिता और आदि माता मानते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं। ये तीनों मिलकर आधी दुनिया की आबादी के बराबर हैं। अरबों लोग जिनका सम्मान करते हैं, उनके नंगे फ़ोटो लगाकर ब्लॉग पर हा  हा ही ही की जा रही है।
यह कैसी बेहिसी है भाई साहब ?
आदम हव्वा का फ़ोटो इसलिए लगा दिया कि ये हमारे कुछ थोड़े ही लगते हैं, ये अब्राहमिक रिलीजन वालों के मां बाप लगते हैं।

अरे भाई ! आप किस की संतान हो ?
कहेंगे कि हम तो मनु की संतान हैं।
और पूछा जाए कि मनु कौन हैं, तो ...?
कुछ पता नहीं है कि मनु कौन हैं !

अथर्ववेद 11,8 बताता है कि मनु कौन हैं ?
इस सूक्त के रचनाकार ऋषि कोरूपथिः हैं -
यन्मन्युर्जायामावहत संकल्पस्य गृहादधिन।
क आसं जन्याः क वराः क उ ज्येष्ठवरोऽभवत्। 1 ।
तप चैवास्तां कर्भ चतर्महत्यर्णवे।
त आसं जन्यास्ते वरा ब्रह्म ज्येष्ठवरोऽभवत् । 2 ।
दशसाकमजायन्त देवा देवेभ्यः पुरा।
यो वै तान् विद्यात् प्रत्यक्षं सवा अद्य महद् वदेत । 3 ।
प्राणापानीचक्षुः श्रोतमक्षितिश्च क्षितिश्न या ।
ध्यानोदानौ नाड्Ûमनस्ते वा आकूतिमावहन् । 4 ।
आजाता आसन्नृतवोऽथो धाता बृहस्पतिः ।
इन्द्रग्नो अश्विना तर्हि क ते ज्येष्ठमुपासत । 5 ।
तपश्च वास्तां कर्म चांतर्महत्यर्णवे ।
तपो ह जज्ञे कर्णाणाष्तत् ते ज्येष्ठमुपासत । 6 ।
येते आसीद् भूमि पूर्वा यामद्धातय इद् विदुः ।
यो वै तां विद्यान्नमथा स मन्येत पुराणावित । 7 ।
कुतः इन्द्रः कुतः सोमः कुतो अग्निरजायत ।
कुतस्त्वष्टा समभवत् कुतो धाता जायतः । 8 ।
इन्द्रा दन्द्रः सोमात् सोमो अग्नेरग्निरजायत ।
त्वष्टा स जज्ञे त्वष्ट्रर्घाताजायत । 9 ।
ये त आसन् दश जाता देवा देवेभ्यः पुरा ।
पुत्रेभ्यां लोकं दत्वा किस्मिस्ते लोक आसते । 10 ।
यदा वे शानस्थिस्वान मांसं मज्जानमाभरत् ।
शरीरं कृत्वा पादवत्कं लोकमनु द्राविशत् । 11 ।
कुतः केशान् कुता स्नाद कुतो अस्थोन्याभरत् ।
अंगा पर्वाणि मज्जानं कोमांसं कुत आभरत् । 12 ।
ससिचो नाम ते देवा ये संभारान्त्समभरन् ।
सर्व ससिच्य मर्त्य दवाः पुरूषमाविशम् । 13 ।
उरू पादावष्टीवन्तौ शिषो हस्तावथो मुखम।
पृष्टी र्वर्जह्यै पार्श्वे कस्तत् समदधादृषिः । 14 ।
शिहो हस्ताचथो मुखं जिहृग्रौवाश्च काकसाः ।
त्वचा प्रावृत्य सर्वा तत् संधा समदधान्महो । 15 ।
तत्तच्चरीरमशयत संधया संहितं महत् ।
येनेदमद्य रोचते को अस्मिन वर्णामाभरत । 16 ।
सर्वे देवा उपाशिक्षन तदजानाद् वधुः सती ।
इशा वशस्य या जाता सास्मिन वर्णामाभरत । 17 ।
यदा त्वष्टा व्युतृणात् पिता त्वष्टर्य उत्तरः
गृह कृत्वा मर्त्यदेवाः पुरूषमाविशन् । 18 ।
स्वप्नो वै तन्द्रर्निर्ऋतिः तिः पाप्मानो नाम देवताः ।
जरा खालित्यं पालित्यं शरीरमन प्राविशन् । 19 ।
स्तेयं दुष्कृत वृजिनं सत्यं यज्ञो यशो वृहत् ।
बलं च क्षत्रोजश्च शरीरमनु प्राविशन् । 20 ।
भूतिश्च वा अभूतिश्च रातवोऽरातयश्च याः ।
क्षुधश्च सर्वास्तृष्णाश्च शरीरमनुः प्राविशन् । 21 ।
निन्दाश्च वा अनिन्दाश्च यच्च हन्तेति तेति च ।
शरीर श्रद्धा दक्षिणाश्रद्धा चानु प्राविशन् । 22 ।
विद्याश्च अविद्याश्च यच्चान्वदुषदेश्यम् ।
शरीरं ब्रह्मा प्राविशदृचः सामाधो यजु. । 23 ।
आनन्दा मोदाः प्रमुदोऽभीमीदमुदश्च ये ।
हसो नरिष्ठा नृत्तानि शरीरमनु प्राविशन् । 24 ।
आलापाश्च प्रलापाश्चाभीलापलश्च ये ।
शरीरं सर्वे प्राविशन्नायुजः प्रयुजो युजः । 25 ।
प्राणापानो चक्षु श्रोत्रमक्षितिश्च क्षितिश्च या ।
व्यानोदानौ वाड्Ûमन शरीरेण त ईयन्ते । 26 ।
धाशि षश्च प्रशिषश्च सांशियो विशषश्च याः ।
चित्तः नि सर्वे संकल्पाः शरीरमनु प्राविशन् । 27 ।
आस्नेयोश्च वास्तेयोश्च त्वरणाः कृपणाश्च याः ।
गृह्या. शुक्रा स्थूला अपस्ता वींमत्सावसादयन् । 28 ।
अस्थि कृत्वा समिधं तदष्टापो असादयन ।
रेतः कृत्वाज्यं देवाः पुरूषयाविशन । 29 ।
या आसो याश्च देवता या विराड् बह्माणा सह।
शरीरं बह्म प्राविशच्छरीरेऽधि प्रजापतिः । 30 ।
सूर्यश्चक्षुर्वातः पुरूषस्य वि भेजिरे।
अथास्येतरमात्मान देवाः प्रायच्छन्नग्नये । 31 ।
तस्माद वै विद्वान पुरूषमिद ब्रह्मेति मन्यते।
सर्वाह्यस्मिन देवता गावो गोष्ठाइवासते । 32 ।
प्रथमेन प्रमारेण त्रेधा विष्वड् वि गच्च्छति ।
अदएकेन गच्छत्यद एकेन गच्छतीहैकेन नि षेवत । 33 ।
अप्सु सोमास वृद्धासु शरीरमन्तरा हितम् ।
तस्मिञ्छवोऽघ्यन्तरा तस्माच्छयोऽध्पुच्यते । 34 ।

अर्थात मन्यु ने जाया को संकल्प के घर से विवाहा। उससे पहले सृष्टि न होने से वर पक्ष कौन हुआ और कन्या पक्ष कौन हुआ ? कन्या के चरण कराने वाले बराती कौन थे और उद्वाहक कौन था ? ।1। तप और कर्म ही वर पक्ष और कन्या पक्ष वाले थे, यही बराती थे और उद्वाहक स्वयं ब्रह्म था।2। पहले दश देवता उत्पन्न हुए। जिनसे इन देवताओं को प्रत्यक्ष रूप से जान लिया वही ब्रह्म का उपदेश करने में समर्थ है।3। प्राण, अपान नामक वृत्तियां, चक्षु, कान, अक्षित, क्षिति, व्यान, उदान, वाणी, मन, आकृति-यह सभी कामनाओं को अभिमुख करते हुए उन्हें पूर्ण कराते हैं।4। सृष्टिकाल में ऋतुएं उत्पन्न नहीं हुई थीं। धाता, बृहस्पति, इन्द्र और अश्विनीकुमार भी उत्पन्न नहीं हुए थे। तब इन धाता आदि ने किस बड़े कारणभूत उत्पादक की अभ्यर्चना की ?।5। तप और कर्म ही उपकरण रूप थे। कर्म से तप उत्पन्न हुआ था। इसलिए ये धाता आदि अपने द्वारा किए हुए महान् कर्म को ही अपने उत्पादन के लिए प्रार्थना करते हैं।6। वर्तमान पृथिवी से पूर्व विगत विगत पुत्र की जो पृथिवी थी, उसे तप द्वारा सर्वज्ञ होने वाले महर्षि ही जानते हैं। जो विद्वान विगत युग की पृथिवी में स्थित वस्तुओं के नाम को जानने वाला है, वही इस वर्तमान पृथिवी को जानने में समर्थ है।7। इन्द्र किस कारण से उत्पन्न हुआ ?, सोम, अग्नि, त्वष्टा और धाता किस किस कारण से उत्पन्न हुए ?।8। विगत युग में जैसा इन्द्र था वैसा ही इस युग में हुआ। जैसे सोम, अग्नि, त्वष्टा और धाता पुरातन में थे वैसे ही इस युग में भी हुए।9। जिन अग्नि आदि देवताओं से प्राणपान रूप दश देवता उत्पन्न हुए, वे अपने पुत्रों को अपना स्थान देकर किस लोक में निवास करते हैं ?।10।
सृष्टि के समय जब विधाता ने बाल, अस्थि, नसें, मांस मज्जा को संचित किया तो उनसे शरीर की रचना कर उसने किस लोक में प्रवेश किया ?।11। किन उपादान से केश संग्रहीत किए ? स्नायु कहां से प्रकट हुआ, अस्थियां कहां से आईं ? मज्जा और मांस कहां से मिला ? यह सब अपने में से ही इकठ्ठा किया, ऐसा अन्य कौन कर सकता है ?।12। ससिच् नाम के देवता मरणशील देह को रक्त से भिगोकर उसे पुरूषाकृति में बना, उसी में प्रविष्ट हो गए।13। घुटनों पर वर्तमान जंघाएं घुटनों के नीचे पांव, जांघों, और पांवों के मध्य घुटने, शिर, हाथ, मुख, वर्जह्य, पसलियां और पीठ इन सबको किसने परस्पर मिलाया ?।14। शिर,हाथ,मुख,जीभ,कण्ठ और हड्डियों की चर्म आवृत कर देवताओं ने अपने अपने कर्म में प्रवृत्त किया।15। जधात्री देव के द्वारा जिसके अवयव इस प्रकार जुड़े हैं वह देहों में वर्तमान है, वह देह जिस श्याम-गौर वर्ण से युक्त हैं, उसमें किस देवता ने वर्ण की स्थापना की ?।16। इस शरीर के समीप सब देवता रहना चाहते थे। इस वधू बनने वाली आद्या ने देवताओं की इस इच्छा को जानकर छः कोश देह में नील, पीत गौर आदि रंगों की स्थापना की।17। इस संसार के रचयिता ने जब नेत्र, कान आदि छिद्रों को बनाया, तब त्वष्टा के द्वारा बहुत से छेद वाले पुरूष वाले पुरूष देह को घर बनाकर प्राण, अपान, अपान और इन्द्रिय ने प्रवेश किया।18। स्वप्न, निद्रा, आलस्य, निर्ऋति, पाप इस पुरूष देह में घुस गए और आयु हरण करने वाली जरा, चक्षु, मन, खालित्य, पालित्य आदि के अभिमानी देवता भी उसमें प्रविष्ट हो गए।19। चोरी, दुष्कर्म, पाप, सत्य, यज्ञ, महान, जल क्षात्रधर्म और ओज भी मनुष्य देह में प्रविष्ट हो गए।20।

यहां स्वयंभू मनु के विवाह को सृष्टि का सबसे पहला विवाह बताया गया है और उनकी पत्नी को जाया और आद्या कहा गया है। ‘आद्या‘ का अर्थ ही पहली होता है और ‘आद्य‘ का अर्थ होता है पहला। ‘आद्य‘ धातु से ही ‘आदिम्‘ शब्द बना जो कि अरबी और हिब्रू भाषा में जाकर ‘आदम‘ हो गया।
स्वयंभू मनु का ही एक नाम आदम है। अब यह बिल्कुल स्पष्ट है। अब इसमें किसी को कोई शक न होना चाहिए कि मनु और जाया को ही आदम और हव्वा कहा जाता है और सारी मानव जाति के माता पिता यही हैं।
ख़ुशदीप सहगल के माता पिता भी यही हैं।
अपने मां बाप के नंगे फ़ोटो ब्लॉग पर लगाकर सहगल साहब ख़ुश हो रहे हैं कि देखो मैंने कितनी अच्छी पोस्ट लिखी है।
अपनी मां की नंगी फ़ोटो लगा नहीं सकते और जो उनकी मां की भी मां है और सबकी मां है उसका नंगा फ़ोटो लगाकर बैठ गए हैं और किसी ने उन्हें टोका तक नहीं ?
ये है हिंदी ब्लॉग जगत !
कहते हैं कि हम पढ़े लिखे और सभ्य हैं।
हम इंसान के जज़्बात को आदर देते हैं।
अपने मां बाप आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम पर मनघड़न्त चुटकुले बनाना और उनका काल्पनिक व नंगा फ़ोटो लगाना क्या उन सबकी इंसानियत पर ही सवालिया निशान नहीं लगा रहा है जो कि यह सब देख रहे हैं और फिर भी मुस्कुरा रहे हैं ?




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    सम्पूर्ण मानव जाति की माँ का नंगा चित्र प्रकाशित करना कितना उचित है ?
    रात हमने 'ब्लॉग की ख़बरें' पर पोस्ट पब्लिश करने के साथ ही उनकी पोस्ट पर टिप्पणी भी की और इस पोस्ट की सूचना देने के लिए अपना लिंक भी छोड़ा लेकिन उन्होंने गलती को मिटने के बजाय हमारी टिप्पणी ही मिटा डाली.
    उनकी गलती दिलबाग जी ने भी दोहरा डाली. उनकी पोस्ट से फोटो लेकर उन्होंने भी चर्चा मंच की पोस्ट   (चर्चा - 840 ) में लगा दिया है.
    एक टिप्पणी हमने चर्चा मंच की पोस्ट पर भी कर दी है.
    यह मुद्दा तो सबके माता पिता की इज्ज़त से जुडा है. सभी को इसपर अपना ऐतराज़ दर्ज कराना चाहिए.
    http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/04/manu-means-adam.html

    2 comments:

    Dr. Ayaz Ahmad said...

    Hamen bhi is harkat par sakht aitraaz hai .
    ek post bhi is vishay par hamne abhi abhi likhi hai.

    http://drayazahmad.blogspot.in/2012/04/blog-post_05.html

    चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

    कया विश्लेषण है आपका गज़ब वाह!
    इसे भी देखें-
    ‘घर का न घाट का’