सनातन धर्म के अध्ययन हेतु वेद-- कुरआन पर अाधारित famous-book-ab-bhi-na-jage-to
जिस पुस्तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजबूर कर दिया था उसका यह हिन्दी रूपान्तर है, महान सन्त एवं आचार्य मौलाना शम्स नवेद उस्मानी के धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन पर आधारति पुस्तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्मक अध्ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्त के प्रिय शिष्य एस. अब्दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक शिष्य जावेद अन्जुम (प्रवक्ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्तक के असल भाव का प्रतिबिम्ब उतर आए इस्लाम की ज्योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकने का सार्थक प्रयास हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रस्तुत है, More More More
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Tuesday, July 5, 2011
प्यार का रिश्ता ही इंसानियत की पहचान है I love my India
श्यौराज सिंह को हमने रंगे हाथों पकड़ लिया। हुआ यूं कि सोमवार की सुबह 4 जुलाई 2011 को हमने उनके दोनों हाथों को केसरिया रंग में रंगा हुआ देखा और माथे पर भी बड़ा सा केसरिया टीका लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि वह अभी अभी हनुमान जी को सिंदूर और तेल लगा कर आ रहे हैं।
एक कथा मशहूर है कि सीता माता को अपनी मांग में सिंदूर लगाता देख कर हनुमान जी ने पूछा कि यह आप क्यों लगा रही हैं ?
उन्होंने जवाब दिया कि इसे देखकर श्री रामचन्द्र जी प्रसन्न होते हैं।
हनुमान जी ने अपने पूरे बदन पर ही सिंदूर मल लिया कि ज़्यादा सिंदूर देखकर श्री रामचंद्र जी और भी ज़्यादा प्रसन्न हो जाएंगे।
श्री रामचंद्र जी ने जब उन्हें देखा तो वह बहुत हंसे।
धर्म के नाम पर इस तरह की बहुत सी कथाएं यहां प्रचलित हैं और लोग श्रृद्धावश उन्हें सच्चा भी मानते हैं। आज हनुमान जी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मूर्तियों को पूरे देश में तेल और सिंदूर से रंगा जा रहा है।
मैं श्यौराज जी की बात से सहमत नहीं हूं लेकिन इससे हमारे प्यार में कोई अंतर नहीं आता है।
हम इंसान हैं और इंसानों के बीच में प्यार का रिश्ता हर हाल में क़ायम रहना चाहिए। इंसान वह नहीं है जो केवल अपने वर्ग और अपने जैसी मान्यता वालों से ही प्यार करे और उनके अलावा दूसरे लोगों को अपने प्यार से महरूम रखे। यह इंसानियत नहीं है बल्कि यह तास्सुब और सांप्रदायिकता है।
बेहतर समाज के लिए हमें अपने स्वभाव और अपनी मान्यताओं के अंतर के बावजूद सबसे प्यार का रिश्ता बनाना होगा और अगर पहले से बना हुआ है तो उसे क़ायम रखना होगा और जो लोग इसे तोड़ने पर आमादा हैं उनसे संघर्ष करना होगा।
हम भारतवासी इसी प्यार के बलबूते पर जीते हैं।
तमाम कष्टों के बावजूद भी यह प्यार हमें आज भी नसीब है।
यही हमारी संस्कृति है और यही हमारा धर्म है।
धर्म के प्रति यहां ज़्यादातर लोगों में अपार श्रृद्धा है। कोई इस श्रृद्धा को सही दिशा दे सके, उसका यहां सदा से स्वागत है।
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| श्री श्यौराज सिंह रंगे हाथों |
उन्होंने जवाब दिया कि इसे देखकर श्री रामचन्द्र जी प्रसन्न होते हैं।
हनुमान जी ने अपने पूरे बदन पर ही सिंदूर मल लिया कि ज़्यादा सिंदूर देखकर श्री रामचंद्र जी और भी ज़्यादा प्रसन्न हो जाएंगे।
श्री रामचंद्र जी ने जब उन्हें देखा तो वह बहुत हंसे।
धर्म के नाम पर इस तरह की बहुत सी कथाएं यहां प्रचलित हैं और लोग श्रृद्धावश उन्हें सच्चा भी मानते हैं। आज हनुमान जी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मूर्तियों को पूरे देश में तेल और सिंदूर से रंगा जा रहा है।
मैं श्यौराज जी की बात से सहमत नहीं हूं लेकिन इससे हमारे प्यार में कोई अंतर नहीं आता है।
हम इंसान हैं और इंसानों के बीच में प्यार का रिश्ता हर हाल में क़ायम रहना चाहिए। इंसान वह नहीं है जो केवल अपने वर्ग और अपने जैसी मान्यता वालों से ही प्यार करे और उनके अलावा दूसरे लोगों को अपने प्यार से महरूम रखे। यह इंसानियत नहीं है बल्कि यह तास्सुब और सांप्रदायिकता है।
बेहतर समाज के लिए हमें अपने स्वभाव और अपनी मान्यताओं के अंतर के बावजूद सबसे प्यार का रिश्ता बनाना होगा और अगर पहले से बना हुआ है तो उसे क़ायम रखना होगा और जो लोग इसे तोड़ने पर आमादा हैं उनसे संघर्ष करना होगा।
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| श्री श्यौराज सिंह के साथ लेखक अनवर जमाल |
भारत की भूमि प्यार से लबालब है। यह ख़ुशी की बात है।
जहां प्यार होगा वहां श्रृद्धा ज़रूर होगी।हम भारतवासी इसी प्यार के बलबूते पर जीते हैं।
तमाम कष्टों के बावजूद भी यह प्यार हमें आज भी नसीब है।
यही हमारी संस्कृति है और यही हमारा धर्म है।
धर्म के प्रति यहां ज़्यादातर लोगों में अपार श्रृद्धा है। कोई इस श्रृद्धा को सही दिशा दे सके, उसका यहां सदा से स्वागत है।
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