सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



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Thursday, March 25, 2010

शिव वंश के मरते मिटते सदस्यों को कौन यह बोध कराएगा कि वास्तव में वे आपस में सगे सम्बंधी और एक परिवार हैं ? Holy Family of Aadi Shiva


आरम्भ करता हूं अल्लाह के पवित्र नाम से साक्षात शिव अर्थात कल्याणकारी है । उसके हरेक भाषा में असंख्य नाम हैं । वह सत्य और सुन्दर है । उसकी बनाई हरेक भाषा सार्थक है । हरेक भाषा में उसका हरेक नाम सुन्दर और कल्याणकारी है । वह पवित्र है । न वह कभी जन्मा है और न ही मौत की कल्पना उसके लिए की जा सकती है । वह अनादि और अनन्त है ।
समस्त आकाशगंगाओं का वह अकेला स्वामी है । खरबों सूर्य उसके वशीभूत हैं । उसके महान और दिव्य तेज के सामने सभी सूर्यों की आभा शून्य है । वही जीवन का स्रोत है और मृत्यु भी उसी के अधीन है । न तो उसका विशाल अन्तरिक्ष हमारी नज़र में समा सकता है , और न ही उसका वह रूप हमारी कल्पना में आ सकता है जैसा कि वास्तव में वह है ।
उसका हरेक काम सार्थक है ।
सारे जग में हुक्म है तो बस उसका और और सच्चा प्रभुत्व है तो बस उसका ।
जिसे वह देना चाहे तो कोई उसे रोकने वाला नहीं और जिसे वह न देना चाहे तो उसे कोई देने वाला नहीं । उसके सारे कामों में से किसी एक काम की पूरी हक़ीक़त से भी कोई वाक़िफ़ नहीं है
और शांति हो आदम अर्थात आदि शिव पर अनादि शिव अल्लाह की ओर से ।
और शांति सारी मानवजाति की जननी मां हव्वा पर अर्थात जगत जननी माता पार्वती पर ।
शांति हो हम सब पर , हम जोकि उनका अंश भी हैं और उनका वंश भी ।
धर्म और मार्ग तो बस वही है जिसे अनादि शिव ने स्वयं निर्धारित किया और जिसका पालन परम पिता आदि शिव और माता पार्वती जी ने किया ।
जिसने उन्हें फ़ोल्लो (Follow) किया उसने अपना कल्याण किया और जिसने उनसे हटकर अपनी वासना से कोई नई रीत निकाली तो निश्चय ही उसने अपनी तबाही का सामान कर लिया ।
क्या है वह कल्याणकारी धर्म मार्ग , जिसे अनादि शिव ने आदि शिव पर प्रकट किया था ?
वह कहां अंकित है ?
वह कहां सुरक्षित है ?
जन जन को समता और ऐश्वर्य देने वाले उस मार्ग को अब कौन बताएगा ?
अलंकारों को उनके वास्तविक अर्थों में अब कौन समझेगा और विकारों को कौन हटाएगा ?
शिव वंश के मरते मिटते सदस्यों को कौन यह बोध कराएगा कि वास्तव में वे आपस में सगे सम्बंधी और एक परिवार हैं ?गुरू वही है जो अंधकार से प्रकाश में लाये । चेहरों को भी प्रकाश में ही पहचाना जा सकता है और हक़ीक़तों को पहचानने के लिए भी प्रकाश चाहिये , ज्ञान का प्रकाश । अंधकार को गर है मिटाना तो लाज़िम है ज्ञान को पाना (...जारी)
@ अन्य मक़सद धारी प्रिय अमित जी ,
मैंने किसी आपत्ति करने वाले हिन्दू के जनेऊ धारण न करने पर उसे अपने धर्म नियम की पाबन्दी के लिए तो ज़रूर कहा है लेकिन उसे छोड़ने के लिए कहां और कब कहा है , बताइये ?
जो बात मैंने कही नहीं उस पर मुझ पर बिगड़ने का क्या मतलब है ?
आपके जनेऊ आदि छुड़वाये हैं कबीर जी , नानक साहिब और अम्बेडकर आदि ने , सॉरी अम्बेडकर जी के लिए तो आपके यहां जनेऊ पहनना ही वर्जित है । बहरहाल जो भी हो , आप इनसे पूछिये कि इन्होंने ऐसा क्यों किया ?
इन्हें तो आपने सन्त और सुधारक घोषित कर दिया , इनसे आप कैसे पूछेंगे ?
मूतिर्यों पर भी बुलडोज़र मैंने कभी नहीं चलवाया और न ही ऐसा कहीं कहा है ?
आप संस्कृति रक्षक श्री मोदी जी के काम के साथ मेरा नाम क्यों जोड़ रहे हैं ?
गुजरात में मन्दिरों पर बुल्डोज़र उन्होंने चलवाया , उन्हीं से पूछिये ?
मैं तो वैदिक धर्म को मूलतः निर्दोष मानता हूँ । उसमें सुधार चाहता हूं ।
दयानन्द जी और पं. श्री राम आचार्य जी भी जीवन भर वैदिक धर्म के विकारों को अपने विचारों के अनुसार दूर करते रहे ।
मैं भी दूर करना चाहता हूं क्योंकि मैं इसी पवित्र भूमि का पुत्र हूं , मैं भी हिन्दू हूं । क्या मुझे इसका हक़ नहीं है ?अगर नहीं है , तो क्यों नहीं है ?
और मुझे वह हक़ पाने के लिए क्या करना पड़ेगा , जो कि हरेक हिन्दू को प्राप्त है ?
आप प्रायः वे सवाल उठाते हैं जिनका मौजूदा पोस्ट से कोई ताल्लुक़ नहीं होता । पिछली पोस्ट शिव महिमा पर थी , आप को उसमें जो ग़लत लगे उस पर ज़रूर टोकिये लेकिन ...
अब आपको क्या समझाया जाए , आप कोई बच्चे तो हैं नहीं ।
अभी मैं कुछ दिन शिव और महाशिव का गुण बखान करने के मूड में हूं ।
इसलिये प्लीज़ शांति से देखते रहिये । हां , जहां मैं कोई ग़लत बात कहूं वहां ज़रूर टोकिये या फिर आप मुझ से ज़्यादा ज्ञानियों के ब्लॉग्स पर जाकर भी अपने समय और ऊर्जा का सदुपयोग कर सकते हैं । इस तरह मेरी टी.आर.पी. भी डाउन हो जायेगी और यह ब्लॉग गुमनामी के अन्धेरे में खो जाएगा । लेकिन अगर आप आते रहे और कमेन्ट्स देते रहे तो यह ब्लॉग बना रहेगा ।
अगर यह ब्लॉग ग़लत है तो कृपया , इसे न देखकर , इसे मिटा दें ।
किसी पुराने तजर्बेकार ने यह सलाह आपको दी भी है ।
सलाह अच्छी है , आज़माकर तो देखें ।
ख़ैर , एक शेर अर्ज़ है -

अहले ज़र पे उठ सके जो , है कहां ऐसी नज़र

ज़ुल्म तो बस मुफ़लिस ओ नादार पर देखे गए