सनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अ‍ाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to

जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं आचार्य मौलाना शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है, More More More



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Tuesday, April 27, 2010

परमेश्वर के सिवाए कोई उपास्य नहीं . The Lord


ला इलाहा इल् - लल्लाह , मुहम्मद- उर - रसूलुल्लाह
अर्थात परमेश्वर के सिवा कोई उपास्य नहीं है , मुहम्मद परमेश्वर के दूत हैं ।

धर्म की बुनियाद परमेश्वर के अस्तित्व पर पूरा विश्वास और भक्ति है । यही बात सूरा ए फ़ातिहा में यूं कही गई है - इय्याका ना‘बुदु व इय्याका नस्तईन - पवित्र कुरआन , 1, 5

अर्थात हम तेरी ही भक्ति करते हैं और अपने तमाम कामों में तुझ ही से मदद और तौफ़ीक़ तलब करते हैं ।
कु़ल हुवल्लाहु अहद - पवित्र कुरआन , 112 , 1 अर्थात वह परमेश्वर एक है ।
चुनांचे सारे धर्म-मतों में भक्ति का जो भी तरीक़ा प्रचलित है , उसमें मुख़ातिब सिर्फ़ परमेश्वर का ही वुजूद होता है , किसी ऋषि मुनि , नबी या रसूल को संबोधित नहीं किया जाता । यह सबूत है इस बात का कि सभी धर्म-मतों का बुनियादी विश्वास एक परमेश्वर पर यक़ीन और उसकी भक्ति है । इसमें रद्दो बदल या कमी-ज़्यादती बाद की बातें हैं ।
हज़रत उस्मान से रिवायत की गई हदीस में यह कहा गया है कि
जो आदमी इस हाल में मरा कि उसे इस बात का यक़ीन था कि परमेश्वर के सिवाए कोई उपास्य नहीं , वह जन्नत में दाखि़ल हो गया ।
तो इसका भी यही मतलब है कि बुनियादी चीज़ अल्लाह की इबादत है । सो , जब किसी आदमी ने यह फ़र्ज़ अदा कर दिया , तो वह अपनी मन्ज़िले मक़सूद को पहुंच गया ।
लेखक : मालिक राम

पुस्तक : इस्लामियात ( उर्दू ) पृष्ठ 15 का हिन्दी अनुवाद

प्रकाशक : मकतबा जामिया लिमिटेड , नई दिल्ली

जो आदमी जानना चाहे कि मालिक राम कौन थे ?

वह इस पते पर ईमेल करके मौलाना वहीदुद्दीन ख़ान साहब से पूछ सकता है ।

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